अमेरिका में सार्वजनिक स्थानों और बुनियादी ढांचे के नाम बदलने की राजनीति एक नए और महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है। न्यूयॉर्क शहर के सबसे व्यस्त और प्रतिष्ठित परिवहन केंद्रों में से एक, पेन स्टेशन का नाम बदलने की कवायद अब तेज हो गई है। रिपब्लिकन प्रशासन ने इस सप्ताह अमेरिका के प्रमुख सीनेटरों से अनुरोध किया है कि वे इस ऐतिहासिक स्टेशन का नाम बदलकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर रखने पर विचार करें। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब प्रशासन मैनहट्टन के इस भूमिगत ट्रांजिट हब को फिर से डिजाइन करने की 8 अरब डॉलर की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहा है।
8 अरब डॉलर का पुनर्विकास और फंडिंग की मांग
पेन स्टेशन, जिसे पेन्सिलवेनिया स्टेशन के नाम से भी जाना जाता है, 100 साल से भी अधिक पुराना है और न्यूयॉर्क के सबसे व्यस्ततम इलाकों में से एक है। अमेरिकी परिवहन मंत्री शॉन डफी ने बुधवार को कांग्रेस को एक पत्र लिखकर इस स्टेशन की मरम्मत और अन्य परिवहन प्राथमिकताओं के लिए फंडिंग की मंजूरी मांगी है। हालांकि इस पत्र में तकनीकी सुधारों पर जोर दिया गया है, लेकिन डफी ने पहले भी कई बार संकेत दिया है कि वे इस स्टेशन के सामने अपने बॉस यानी डोनाल्ड ट्रंप का नाम देखना पसंद करेंगे। उन्होंने पिछले साल एक बयान में कहा था कि "ट्रंप स्टेशन" नाम सुनने में काफी अच्छा लगता है।
ट्रंप का तर्क और पेन्सिलवेनिया बनाम न्यूयॉर्क
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस नाम परिवर्तन के पीछे एक दिलचस्प तर्क दिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि उन्हें पेन्सिलवेनिया राज्य से बहुत लगाव है, लेकिन व्यावसायिक दृष्टि से वह न्यूयॉर्क का सीधा प्रतिद्वंद्वी है। ट्रंप के अनुसार, पेन्सिलवेनिया न्यूयॉर्क का बिजनेस छीन रहा है, इसलिए न्यूयॉर्क के इतने बड़े लैंडमार्क का नाम किसी दूसरे राज्य के नाम पर रखना समझदारी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नाम बदलने का विचार उनका अपना नहीं था, बल्कि यह सुझाव कुछ नेताओं और कंस्ट्रक्शन यूनियन से जुड़े लोगों ने दिया था।
व्हाइट हाउस का रुख और अन्य नाम परिवर्तन
" यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप के नाम पर किसी सार्वजनिक स्थल का नाम रखा जा रहा है। इसी महीने की शुरुआत में फ्लोरिडा के पाम बीच एयरपोर्ट का नाम बदलकर 'प्रेसिडेंट डोनाल्ड जे ट्रंप इंटरनेशनल एयरपोर्ट' कर दिया गया था। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि न्यूयॉर्क के सीनेटर चक शूमर ने ही उन्हें पेन स्टेशन का नाम बदलकर ट्रंप स्टेशन करने का सुझाव दिया था, हालांकि उन्होंने इस बात से इनकार किया कि यह 'गेटवे प्रोजेक्ट' के लिए फेडरल फंडिंग प्राप्त करने की कोई शर्त थी।
पेन स्टेशन का गौरवशाली इतिहास और नया डिजाइन
पेन स्टेशन का इतिहास 1910 से शुरू होता है जब इसे पेन्सिलवेनिया रेल रोड कंपनी द्वारा बनाया गया था। उस समय यह 'ब्यू आर्ट्स' स्टाइल का एक बेहतरीन नमूना था, जिसमें रोमन शैली के विशाल खंभे और एक भव्य वेटिंग एरिया था। हालांकि, 1963 में मैडिसन स्क्वायर गार्डन बनाने के लिए इस मूल ढांचे को गिरा दिया गया था, जिसकी आज भी आलोचना होती है। अब 8 अरब डॉलर के नए प्रोजेक्ट के तहत इस हब को उसके पुराने क्लासिकल स्टाइल में वापस लाने की योजना है। नए डिजाइन में पत्थर का बाहरी हिस्सा, खंभों की कतारें और ऊंची छतों वाला एक शानदार कॉन्कोर्स शामिल होगा, जिसमें ट्रंप की सील और नाम भी प्रदर्शित किए जाने की संभावना है।
विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया और आलोचना
इस प्रस्ताव की डेमोक्रेटिक नेताओं और स्थानीय समूहों ने कड़ी आलोचना की है। मैनहट्टन के प्रतिनिधि जेरी नैडलर ने इसे ट्रंप प्रशासन द्वारा पेन स्टेशन पर "जबरदस्ती कब्जा करने की कोशिश" करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन स्थानीय अधिकारियों से नियंत्रण छीनना चाहता है। वहीं, स्थानीय ट्रांसपोर्ट एडवोकेसी ग्रुप 'राइडर्स एलायंस' ने इसे अरबों डॉलर की बर्बादी वाला एक "दिखावटी प्रोजेक्ट" बताया है और ग्रुप की प्रवक्ता डैनी पर्लस्टीन ने कहा कि सरकार को स्मारकों और नेमप्लेट बदलने के बजाय सेवा को बेहतर बनाने और यात्रियों का समय और पैसा बचाने पर ध्यान देना चाहिए।
