मॉस्को ने आधिकारिक तौर पर उन रिपोर्टों और दावों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि भारत रूस से कच्चे तेल का आयात बंद करने के लिए सहमत हो गया है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने बुधवार को स्पष्ट किया कि क्रेमलिन को नई दिल्ली के ऊर्जा खरीद पैटर्न में किसी भी बदलाव का कोई संकेत नहीं मिला है। यह बयान वाशिंगटन में हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और भारत-अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते के बाद आया है। जखारोवा ने इस व्यापार को वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए आपसी लाभ वाला और स्थिरता प्रदान करने वाला करार दिया है।
रूसी विदेश मंत्रालय का आधिकारिक रुख
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने अपनी साप्ताहिक ब्रीफिंग के दौरान कहा कि मॉस्को के पास यह मानने का कोई कारण नहीं है कि भारत ने रूसी हाइड्रोकार्बन खरीदने को लेकर अपना रुख बदला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद से दोनों देशों को आर्थिक लाभ होता है और यह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। जखारोवा के अनुसार, यह द्विपक्षीय व्यापारिक संबंध किसी तीसरे पक्ष के दबाव में नहीं बल्कि राष्ट्रीय हितों और आर्थिक व्यवहार्यता के आधार पर संचालित हो रहे हैं।
अमेरिका के दावों और टैरिफ कटौती का संदर्भ
यह कूटनीतिक विवाद तब शुरू हुआ जब वाशिंगटन की ओर से यह दावा किया गया कि भारत रूसी कच्चे तेल का आयात बंद करने पर सहमत हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाल ही में संकेत दिया था कि भारत ने रूसी तेल की खरीद रोकने का वादा किया है। यह घटनाक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई टेलीफोनिक बातचीत के बाद सामने आया। इस बातचीत के बाद दोनों देशों ने भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करने की घोषणा की थी। इस कटौती में वह 25% ड्यूटी भी शामिल थी जो राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले साल रूसी तेल खरीदने के आधार पर भारत पर लगाई थी।
भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और चुप्पी
अमेरिकी दावों के बावजूद, भारत सरकार ने अभी तक आधिकारिक तौर पर यह पुष्टि नहीं की है कि वह रूस से तेल खरीदना कब बंद करेगा या क्या ऐसा कोई निर्णय लिया गया है। नई दिल्ली ने लगातार यह रुख अपनाया है कि उसकी ऊर्जा खरीद के फैसले पूरी तरह से राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा द्वारा निर्देशित होते हैं। भारतीय अधिकारियों ने पहले भी स्पष्ट किया है कि देश की प्राथमिकता अपने नागरिकों के लिए सस्ती और निरंतर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना है। ट्रंप के दावों पर भारत की ओर से कोई सीधी प्रतिक्रिया न आना उसकी रणनीतिक स्वायत्तता को दर्शाता है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर प्रभाव और स्थिरता
रूस ने तर्क दिया है कि भारत को तेल की आपूर्ति न केवल द्विपक्षीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर कीमतों को नियंत्रित रखने में भी भूमिका निभाती है। मारिया जखारोवा ने कहा कि रूसी हाइड्रोकार्बन का भारतीय बाजार में प्रवाह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है। मॉस्को का मानना है कि यदि इस आपूर्ति श्रृंखला में कोई कृत्रिम बाधा उत्पन्न की जाती है, तो इससे वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में अस्थिरता आ सकती है, जिसका असर कई विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा।
वाशिंगटन की दबाव की राजनीति पर मॉस्को का प्रहार
रूसी प्रवक्ता ने अमेरिकी प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा कि डोनाल्ड ट्रंप और मार्को रुबियो के दावों में कुछ भी नया नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि वाशिंगटन टैरिफ, प्रतिबंधों और सीधे अवरोधों जैसे दबावपूर्ण तरीकों का इस्तेमाल करके स्वतंत्र देशों के संप्रभु अधिकारों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। जखारोवा ने यह भी कहा कि अमेरिका उन देशों को निशाना बना रहा है जो अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करते हैं। इसके अलावा, उन्होंने यूक्रेन के यूरोपीय सहयोगियों की भी आलोचना की और उन पर शांतिपूर्ण समाधान के बजाय संघर्ष को लंबा खींचने का आरोप लगाया।
