भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया है, जिसे आर्थिक गलियारों में “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा जा रहा है और यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक व्यापार अस्थिरता और टैरिफ बाधाओं से जूझ रहा है। इस डील के जरिए भारत के निर्यात में 6. 4 लाख करोड़ रुपये की भारी वृद्धि होने का अनुमान। है, जो देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए खुले द्वार
इस समझौते की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह केवल बड़े कॉरपोरेट्स तक सीमित नहीं है। भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), मैन्युफैक्चरर्स, किसानों और पेशेवरों के लिए यूरोपीय संघ के 27 देशों का विशाल बाजार अब पूरी तरह खुल जाएगा। समझौते के तहत 9,425 टैरिफ लाइनों को समाप्त करने का प्रस्ताव है, जिससे कपड़ा, चमड़ा, रत्न-आभूषण, और समुद्री उत्पादों जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा।
महाराष्ट्र: मैन्युफैक्चरिंग का नया हब
महाराष्ट्र में यूरोपीय बाजारों की मांग के कारण मैन्युफैक्चरिंग और एमएसएमई सेक्टर में ऑर्डर्स की बाढ़ आने वाली है। वस्त्रों पर 12% और इलेक्ट्रॉनिक्स पर 14% लगने वाला टैरिफ अब शून्य हो जाएगा और इससे इचलकरंजी के कपड़ा बुनकरों और पुणे के इंजीनियरिंग क्लस्टर्स को ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बनने का मौका मिलेगा। मुंबई और ठाणे से दवा और आभूषण निर्यात को भी बड़ी मजबूती मिलेगी।
गुजरात: कैमिकल्स और डायमंड में उछाल
गुजरात के औद्योगिक बेल्ट को इस डील से जबरदस्त फायदा होगा। विशेष रूप से भरूच और वडोदरा के कैमिकल सेक्टर के लिए टैरिफ 12. 8% से घटकर शून्य हो गया है और सूरत के हीरा और कपड़ा उद्योग को यूरोप में नई पहचान मिलेगी। राजकोट के इंजीनियरिंग सामान और वेरावल के समुद्री उत्पादों के निर्यात में वृद्धि से तटीय अर्थव्यवस्था को नई जान मिलेगी।
तमिलनाडु: टेक्सटाइल और लेदर की लॉटरी
तमिलनाडु के तिरुप्पुर, वेल्लोर और अंबूर जैसे शहर इस डील के सबसे बड़े लाभार्थी होंगे और तिरुप्पुर के कपड़ों पर अब कोई शुल्क नहीं लगेगा, जिससे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारतीय कपड़े सस्ते और बेहतर होंगे। वेल्लोर के चमड़ा उद्योग को 17% शुल्क से मुक्ति मिलेगी, जिससे हजारों नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
उत्तर प्रदेश: शिल्प और चमड़ा उद्योग को पंख
उत्तर प्रदेश के लिए यह समझौता किसी वरदान से कम नहीं है। कानपुर और आगरा के चमड़ा उद्योग को यूरोपीय बाजारों में सीधी और सस्ती पहुंच मिलेगी। सहारनपुर के लकड़ी के हस्तशिल्प और नोएडा के इलेक्ट्रॉनिक्स हब को बड़े ऑर्डर्स मिलने की संभावना है। पश्चिमी यूपी के कृषि उत्पादों के लिए भी यूरोप एक बड़ा बाजार बनकर उभरेगा।
पश्चिम बंगाल और असम: चाय और समुद्री उत्पाद
पश्चिम बंगाल की दार्जिलिंग चाय और असम की प्रीमियम चाय को अब यूरोपीय बाजारों में तरजीही पहुंच मिलेगी। दीघा और हल्दिया से समुद्री खाद्य पदार्थों पर लगने वाला 26% तक का शुल्क हटने से मछुआरों की आय में वृद्धि होगी। असम के बांस आधारित हस्तशिल्प को भी अंतरराष्ट्रीय मंच मिलेगा।
दक्षिण भारत के अन्य राज्यों का प्रदर्शन
कर्नाटक के बेंगलुरु-तुमकुरु बेल्ट से फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में तेजी आएगी। केरल के मसालों और समुद्री उत्पादों को कोच्चि बंदरगाह के जरिए यूरोप तक पहुंचाना आसान होगा। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के फार्मास्यूटिकल्स और आईटी-सक्षम सेवाओं को भी इस मुक्त व्यापार क्षेत्र का भरपूर लाभ मिलेगा।
पंजाब और राजस्थान: एमएसएमई की ताकत
पंजाब के लुधियाना और जालंधर के खेल उपकरण और कपड़ा उद्योग को नई ऊर्जा मिलेगी और राजस्थान के जयपुर और जोधपुर से हस्तशिल्प, आभूषण और लकड़ी के फर्नीचर का निर्यात बढ़ेगा। इन राज्यों के छोटे कारीगरों को अब बिचौलियों के बिना अंतरराष्ट्रीय खरीदार मिल सकेंगे।
