आमतौर पर जियो पॉलिटिकल टेंशन कम होने से उभरते बाजारों की मुद्राएं, जैसे कि भारतीय रुपया, मजबूत होती हैं। हालांकि, इस बार बाजार में विपरीत स्थिति देखने को मिल रही है और रुपया कमजोर हुआ है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, डॉलर इंडेक्स का मजबूत होना और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की तरफ से जारी मुनाफावसूली इसके पीछे की मुख्य वजहें मानी जा रही हैं। रुपए की इस कमजोरी से आयात महंगा होने की आशंका है, भले ही कच्चे तेल की कीमतों में मामूली राहत मिली हो।
करेंसी मार्केट में रुपए की मौजूदा स्थिति
32 के स्तर पर आ गया। 32 पर कारोबार करता देखा गया। यह पिछले बंद स्तर के मुकाबले 16 पैसे की गिरावट है। 16 पर बंद हुआ था, जबकि उससे पिछले दो सत्रों में मुद्रा में 47 पैसे की तेजी दर्ज की गई थी। मार्च के महीने में रुपया 95 के स्तर को पार कर गया था, जिसके मुकाबले वर्तमान में यह करीब 2 रुपए की मजबूती के साथ कारोबार कर रहा है।
RBI द्वारा नियमों में बदलाव और सट्टेबाजी पर असर
रुपए में गिरावट का एक बड़ा कारण भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा दी गई ढील को माना जा रहा है। रिजर्व बैंक ने सोमवार को रुपए में अत्यधिक सट्टेबाजी पर रोक लगाने के लिए 1 अप्रैल को जारी किए गए निर्देशों को आंशिक रूप से वापस ले लिया है। बैंकिंग नियामक ने पहले नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड (NDF) बाजारों में नेट ओपन पोजीशन की सीमा 100 मिलियन डॉलर तय की थी और बैंकों को 10 अप्रैल तक इसका पालन करने का निर्देश दिया था। संशोधित निर्देशों के तहत, ऑथराइज्ड डीलर या बैंक अब निवासी या अनिवासी यूजर्स को रुपए से जुड़े नॉन-डिलीवरेबल डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की पेशकश फिर से शुरू कर सकते हैं, हालांकि उन्हें संबंधित-पक्ष लेनदेन (related-party transactions) पर कुछ पाबंदियों का पालन करना अनिवार्य होगा।
डॉलर इंडेक्स और कच्चे तेल की कीमतों का प्रभाव
94 पर पहुंच गया है। 99 डॉलर प्रति बैरल पर देखा गया। विश्लेषकों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं क्योंकि इस बात की चिंता है कि यदि ईरान होर्मुज स्ट्रेट से टैंकरों की आवाजाही रोकता है, तो फारस की खाड़ी से तेल की आपूर्ति बाधित हो सकती है और इसके अलावा, संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम समझौता बुधवार को समाप्त होने वाला है।
शेयर बाजार में तेजी और विदेशी निवेशकों का रुख
करेंसी मार्केट में गिरावट के बावजूद घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक रुख देखा गया। 55 पर रहा। NSDL के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने सोमवार को लगभग 2,066 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जिससे स्थानीय मुद्रा को कुछ सहारा मिला।
