गणित में भारतीय सभ्यता का योगदान: जयशंकर ने UN में किया प्रदर्शनी का उद्घाटन

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 'शून्य से अनंत तक' प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। यह प्रदर्शनी गणित के क्षेत्र में भारतीय सभ्यता के ऐतिहासिक योगदान और आधुनिक डिजिटल ढांचे व एआई में इसकी प्रासंगिकता को दर्शाती है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गणित के क्षेत्र में भारतीय सभ्यता के अतुलनीय योगदान पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) मुख्यालय में आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि दुनिया भर में वैज्ञानिक प्रगति को लंबे समय से एक ‘संकीर्ण नजरिए’ से देखा गया है। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि उन ऐतिहासिक विकृतियों को ‘सुधारने’ की तत्काल आवश्यकता है, जिन्होंने भारतीय योगदान को वैश्विक पटल पर सीमित कर दिया था। यह प्रदर्शनी संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन द्वारा आयोजित की गई है, जिसका शीर्षक 'शून्य से अनंत तक – गणित में भारतीय सभ्यता का योगदान' रखा गया है। इस महत्वपूर्ण पहल को भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) और इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी) के सक्रिय सहयोग से धरातल पर उतारा गया है।

ऐतिहासिक विकृतियों को सुधारने का आह्वान

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में अपनी तरह की इस पहली और अनूठी प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए विदेश मंत्री ने वैश्विक समुदाय को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जब भी हम संयुक्त राष्ट्र जैसे मंच पर एकत्रित होते हैं, तो अक्सर साझा विरासत की चर्चा की जाती है। हालांकि, यदि हम आधुनिक इतिहास के सफर का गहराई से विश्लेषण करें, तो यह स्पष्ट होता है कि दुनिया भर में वैज्ञानिक प्रगति को वक्त और भूगोल की सीमाओं में बांधकर एक अत्यंत संकीर्ण नजरिए से देखा गया है। जयशंकर के अनुसार, अब समय आ गया है कि इन सीमाओं को तोड़ा जाए और भारत जैसे देशों के प्राचीन ज्ञान को उसका उचित स्थान दिया जाए। जैसे-जैसे भू-राजनीतिक बदलावों से राजनीतिक और आर्थिक पुनर्संतुलन हो रहा है, यह अनिवार्य रूप से सांस्कृतिक पुनर्संतुलन का मार्ग भी प्रशस्त कर रहा है।

प्रमुख राजनयिकों और विद्वानों की उपस्थिति

इस भव्य उद्घाटन समारोह में अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इनमें अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा, न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूत बिनय प्रधान और प्रिंसटन विश्वविद्यालय में गणित के प्रतिष्ठित प्रोफेसर व फील्ड्स मेडल विजेता मंजुल भार्गव विशेष रूप से शामिल थे। इनके अलावा, कई अन्य देशों के राजदूतों और वरिष्ठ राजनयिकों ने भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया, जो इस प्रदर्शनी के वैश्विक महत्व को दर्शाता है। विदेश मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि यह विविध विमर्शों के लिए जगह बनाकर किया जाएगा, जिसमें हमारे अतीत की अधिक व्यापक समझ शामिल है। जयशंकर दो से 10 मई तक जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद एवं टोबैगो की आधिकारिक यात्रा पर थे, जिसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क में इस प्रदर्शनी का शुभारंभ किया।

प्राचीन ज्ञान और आधुनिक तकनीक का संगम

यह प्रदर्शनी ‘समहिता’ (दक्षिण एशियाई पांडुलिपि इतिहास और पाठ्य संग्रह) परियोजना का एक अभिन्न हिस्सा है। यह विशेष संवादात्मक प्रदर्शनी उन प्राचीन गणितीय अवधारणाओं पर प्रकाश डालती है, जिनकी जड़ें भारत की मिट्टी में हैं और जो आगे चलकर हजारों वर्षों में पूरी दुनिया में फैलीं और इसमें शून्य की खोज, दशमलव स्थान मान प्रणाली (डेसिमल प्लेस वैल्यू सिस्टम), बीजगणित और एल्गोरिदम से लेकर ग्रहों के मॉडल और खगोलीय गणनाओं तक को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, क्रमचय-संचय (कॉम्बिनेटरिक्स), द्विआधारी गणना (बाइनरी एन्यूमरेशन) और रेखागणित का ‘बौधायन-पायथागोरस प्रमेय’ भी इस प्रदर्शनी के मुख्य आकर्षण हैं।

महान गणितज्ञों की विरासत और भविष्य

प्रदर्शनी में भारत के महान विद्वानों जैसे आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त और भास्कर के योगदान को प्रमुखता से दर्शाया गया है। साथ ही, केरल के खगोल विज्ञान और गणित संप्रदाय के विद्वानों के कार्यों को भी प्रदर्शित किया गया है। जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि यहां उपस्थित लोग केवल दीवार पर लिखे अंकों को नहीं देख रहे हैं, बल्कि उस सभ्यता का अवलोकन कर रहे हैं जिसका जन्म भारत की बौद्धिक मिट्टी में हुआ था और उन्होंने इसे एक ऐसी विरासत बताया जिसका संबंध जितना अतीत से है, उतना ही भविष्य से भी है। उन्होंने दर्शकों को बताया कि यह प्रदर्शनी उन्हें सहस्राब्दियों की एक ऐसी यात्रा पर ले जाएगी, जहां वे देख सकेंगे कि भारतीय खोजों ने किस तरह दुनिया भर का सफर तय किया।

विदेश मंत्री ने अंत में इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान तकनीकी युग का आधार यानी ‘कोड’, सदियों पहले भारत में ही संकल्पित किया गया था। यह प्रदर्शनी 15 मई तक चलेगी और इसका मुख्य उद्देश्य यह प्रदर्शित करना है कि भारतीय उपमहाद्वीप में जन्मे गणितीय विचार आज भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं। ये विचार न केवल वैश्विक डिजिटल ढांचे का आधार हैं, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी आधुनिक तकनीकों की नींव भी इन्हीं प्राचीन सिद्धांतों पर टिकी हुई है। जयशंकर ने अपनी न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान इस प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, जो उनकी जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद एवं टोबैगो की आधिकारिक यात्रा के ठीक बाद संपन्न हुई।