शेख हसीना की वापसी के ऐलान से बांग्लादेश में हड़कंप, राष्ट्रपति को हटाने की तैयारी

शेख हसीना ने इस साल के अंत तक बांग्लादेश लौटने की घोषणा की है, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। तारिक रहमान की सरकार ने राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन को अगस्त तक पद छोड़ने का अल्टीमेटम दिया है ताकि हसीना की वापसी पर कोई कानूनी अड़चन न आए।

बांग्लादेश के राजनीतिक गलियारे में उस समय हड़कंप मच गया जब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस साल के अंत तक स्वदेश लौटने का आधिकारिक ऐलान कर दिया। शेख हसीना की इस घोषणा ने वर्तमान तारिक रहमान सरकार की रातों की नींद उड़ा दी है। इस संभावित वापसी के मद्देनजर, बीएनपी के नेतृत्व वाली सरकार ने आनन-फानन में बड़े राजनीतिक बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में सरकार ने राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन को उनके पद से हटाने का फैसला लिया है। राष्ट्रपति कार्यालय के सूत्रों ने स्थानीय समाचार पत्र देश वंतूर को जानकारी दी है कि रहमान सरकार ने राष्ट्रपति से स्पष्ट रूप से इस्तीफा देने को कहा है और इसके लिए उन्हें अगस्त तक का समय दिया गया है।

राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन को मिला अल्टीमेटम

राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन का कार्यकाल आधिकारिक तौर पर 2028 तक निर्धारित है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के कारण उन्हें अगस्त तक पद छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है। हालांकि राष्ट्रपति कार्यालय ने इस बात की पुष्टि की है कि उन्हें इस्तीफे के लिए कहा गया है, लेकिन राष्ट्रपति ने अभी तक इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है कि वे पद छोड़ेंगे या नहीं। सरकार का यह कदम पूरी तरह से शेख हसीना की वापसी को रोकने और उनके प्रभाव को कम करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

इस्तीफे की मांग के पीछे के मुख्य कारण

राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन को हटाने के पीछे सबसे बड़ा कारण उनका शेख हसीना के प्रति झुकाव माना जा रहा है। गौरतलब है कि 2023 में शेख हसीना ने ही शहाबुद्दीन को राष्ट्रपति के पद पर नियुक्त किया था। जब अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार का तख्तापलट हुआ था, तब भी राष्ट्रपति को हटाने की मांग उठी थी। उस समय संवैधानिक बाधाओं के कारण बीएनपी ने इस मांग का विरोध किया था। यूनुस सरकार के कार्यकाल के दौरान भी बीएनपी ने राष्ट्रपति का समर्थन किया था, जिसके कारण शहाबुद्दीन अपने पद पर बने रहने में सफल रहे थे। लेकिन अब शेख हसीना की वापसी की खबर ने समीकरण बदल दिए हैं।

तारिक रहमान की सरकार को इस बात का गहरा डर सता रहा है कि यदि शेख हसीना बांग्लादेश वापस आती हैं, तो राष्ट्रपति शहाबुद्दीन कानून और अपने संवैधानिक अधिकारों का उपयोग करके उन्हें कानूनी राहत प्रदान कर सकते हैं। सरकार को अंदेशा है कि राष्ट्रपति की मौजूदगी में वे शेख हसीना के खिलाफ कोई भी सख्त कानूनी या राजनीतिक कदम नहीं उठा पाएंगे। 79 साल की शेख हसीना और उनकी पार्टी अभी भी देश में एक मजबूत आधार रखती है। यदि हसीना की वापसी प्रभावशाली रहती है, तो आने वाले समय में तारिक रहमान के लिए सत्ता संभालना और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

स्वास्थ्य कारणों का हवाला देने का दबाव

सरकार चाहती है कि राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन खुद ही अपने खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर पद से हट जाएं। हाल ही में राष्ट्रपति का लंदन में दिल का ऑपरेशन हुआ था और वे लंबे समय से बीमार चल रहे हैं। सरकार का मानना है कि यदि वे बीमारी के आधार पर इस्तीफा देते हैं, तो यह एक संवैधानिक रूप से सुरक्षित रास्ता होगा। इससे सरकार को अपनी पसंद का राष्ट्रपति नियुक्त करने का अवसर मिलेगा जो शेख हसीना के खिलाफ सरकार की नीतियों का समर्थन कर सके।

शेख हसीना का निर्वासन और वापसी की घोषणा

अगस्त 2024 में हुए विद्रोह के बाद शेख हसीना को ढाका छोड़कर दिल्ली आना पड़ा था। उनके जाने के बाद बांग्लादेश में उनकी पार्टी पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए गए थे। इसके बाद इस साल फरवरी में हुए आम चुनावों में तारिक रहमान की पार्टी ने जीत हासिल की और सत्ता पर काबिज हुई। अब शेख हसीना ने फिर से ढाका लौटने का मन बना लिया है। उन्होंने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि उनका संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। इस घोषणा ने बांग्लादेश की राजनीति में एक नया उबाल ला दिया है।

कानूनी शिकंजा और सजा का सामना

शेख हसीना के लिए वापसी की राह आसान नहीं है क्योंकि उन पर बांग्लादेश में 600 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। इनमें से 10 मामलों में उन्हें पहले ही मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। इन गंभीर कानूनी चुनौतियों और सजा-ए-मौत के बावजूद, उनकी वापसी के ऐलान ने सरकार की चिंताओं को चरम पर पहुंचा दिया है। सरकार अब हर संभव कोशिश कर रही है कि हसीना की वापसी से पहले प्रशासनिक और संवैधानिक व्यवस्था को अपने अनुकूल कर लिया जाए।