अमेरिका-ईरान डील के बाद भी शेयर बाजार सुस्त, फेड रिजर्व के संकेतों ने बढ़ाई चिंता

फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के कारण गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सुस्त रही। अमेरिका और ईरान के बीच समझौते से कच्चा तेल सस्ता हुआ है, लेकिन आईटी सेक्टर में बिकवाली और वैश्विक दबाव ने बाजार की रफ्तार रोक दी है। मिडकैप शेयरों और नए आईपीओ में हलचल जारी है।

गुरुवार, 18 जून की सुबह भारतीय शेयर बाजार के लिए मिली-जुली और कुछ हद तक सुस्त शुरुआत लेकर आई। दलाल स्ट्रीट पर निवेशकों के बीच एक तरफ उत्साह था तो दूसरी तरफ वैश्विक चिंताओं का दबाव भी साफ नजर आ रहा था। अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक महत्वपूर्ण अंतरिम समझौते ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ला दी है, जो भारत जैसी तेल आयातक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी राहत की खबर है और हालांकि, इस सकारात्मक खबर के प्रभाव को अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने काफी हद तक कम कर दिया। फेडरल रिजर्व द्वारा भविष्य में ब्याज दरों को लेकर दिए गए संकेतों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है, जिसके कारण सेंसेक्स और निफ्टी में वह तेजी नहीं देखी गई जिसकी उम्मीद की जा रही थी। सुबह के कारोबार में निफ्टी 4 अंक की मामूली बढ़त के साथ 24090 पर था, जबकि सेंसेक्स 19 अंक गिरकर 77136 के स्तर पर आ गया।

फेडरल रिजर्व का सख्त रुख और बाजार पर असर

शेयर बाजार की सुस्ती के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व का हॉकिश या सख्त रुख है। हालांकि फेड ने वर्तमान में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन उनके डॉट प्लॉट अनुमानों ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। इन अनुमानों के अनुसार, साल 2026 में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। इस खबर ने वैश्विक इक्विटी बाजारों के मूड को प्रभावित किया है। भारतीय बाजार में इसका सबसे ज्यादा असर आईटी सेक्टर पर देखने को मिल रहा है, जहां सुबह से ही भारी बिकवाली का दौर जारी है और आईटी कंपनियां अपनी आय के लिए बड़े पैमाने पर अमेरिकी बाजार पर निर्भर रहती हैं, इसलिए वहां की मौद्रिक नीति में किसी भी सख्ती का सीधा असर इन शेयरों पर पड़ता है। कल के कारोबार में सेंसेक्स 347 अंक बढ़कर 77156 और निफ्टी 97 अंक बढ़कर 24086 पर बंद हुआ था, लेकिन आज वह गति बरकरार नहीं रह सकी।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी का रुझान

भले ही बड़े इंडेक्स दबाव में दिख रहे हों, लेकिन ब्रॉडर मार्केट यानी छोटे और मझोले शेयरों में अभी भी रौनक बनी हुई है। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0 दशमलव 17 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0 दशमलव 24 प्रतिशत की मजबूती के साथ कारोबार कर रहे हैं। इसका मतलब है कि निवेशक चुनिंदा शेयरों में खरीदारी के मौके देख रहे हैं और आईटी सेक्टर को छोड़कर, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी मेटल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे सेक्टर बाजार को सहारा देने की कोशिश कर रहे हैं। वैश्विक बाजारों की बात करें तो जापान का निक्केई 988 अंक और ताइवान का बाजार 498 अंक ऊपर है, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग 465 अंक और कोरिया का कोस्पी 1 प्रतिशत से ज्यादा नीचे गिर गया है।

कच्चा तेल सस्ता और रुपये की स्थिति

आज की सबसे बड़ी खबर कच्चे तेल के मोर्चे से आई है। अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौता हुआ है, जिसके तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का व्यापारिक रास्ता खुलेगा और ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी जाएगी। इस खबर के बाद ब्रेंट क्रूड 1 दशमलव 48 प्रतिशत गिरकर 78 डॉलर 37 सेंट प्रति बैरल पर आ गया है। तेल का 80 डॉलर से नीचे आना भारत के लिए बहुत अच्छा है क्योंकि इससे देश का आयात खर्च कम होता है। हालांकि, मुद्रा बाजार में रुपया थोड़ा कमजोर हुआ है। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 16 पैसे टूटकर 94 रुपये 69 पैसे के स्तर पर खुला है, जो पिछले सत्र में 94 रुपये 53 पैसे पर बंद हुआ था।

प्राइमरी मार्केट में निवेश के नए अवसर

निवेशकों के लिए आज प्राइमरी मार्केट में भी काफी हलचल है। रियासत लाइफस्टाइल और एविएंस बायोमेडिकल्स के आईपीओ आज से खुल गए हैं। रियासत लाइफस्टाइल का इश्यू साइज 30 करोड़ 77 लाख रुपये है और एविएंस बायोमेडिकल्स का 30 करोड़ 24 लाख रुपये है। ये दोनों ही फ्रेश इक्विटी शेयर आधारित इश्यू हैं। इसके अलावा एसएमई सेगमेंट में लीपफ्रॉग इंजीनियरिंग, लियोटेक इंडस्ट्रीज, दीक्षा पॉलिमर्स और क्ले क्राफ्ट के आईपीओ में निवेश का आज दूसरा दिन है। दीक्षा पॉलिमर्स का इश्यू 17 करोड़ 90 लाख रुपये का है, जबकि क्ले क्राफ्ट का इश्यू 54 लाख रुपये का है। ये आईपीओ उन निवेशकों के लिए अच्छे विकल्प हो सकते हैं जो नए लिस्ट होने वाले शेयरों में पैसा लगाना चाहते हैं।