ईरान की राजधानी तेहरान में एक बड़े सैन्य घटनाक्रम के तहत पूर्व विदेश मंत्री और वर्तमान सुप्रीम लीडर के सलाहकार कमाल खराजी के आवास को निशाना बनाया गया है। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए इस संयुक्त हमले में 81 वर्षीय खराजी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह हमला तेहरान के पॉश इलाके अजौरानियेह में बुधवार, 1 अप्रैल को हुआ। घटना के तुरंत बाद उन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है।
कमाल खराजी ईरान के कूटनीतिक हलकों में एक अत्यंत प्रभावशाली व्यक्तित्व माने जाते हैं। वे वर्तमान में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के विदेश मामलों के सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं। विशेष रूप से, वे पाकिस्तान के साथ चल रही शांति वार्ता में ईरान का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। पाकिस्तान और ईरान के बीच हाल के समय में सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर जो भी संदेश साझा किए जा रहे थे, उनके केंद्र में खराजी ही थे। इस हमले ने न केवल ईरान की आंतरिक सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पड़ोसी देशों के साथ चल रही कूटनीतिक प्रक्रियाओं को भी अधर में डाल दिया है।
हमले का विवरण और वर्तमान स्थिति
ईरानी समाचार पत्र 'मिहान' की रिपोर्ट के अनुसार, हमला बुधवार को तेहरान के उत्तरी भाग में स्थित अजौरानियेह क्षेत्र में हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, धमाका इतना शक्तिशाली था कि खराजी के आवास का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। हमले के समय खराजी अपने घर के भीतर ही मौजूद थे। सुरक्षा बलों ने तुरंत इलाके की घेराबंदी कर दी और राहत कार्य शुरू किया। अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, खराजी को कई गंभीर चोटें आई हैं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनके उपचार में लगी हुई है। अभी तक इजराइल या अमेरिका की ओर से इस विशिष्ट हमले के लक्ष्यों पर कोई आधिकारिक विस्तृत विवरण साझा नहीं किया गया है, लेकिन इसे ईरान के शीर्ष नेतृत्व के करीबियों को निशाना बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
कमाल खराजी का कूटनीतिक सफर और प्रभाव
81 वर्षीय कमाल खराजी ईरान के सबसे अनुभवी राजनयिकों में से एक हैं। उन्होंने 1997 से 2005 तक ईरान के विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया था। विदेश मंत्रालय से हटने के बाद, उनकी नियुक्ति सुप्रीम लीडर के कार्यालय में हुई, जहाँ उन्होंने रणनीतिक और विदेश नीति के मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। खराजी को अयातुल्ला अली खामेनेई का बेहद करीबी और भरोसेमंद माना जाता है। वर्तमान में वे मोज्तबा खामेनेई के विदेश सलाहकार के रूप में भी सक्रिय थे। उनकी शिक्षा अमेरिका में हुई थी, जहाँ उन्होंने 1975 में ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की थी। उनकी इसी अंतरराष्ट्रीय समझ के कारण उन्हें जटिल वैश्विक वार्ताओं के लिए ईरान का प्रमुख चेहरा माना जाता था।
पाकिस्तान के साथ शांति समझौते में खराजी की भूमिका
पाकिस्तान और ईरान के बीच हालिया तनाव को कम करने के लिए जो कूटनीतिक चैनल सक्रिय थे, उनमें कमाल खराजी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी थे। पाकिस्तान की सरकार और सैन्य नेतृत्व शांति समझौते के लिए सीधे खराजी के संपर्क में थे और पाकिस्तान द्वारा भेजे गए सभी आधिकारिक संदेश और शांति प्रस्तावों की समीक्षा खराजी द्वारा ही की जा रही थी। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य सीमा पार आतंकवाद को रोकना और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना था। खराजी पर हुए इस हमले के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय में भी हलचल तेज हो गई है, क्योंकि शांति वार्ता के मुख्य सूत्रधार के घायल होने से पूरी प्रक्रिया के बाधित होने की आशंका बढ़ गई है।
अमेरिका और इजराइल का कड़ा रुख
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग अपने चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि युद्ध जारी रहता है, तो अमेरिका ईरान को बमबारी के जरिए 'पाषाण काल' (Stone Age) में भेजने से पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला है और वे ईरान के परमाणु और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। दूसरी ओर, ईरान के सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई ने भी घोषणा की है कि जब तक ईरान अपने लक्ष्यों को हासिल नहीं कर लेता, तब तक जंग जारी रहेगी। इस तनावपूर्ण माहौल में खराजी जैसे वरिष्ठ नेता पर हमला संघर्ष के और अधिक फैलने का संकेत दे रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता और चीन का पांच-सूत्रीय प्लान
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में चीन, तुर्की, पाकिस्तान, मिस्र और सऊदी अरब सक्रिय रूप से शामिल हैं। अमेरिका की ओर से इस डील का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं और चीन ने इस संकट के समाधान के लिए एक 'पांच-सूत्रीय प्लान' पेश किया है। इस योजना के तहत तत्काल युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खुला रखने और ईरान की संप्रभुता का सम्मान करते हुए उस पर भविष्य में हमले न करने की बात कही गई है। हालांकि, खराजी पर हुए हमले के बाद इन शांति प्रस्तावों के क्रियान्वयन पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।
