इजराइल में 27 अक्टूबर को आम चुनाव: क्या फिर सत्ता में वापसी कर पाएंगे बेंजामिन नेतन्याहू?

इजराइल में 27 अक्टूबर को होने वाले आम चुनाव प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए बड़ी परीक्षा साबित होंगे। 7 अक्टूबर 2023 के हमलों के बाद यह पहला चुनाव है, जिसमें सुरक्षा चूक, सैन्य भर्ती और न्यायिक सुधार जैसे मुद्दे हावी रहेंगे।

इजराइल में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं क्योंकि देश में 27 अक्टूबर को आम चुनाव होने की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। यह चुनाव इजराइल के इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है क्योंकि 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा किए गए हमले और उसके बाद गाजा, लेबनान और ईरान के साथ छिड़े युद्धों के बाद यह पहला राष्ट्रीय चुनाव होगा। इस चुनाव के परिणामों का सीधा असर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य पर पड़ेगा, जिन्हें वर्तमान में कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

चुनाव की तारीख पर लगा विराम

पिछले कुछ समय से इजराइल में चुनाव की तारीख को लेकर काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। मई के महीने में इजराइल की संसद जिसे नेसेट कहा जाता है, ने खुद को भंग कर दिया था। इसके बाद से ही देश में जल्द चुनाव होने की अटकलें लगाई जा रही थीं। हालांकि, अब सरकार के गठबंधन प्रमुख ओफिर काट्ज ने संसदीय समिति के सामने स्थिति स्पष्ट कर दी है और उन्होंने बताया कि कानून के प्रावधानों के अनुसार, मतदान 27 अक्टूबर को ही संपन्न कराया जाएगा। इस स्पष्टता के बाद अब सभी राजनीतिक दल अपनी चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं।

नेतन्याहू की सत्ता में वापसी की कोशिशें

76 वर्षीय बेंजामिन नेतन्याहू इजराइल के इतिहास में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर रहने वाले नेता हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह घोषणा की है कि वह एक बार फिर चुनाव मैदान में उतरेंगे और जीतकर दोबारा सरकार बनाएंगे और नेतन्याहू का कहना है कि वह इस चुनाव को हर हाल में जीतना चाहते हैं। अपनी सरकार को बचाने और गठबंधन को मजबूत करने के लिए वह चुनाव से पहले कई नए कानून जल्दबाजी में पास कराने की कोशिश कर रहे हैं। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि वह एक ऐसी व्यापक राष्ट्रीय सरकार बनाना चाहते हैं जो अरब पार्टियों के समर्थन पर निर्भर न हो, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा और एकता को अपना मुख्य चुनावी मुद्दा बनाएंगे।

सर्वे के आंकड़े और जनता का मूड

हालांकि, नेतन्याहू के लिए सत्ता की राह इतनी आसान नहीं दिख रही है। हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूसलम द्वारा किए गए एक हालिया सर्वे के अनुसार, नेतन्याहू की लोकप्रियता में भारी गिरावट आई है और मार्च की शुरुआत में जहां 40 दशमलव 5 प्रतिशत लोग उनके समर्थन में थे, वहीं जून तक यह आंकड़ा गिरकर 29 दशमलव 4 प्रतिशत पर आ गया है। सर्वे में यह भी सामने आया है कि 92 प्रतिशत से ज्यादा इजराइली मानते हैं कि हालिया युद्धों के दौरान ईरान की स्थिति मजबूत हुई है। जनता में 7 अक्टूबर 2023 के हमले के दौरान हुई सुरक्षा चूक को लेकर अब भी गहरा आक्रोश है। इसके अलावा, अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमले के बाद हुए युद्धविराम और तेहरान-वॉशिंगटन समझौते को भी कई लोग इजराइल के हितों के खिलाफ मान रहे हैं।

चुनाव के मुख्य मुद्दे और चुनौतियां

इस चुनाव में कई ऐसे मुद्दे हैं जो मतदाताओं के फैसले को प्रभावित करेंगे। इनमें सबसे प्रमुख मुद्दा अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदियों की सेना में अनिवार्य भर्ती का है और नेतन्याहू के सहयोगी दल चाहते हैं कि उनके समुदाय को इस भर्ती से छूट मिले, जबकि आम जनता और सेना का मानना है कि युद्ध की स्थिति को देखते हुए अधिक जवानों की आवश्यकता है। इसके अलावा, नेतन्याहू पर चल रहे भ्रष्टाचार के मामले, न्यायिक सुधार और गाजा में युद्ध के बाद की व्यवस्था भी बड़े चुनावी मुद्दे होंगे। विपक्ष की ओर से पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट नेतन्याहू के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। अब 27 अक्टूबर को होने वाला मतदान ही यह तय करेगा कि इजराइल की कमान फिर से नेतन्याहू के हाथों में होगी या देश को कोई नया नेतृत्व मिलेगा।