टी20 वर्ल्ड कप 2026: सुपर-8 से पहले ऑफ-स्पिन के खिलाफ फंसी टीम इंडिया

आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज में अजेय रहने के बावजूद भारतीय टीम के लिए ऑफ-स्पिन गेंदबाजी चिंता का विषय बनी हुई है। मिडिल ओवर्स में गिरती रन गति और स्पिनर्स के खिलाफ संघर्ष ने सुपर-8 मुकाबलों से पहले टीम प्रबंधन की चुनौती बढ़ा दी है।

आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय क्रिकेट टीम ने ग्रुप स्टेज के दौरान अपने सभी चार मुकाबलों में जीत दर्ज कर सुपर-8 में जगह बना ली है। सूर्यकुमार यादव के नेतृत्व में टीम ने पाकिस्तान जैसी बड़ी टीमों को हराकर 4-0 का रिकॉर्ड बनाया है। हालांकि, इस शानदार प्रदर्शन के बीच भारतीय बल्लेबाजी क्रम की एक बड़ी कमजोरी उभरकर सामने आई है। टीम के बल्लेबाज बीच के ओवरों में ऑफ-स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ रन बनाने के लिए संघर्ष करते नजर आए हैं। यह समस्या विशेष रूप से 7 से 14 ओवर के बीच देखी गई है, जहां रन गति में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।

ग्रुप स्टेज के मैचों में बल्लेबाजी का प्रदर्शन

ग्रुप स्टेज के दौरान भारतीय टीम के प्रदर्शन में निरंतरता की कमी देखी गई। संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के खिलाफ पहले मैच में भारत का पावरप्ले काफी खराब रहा, जहां टीम ने महज 46 रन पर अपने 4 महत्वपूर्ण विकेट खो दिए थे। नामीबिया के खिलाफ भी स्थिति बहुत बेहतर नहीं रही और मिडिल ओवर्स में रन गति काफी धीमी हो गई। हालांकि सूर्यकुमार यादव और तिलक वर्मा की साझेदारी ने टीम को संभाला, लेकिन पारी वह रफ्तार नहीं पकड़ सकी जिसकी उम्मीद की जा रही थी। पाकिस्तान के खिलाफ ईशान किशन ने 77 रन की तेज पारी खेली, लेकिन उनके आउट होने के बाद 7वें से 14वें ओवर के बीच भारतीय टीम दबाव में दिखी। नीदरलैंड्स के खिलाफ भी इसी तरह का पैटर्न देखा गया, जहां मध्यक्रम ने 62 रन के भीतर 3 विकेट गंवा दिए।

स्पिनर्स के खिलाफ तकनीकी चुनौतियां

विपक्षी टीमों ने भारतीय बल्लेबाजों की स्पिन के खिलाफ कमजोरी को भांपते हुए सटीक रणनीति अपनाई है। अमेरिका के स्पिनर मोहम्मद मोहसिन और हरमीत सिंह ने भारतीय मध्यक्रम को काफी परेशान किया। वहीं, नामीबिया के कप्तान गेरहार्ड इरासमस की ऑफ-स्पिन के सामने भी भारतीय बल्लेबाज खुलकर नहीं खेल सके। पाकिस्तान के खिलाफ मैच में सैम अयूब ने भी अपनी गेंदबाजी से भारतीय बल्लेबाजों की रन गति पर अंकुश लगाया। आंकड़ों के अनुसार, ऑफ-स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ भारत का स्ट्राइक-रेट इस टूर्नामेंट में उम्मीद से कम रहा है। सूर्यकुमार यादव और तिलक वर्मा के दाएं-बाएं हाथ के संयोजन के बावजूद स्पिनर्स के खिलाफ बड़े शॉट खेलने में कठिनाई हुई है।

कोचिंग स्टाफ और विपक्षी टीमों का दृष्टिकोण

भारतीय टीम के सहायक कोच रयान टेन डोशेट ने स्वीकार किया है कि इस वर्ल्ड कप में मिडिल फेज में बल्लेबाजी करना चुनौतीपूर्ण रहा है और उनके अनुसार, फिंगर-स्पिनर्स इस टूर्नामेंट में काफी असरदार साबित हो रहे हैं और पिच से उन्हें मिल रही मदद बल्लेबाजों के लिए मुश्किलें पैदा कर रही है। दूसरी ओर, नीदरलैंड्स के गेंदबाज बास डे लीडे ने बताया कि उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ भारत के मैच का विश्लेषण किया था। उन्होंने कहा कि गेंद की रफ्तार कम रखना और स्पिन पर ध्यान केंद्रित करना उनकी रणनीति का हिस्सा था, जिसमें वे काफी हद तक सफल रहे। विपक्षी टीमों की यह योजना स्पष्ट है कि पावरप्ले के बाद गति को कम कर टीम इंडिया पर दबाव बनाया जाए।

सुपर-8 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बड़ी परीक्षा

भारतीय टीम अब सुपर-8 चरण में प्रवेश कर चुकी है, जहां उसका मुकाबला दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे जैसी टीमों से होगा। भारत का पहला बड़ा मुकाबला 22 फरवरी को अहमदाबाद में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ निर्धारित है। दक्षिण अफ्रीका के पास गुणवत्तापूर्ण स्पिन आक्रमण है, जो भारतीय बल्लेबाजों के लिए कड़ी चुनौती पेश कर सकता है। ग्रुप स्टेज में उजागर हुई कमियां सुपर-8 के उच्च-दबाव वाले मैचों में निर्णायक साबित हो सकती हैं। टीम प्रबंधन के लिए अब सबसे बड़ी प्राथमिकता मिडिल ओवर्स में स्ट्राइक रोटेट करने और स्पिनर्स के खिलाफ बाउंड्री खोजने की रणनीति तैयार करना है।

अहमदाबाद की परिस्थितियों में सामंजस्य

अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम की पिच अक्सर स्पिनरों को सहायता प्रदान करती है, जो भारत की मौजूदा समस्या को और जटिल बना सकती है। सुपर-8 के मैचों में पिच की प्रकृति को देखते हुए ऑफ-स्पिनर्स की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। टीम इंडिया को न केवल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बल्कि वेस्टइंडीज के मिस्ट्री स्पिनर्स के खिलाफ भी अपनी बल्लेबाजी तकनीक में सुधार करना होगा। सहायक कोच के अनुसार, टीम नेट सत्र के दौरान स्पिन के खिलाफ स्वीप और रिवर्स स्वीप जैसे शॉट्स पर काम कर रही है ताकि विपक्षी गेंदबाजों की लय को बिगाड़ा जा सके।

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