ईरान की अमेरिका को दो टूक: इस्लामाबाद वार्ता से पहले रखीं दो बड़ी शर्तें

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली प्रस्तावित वार्ता से पहले तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गालिबाफ ने बातचीत शुरू करने के लिए लेबनान में युद्धविराम और फ्रीज की गई संपत्तियों की बहाली की अनिवार्य शर्त रखी है।

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में कल होने वाली अमेरिका-ईरान शांति वार्ता से ठीक पहले कूटनीतिक गतिरोध पैदा हो गया है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह मेज पर बैठने से पहले अपनी दो प्रमुख मांगों को पूरा होते देखना चाहता है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गालिबाफ के अनुसार, इन शर्तों के बिना बातचीत की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पहले ही इस्लामाबाद के लिए रवाना हो चुके हैं, लेकिन ईरानी प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने पर अभी भी संशय बना हुआ है।

गालिबाफ की दो अनिवार्य शर्तें

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बघेर गालिबाफ ने आधिकारिक बयान जारी कर अमेरिका के सामने दो प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली शर्त के तहत अमेरिका को लेबनान में तत्काल युद्धविराम लागू करवाना होगा। दूसरी शर्त में ईरान ने अपनी उन संपत्तियों को तत्काल रिलीज करने की मांग की है जिन्हें अमेरिका ने विभिन्न प्रतिबंधों के तहत फ्रीज कर रखा है। गालिबाफ ने स्पष्ट किया कि इन दोनों कार्यों के पूरा होने के बाद ही ईरान की टीम बातचीत में शामिल होगी। माना जा रहा है कि गालिबाफ स्वयं इस वार्ता में ईरानी डेलिगेशन का नेतृत्व करने वाले हैं।

ईरानी सेना की 'ट्रिगर पर उंगली' वाली चेतावनी

कूटनीतिक दबाव के बीच ईरान की सेना ने भी कड़े तेवर दिखाए हैं। खात्म अल-अनबिया मुख्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उनकी सेना पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है और सैनिकों की उंगली ट्रिगर पर है। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, यदि ईरान पर किसी भी प्रकार का हमला होता है, तो उसका तत्काल और प्रभावी जवाब दिया जाएगा। ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रहती है, तो वह कड़ा और दर्दनाक पलटवार करने के लिए तैयार है।

जेडी वेंस का रुख और अमेरिकी रणनीति

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस्लामाबाद रवाना होने से पहले अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि वह इस वार्ता को लेकर आशावादी हैं और उन्होंने जानकारी दी कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बातचीत के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए हैं। वेंस ने स्पष्ट किया कि यदि ईरान ईमानदारी से समाधान की दिशा में कदम बढ़ाता है, तो अमेरिका सहयोग के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि ईरानी पक्ष की ओर से किसी भी प्रकार की चालबाजी या देरी की रणनीति अपनाई गई, तो अमेरिकी टीम बेहद सख्त रुख अपनाएगी।

होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय सुरक्षा पर रुख

ईरान ने क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापारिक मार्गों को लेकर भी अपनी रणनीति स्पष्ट की है। तेहरान की ओर से कहा गया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर अपनी सामरिक स्थिति को एक नए स्तर पर ले जाने की योजना बना रहा है। अधिकारियों के अनुसार, ईरान अपने संप्रभु अधिकारों से किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगा। इस बयान को वैश्विक तेल आपूर्ति मार्ग पर ईरान के नियंत्रण और प्रभाव के प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं बढ़ गई हैं।