कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोमवार को ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी विद्यालयों की स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से एक व्यापक देशव्यापी अभियान शुरू करने की घोषणा की है। इस पहल के माध्यम से सीजेपी का लक्ष्य देश के गांवों में शैक्षणिक ढांचे की लंबे समय से चली आ रही उपेक्षा को समाप्त करना है। अभिजीत दिपके ने अभिभावकों, नागरिकों और ग्रामीण नेताओं से इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल होने का आह्वान किया है ताकि सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं का कायाकल्प किया जा सके। उन्होंने अभिभावकों से बुनियादी सुविधाओं का सामाजिक ऑडिट करने और सरपंचों से विद्यालयों की स्थिति सुधारने की जिम्मेदारी उठाने की अपील की है।
हिंगोली से अभियान का शंखनाद
सीजेपी अपने इस महत्वपूर्ण अभियान की शुरुआत महाराष्ट्र के हिंगोली स्थित गांव से करने जा रही है। अभिजीत दिपके ने इस पहल के लिए अपने स्वयं के गांव को चुना है ताकि वह एक व्यक्तिगत उदाहरण पेश कर सकें और अभियान के तहत, दिपके व्यक्तिगत रूप से हिंगोली के स्थानीय सरपंच से मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात के दौरान, वह सरपंच से गांव के सरकारी स्कूलों को पूरी तरह से चालू और बेहतर स्थिति में लाने का औपचारिक अनुरोध करेंगे। उनका मानना है कि जब स्थानीय नेतृत्व जिम्मेदारी उठाएगा, तभी वास्तविक बदलाव संभव होगा।
80वां स्वतंत्रता दिवस और स्कूलों की उपेक्षा
एक वीडियो संदेश के माध्यम से अभिजीत दिपके ने इस आंदोलन के समय के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त हमारा 80वां स्वतंत्रता दिवस है। लेकिन उन्होंने इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया कि पिछले 80 सालों में अगर किसी चीज की सबसे अधिक उपेक्षा हुई है या उसे नजरअंदाज किया गया है, तो वह हमारे गांवों के सरकारी स्कूल हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सीजेपी 15 अगस्त से देशव्यापी सोशल ऑडिट शुरू करने जा रही है। दिपके ने जोर देकर कहा कि आजादी के इस पड़ाव पर ग्रामीण शिक्षा की स्थिति को सुधारना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।
संसद बनाम स्कूल: बुनियादी सुविधाओं का अभाव
अपने संबोधन में दिपके ने देश के विकास की प्राथमिकताओं पर तीखे सवाल उठाए और उन्होंने पूछा कि हमने नई संसद और नया प्रधानमंत्री आवास तो बना लिया, लेकिन हम अपने गांवों में नए और आधुनिक स्कूल क्यों नहीं बना पाए? उन्होंने सवाल किया कि क्या हम किसानों और मजदूरों के बच्चों को अपने देश का भविष्य नहीं मानते? दिपके ने बताया कि गांवों के बच्चों को आज भी स्कूल जाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। कई स्थानों पर तो पीने का पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगर हमें इस 15 अगस्त को कोई नई शुरुआत करनी है, तो वह सरकारी विद्यालयों की स्थिति सुधारने से होनी चाहिए।
सरपंच चैलेंज और सम्मान की घोषणा
इस अभियान के तहत सीजेपी ने देशभर के सरपंचों से अपने-अपने गांवों में सरकारी विद्यालयों की स्थिति सुधारने की अपील की है। अभिजीत दिपके ने इसे सरपंच चैलेंज का नाम दिया है। उन्होंने कहा कि वह खुद हिंगोली के सरपंच से संपर्क करेंगे और अन्य गांवों के सरपंचों से भी इस पहल को आगे बढ़ाने का आग्रह किया और संगठन ने घोषणा की है कि वह उन सरपंचों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करेगा जो अपने गांवों के विद्यालयों की स्थिति में सुधार करेंगे। इसके लिए सीजेपी के सोशल मीडिया मंचों पर विद्यालयों की पहले और बाद की तस्वीरें साझा की जाएंगी और संबंधित सरपंचों को इसका पूरा श्रेय दिया जाएगा ताकि अन्य सरपंच भी इससे प्रेरित हों।
नागरिकों की अगुवाई में ऑडिट और जनसंपर्क
सीजेपी ने सरकारी विद्यालयों के लिए नागरिकों की अगुवाई में एक सामाजिक ऑडिट की भी घोषणा की है। यह ऑडिट स्थानीय समुदायों को अपने क्षेत्र के स्कूलों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने और उसे रिपोर्ट करने की शक्ति देगा। इसके साथ ही, संगठन ने देशव्यापी संपर्क अभियान के लिए क्या बोलती पब्लिक? अभियान की भी घोषणा की है। इस अभियान का उद्देश्य जनता से सीधे जुड़ना और ग्रामीण शिक्षा सुधार के मुद्दे पर व्यापक जनसमर्थन जुटाना है। इन प्रयासों के माध्यम से सीजेपी ग्रामीण स्कूलों की उपेक्षा को दूर कर एक बेहतर शैक्षणिक भविष्य की नींव रखना चाहती है।
