प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते के लिए रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनने का स्वागत किया है। नई दिल्ली में जारी एक आधिकारिक बयान और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया में प्रधानमंत्री ने इसे दोनों देशों के बीच साझेदारी में बढ़ते विश्वास और गतिशीलता का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बताया। उन्होंने इस समझौते की दिशा में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता के लिए उनका विशेष रूप से आभार व्यक्त किया और यह घटनाक्रम दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
मेक इन इंडिया और घरेलू क्षेत्रों पर प्रभाव
प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार यह नया व्यापार ढांचा भारत के 'मेक इन इंडिया' अभियान को व्यापक रूप से सशक्त बनाने की क्षमता रखता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समझौते से भारत के मेहनती किसानों, उद्यमियों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), स्टार्टअप संस्थापकों और मछुआरों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में नए द्वार खुलेंगे। विश्लेषकों के अनुसार व्यापारिक बाधाओं में कमी आने से भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। विशेष रूप से कृषि और लघु उद्योगों के लिए यह समझौता निर्यात के नए अवसर प्रदान कर सकता है जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों अर्थव्यवस्थाओं को लाभ होने की संभावना है।
रोजगार सृजन और तकनीकी नवाचार
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत-अमेरिका व्यापार फ्रेमवर्क का सीधा लाभ देश की युवा शक्ति और महिलाओं को मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस समझौते के माध्यम से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे जो भारत की जनसांख्यिकीय क्षमता का उपयोग करने में सहायक होंगे। इसके अतिरिक्त यह फ्रेमवर्क नवाचार को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे भारत और अमेरिका के बीच निवेश और तकनीकी साझेदारी और अधिक गहरी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च-तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से भारत में अनुसंधान और विकास (R&D) के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी।
मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक विकास
वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में इस समझौते की महत्ता को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह फ्रेमवर्क मजबूत और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply Chains) के निर्माण में योगदान देगा। वर्तमान वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत और अमेरिका के बीच यह समन्वय न केवल द्विपक्षीय व्यापार को संतुलित करेगा बल्कि वैश्विक आर्थिक विकास में भी अपनी भूमिका निभाएगा और प्रधानमंत्री ने 'विकसित भारत' के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ऐसी वैश्विक साझेदारियां बनाने के लिए प्रतिबद्ध है जो भविष्य-उन्मुख हों और साझा समृद्धि सुनिश्चित करें।
विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण और समझौते के विवरण
आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार इस अंतरिम समझौते के तहत अमेरिका द्वारा भारत पर टैरिफ घटाकर 18% करने का निर्णय एक महत्वपूर्ण व्यापारिक रियायत है। यह समझौता 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई व्यापक द्विपक्षीय व्यापार वार्ता का परिणाम है। आधिकारिक बयान के अनुसार यह फ्रेमवर्क अतिरिक्त बाजार पहुंच संबंधी प्रतिबद्धताओं को शामिल करता है और पारस्परिक हितों पर आधारित है। विश्लेषकों का मानना है कि यह संतुलित व्यापार की दिशा में एक ठोस कदम है जो दोनों देशों के बीच व्यापार घाटे को कम करने और आर्थिक सहयोग को संस्थागत रूप देने में मदद करेगा।
भारत और अमेरिका के बीच यह अंतरिम व्यापार समझौता रणनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर एक मील का पत्थर माना जा रहा है और प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया यह स्पष्ट करती है कि भारत इस साझेदारी को केवल एक व्यापारिक लेनदेन के रूप में नहीं बल्कि एक दीर्घकालिक रणनीतिक गठबंधन के रूप में देख रहा है। आने वाले समय में इस फ्रेमवर्क के कार्यान्वयन से द्विपक्षीय व्यापार के आंकड़ों में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है जो अंततः दोनों देशों के नागरिकों के आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त करेगा।
