दुनिया के बदलते हालात, समुद्री रास्तों पर बढ़ते खतरे और मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इंडिया-मिडिल ईस्ट यूरोपियन इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) भारत के लिए एक बड़े रणनीतिक विकल्प के रूप में उभर रहा है और अब इसे सिर्फ एक व्यापारिक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के सुरक्षा कवच के तौर पर देखा जा रहा है। नई दिल्ली स्थित International Centre for Peace Studies की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा भू-राजनीतिक अस्थिरता भारत के लिए एक अवसर है, जिससे वह इस कॉरिडोर को तेजी से लागू कर सकता है। IMEC एक मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी कॉरिडोर है, जो समुद्री और रेल मार्गों को जोड़कर भारत, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच तेज और सुरक्षित संपर्क स्थापित करेगा।
IMEC कॉरिडोर की संरचना और मुख्य हिस्से
इस कॉरिडोर के दो मुख्य हिस्से निर्धारित किए गए हैं। पहला पूर्वी कॉरिडोर है, जो भारत से समुद्र के रास्ते संयुक्त अरब अमीरात (UAE) तक जाएगा। दूसरा पश्चिमी कॉरिडोर है, जो यूएई से रेल नेटवर्क के जरिए सऊदी अरब, जॉर्डन और इजराइल होते हुए यूरोप तक पहुंचेगा। इस तरह यह कॉरिडोर समुद्र और रेल का एक आधुनिक हाइब्रिड नेटवर्क होगा।
समुद्री रास्तों पर बढ़ता खतरा और आर्थिक प्रभाव
रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के अहम समुद्री रास्ते अब सुरक्षित नहीं रहे हैं। खासकर होर्मुज और बाब-अल-मंदेब बड़े जियोपॉलिटिकल फ्लैशपॉइंट बन चुके हैं।
हूती और ईरान की गतिविधियों से उत्पन्न खतरों के कारण जहाजों को अफ्रीका का लंबा रास्ता लेना पड़ता है, जिससे लागत और समय दोनों बढ़ जाते हैं। Strait of Hormuz और Bab el-Mandeb जैसे चोकपॉइंट पर खतरा भारत की अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित कर सकता है, ऐसी स्थिति में IMEC एक मजबूत विकल्प प्रदान करता है।
चीन के BRI को जवाब और रणनीतिक बढ़त
IMEC को चीन की Belt and Road Initiative (BRI) के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। इससे भारत को वैश्विक व्यापार में अपनी अलग पहचान बनाने का मौका मिलेगा। हाल के समुद्री तनाव के दौरान भारत ने संतुलित नीति अपनाई है, जिसमें भारत ने व्यापार मार्गों को बदला है, अतिरिक्त लागत झेली है और भारतीय नौसेना की मौजूदगी बढ़ाई है। भारत ने Operation Prosperity Guardian में शामिल हुए बिना ही अपने हितों की रक्षा की है।
ऊर्जा सुरक्षा और भविष्य की संभावनाएं
IMEC के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और मध्य पूर्व से तेल व गैस की सप्लाई के नए रास्ते बनेंगे। भविष्य में इसमें ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा कॉरिडोर की भी संभावना है और इसके अलावा, यह डिजिटल नेटवर्क को भी मजबूत करेगा, जिसमें डेटा केबल और सप्लाई चेन शामिल हैं। यह कॉरिडोर भारत-यूरोप व्यापार का नया ढांचा बन सकता है, जिससे लॉजिस्टिक लागत कम होगी और भारतीय निर्यात को बड़ा फायदा मिलेगा। IMEC एक ऐसा सुपर कनेक्टिविटी नेटवर्क है, जहां जहाज और ट्रेन मिलकर भारत से यूरोप तक सामान, ऊर्जा और डेटा को तेज, सुरक्षित और सस्ते तरीके से पहुंचाएंगे।
