इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता के पास एक बड़ा रेल हादसा हुआ है, जिसने पूरे इलाके में डर और अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया और रात के समय दो ट्रेनों के बीच हुई इस खौफनाक टक्कर में कम से कम 7 लोगों की जान चली गई है और 81 लोग घायल हो गए हैं। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन, सेना और राहत एजेंसियां मौके पर पहुंच गईं और फंसे हुए यात्रियों को निकालने के लिए बड़े पैमाने पर बचाव कार्य शुरू किया गया। मलबे के अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए रेल की बोगियों को काटकर रास्ता बनाया जा रहा है।
हादसे का कारण और आधिकारिक बयान
सरकारी रेलवे कंपनी केएआई (KAI) की प्रवक्ता अन्ना पुरबा ने स्थानीय मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इस हादसे में अब तक सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 81 लोग घायल हुए हैं। उन्होंने बताया कि बचाव दल अभी भी मलबे में फंसे दो जीवित व्यक्तियों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। रेलवे कंपनी के एक अन्य प्रवक्ता फ्रानोटो विबोवो के अनुसार, यह हादसा तब शुरू हुआ जब एक टैक्सी ने रेलवे क्रॉसिंग पर एक ट्रेन को हल्की टक्कर मार दी। इस टक्कर के कारण ट्रेन ट्रैक पर ही रुक गई, जिसके बाद पीछे से आ रही दूसरी लंबी दूरी की ट्रेन ने उसे जोरदार टक्कर मार दी।
प्रत्यक्षदर्शियों की आपबीती और बचाव कार्य
हादसे में बची एक 29 वर्षीय यात्री सौसान सारिफाह ने अस्पताल से अपना दर्दनाक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि वह काम से घर लौट रही थीं और उनकी ट्रेन जकार्ता से लगभग 25 किलोमीटर दूर बेकासी तिमूर स्टेशन पर रुकी थी। सौसान के अनुसार, ट्रेन में दो बार घोषणा हुई और जैसे ही लोग उतरने की तैयारी कर रहे थे, तभी एक जोरदार धमाका हुआ और उन्होंने बताया कि सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि किसी को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला और लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर गए। मौके पर मौजूद बचावकर्मी ऑक्सीजन सिलेंडर की मांग कर रहे थे और घायलों को स्ट्रेचर पर लादकर एंबुलेंस तक पहुंचाया जा रहा था।
इंडोनेशिया में रेल हादसों का इतिहास
इंडोनेशिया में परिवहन बुनियादी ढांचे की खराब स्थिति के कारण ऐसे हादसे पहले भी होते रहे हैं। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि मृतकों की संख्या अभी और बढ़ सकती है। इससे पहले जनवरी 2024 में पश्चिम जावा में हुए एक ट्रेन हादसे में चार कर्मचारियों की मौत हुई थी। वहीं, साल 2015 में जकार्ता में एक कम्यूटर ट्रेन और मिनीबस की टक्कर में 16 लोगों की जान चली गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने पड़ चुके बेड़े और रखरखाव की कमी इन दुर्घटनाओं का मुख्य कारण रही है।
वर्तमान में घटनास्थल पर सैकड़ों लोग जमा हैं और राहत कार्य जारी है और प्रशासन ने घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया है, जहां कई की हालत गंभीर बनी हुई है। बचाव दल अभी भी क्षतिग्रस्त बोगियों के भीतर तलाशी अभियान चला रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई और यात्री अंदर न फंसा हो।
