भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक व्यापारिक मील का पत्थर स्थापित करते हुए एक अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे (फ्रेमवर्क) पर सहमति व्यक्त की है। इस समझौते का प्राथमिक उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम करना, सीमा शुल्क (टैरिफ) में कटौती करना और आर्थिक सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाना है और यह विकास ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में सप्लाई चेन के विविधीकरण और लचीलेपन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस फ्रेमवर्क के विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट करते हुए इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार का नया ढांचा
यह अंतरिम व्यापार समझौता फरवरी 2025 में शुरू होने वाले व्यापक भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) की दिशा में एक प्रारंभिक लेकिन ठोस कदम है। आधिकारिक बयानों के अनुसार, यह फ्रेमवर्क पारस्परिक और संतुलित व्यापार सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया गया है। दोनों देशों ने वैश्विक सप्लाई चेन को पुनर्गठित करने और एक-दूसरे की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्धता जताई है। इस समझौते को व्यापारिक हलकों में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजार के बीच एक रणनीतिक गठबंधन को दर्शाता है।
भारतीय बाजार में अमेरिकी उत्पादों के लिए रियायतें
इस समझौते के तहत भारत ने कई महत्वपूर्ण रियायतें देने पर सहमति व्यक्त की है। भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं पर टैरिफ को या तो पूरी तरह समाप्त कर देगा या उनमें महत्वपूर्ण कटौती करेगा और कृषि क्षेत्र में, भारत ने सूखे अनाज (डीडीजी), पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, फल, सोयाबीन तेल, और विभिन्न प्रकार की शराब एवं स्पिरिट सहित अमेरिकी उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर आयात शुल्क कम करने का निर्णय लिया है। इसके अतिरिक्त, भारत कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में तरजीही बाजार पहुंच प्रदान करने के लिए भी सहमत हुआ है, जिससे अमेरिकी निर्यातकों के लिए भारतीय बाजार में प्रवेश करना सुगम हो जाएगा।
भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी शुल्क और बाजार पहुंच
अमेरिका ने भी भारतीय उत्पादों के लिए अपने बाजार को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं। प्रारंभिक चरण में, अमेरिका वस्त्र, परिधान, चमड़ा, जूते, प्लास्टिक, रबर, जैविक रसायन और हस्तशिल्प जैसे अधिकांश भारतीय उत्पादों पर 18% का पारस्परिक शुल्क (रेसिप्रोकल टैरिफ) लागू करेगा। हालांकि, अंतरिम समझौते के सफल कार्यान्वयन के बाद, अमेरिका ने जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स, रत्न, हीरे और विमान के पुर्जों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर इन शुल्कों को हटाने की योजना बनाई है। यह कदम भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने का एक बड़ा अवसर प्रदान कर सकता है।
धारा 232 और गैर-टैरिफ बाधाओं का समाधान
इस फ्रेमवर्क की एक प्रमुख विशेषता अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा नियमों (धारा 232) से जुड़े शुल्कों का समाधान है। समझौते के अनुसार, भारतीय स्टील, एल्युमीनियम और तांबे से संबंधित विमान पुर्जों पर लगाए गए कुछ विशिष्ट शुल्क हटा दिए जाएंगे। इसके अलावा, भारत को ऑटो पार्ट्स के निर्यात के लिए तरजीही शुल्क दर कोटा प्राप्त होगा। दोनों देशों ने गैर-टैरिफ बाधाओं, जैसे कि चिकित्सा उपकरण और सूचना प्रौद्योगिकी उत्पादों से संबंधित मानकों और परीक्षण नियमों की समीक्षा करने पर भी सहमति जताई है। अगले छह महीनों के भीतर, दोनों पक्ष व्यापार को सरल बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों और अनुरूपता मूल्यांकन प्रक्रियाओं पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
$500 बिलियन की खरीद प्रतिबद्धता और भविष्य का विश्लेषण
भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर (लगभग $500 billion) मूल्य के सामान खरीदने की एक महत्वाकांक्षी प्रतिबद्धता जताई है। इस खरीद में मुख्य रूप से ऊर्जा उत्पाद, विमान, कीमती धातुएं, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला शामिल होंगे। विश्लेषकों के अनुसार, यह प्रतिबद्धता न केवल व्यापार घाटे को संतुलित करेगी बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को भी गहरा करेगी। समझौते में डिजिटल व्यापार प्रथाओं को सुव्यवस्थित करने और भविष्य के बीटीए के तहत डिजिटल व्यापार नियम स्थापित करने का भी संकल्प लिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फ्रेमवर्क चीन जैसे देशों की गैर-बाजार नीतियों का मुकाबला करने और एक सुरक्षित वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बनाने में सहायक सिद्ध होगा।
Under the decisive leadership of PM @NarendraModi ji, India has reached a framework for an Interim Agreement with the US. This will open a $30 trillion market for Indian exporters, especially MSMEs, farmers and fishermen. The increase in exports will create lakhs of new job… pic.twitter.com/xYSjxML6kt
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) February 7, 2026
