इजराइल की राजनीति में इस समय भूचाल आया हुआ है और सरकार बनाने को लेकर गहरा राजनीतिक संकट पैदा हो गया है। इस गंभीर संकट से बाहर निकलने और सत्ता समीकरणों को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए विपक्ष की तरफ से एक बहुत बड़ा और चौकाने वाला कदम उठाने की तैयारी चल रही है। विपक्षी गठबंधन के दल अब इजराइल में प्रधानमंत्री के सीधे चुनाव कराने के लिए नया कानून लाने पर विचार कर रहे हैं और हिब्रू मीडिया से सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरे प्रस्ताव का मुख्य और छिपा हुआ मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अरब पार्टियों के राजनीतिक समर्थन के बिना भी एक स्थिर अल्पमत सरकार का गठन आसानी से किया जा सके। इस संभावित और नए प्रस्ताव के लागू होने के बाद इजराइल के मतदाताओं को सरकार चुनने की मौजूदा व्यवस्था से पूरी तरह अलग सीधे तौर पर देश के प्रधानमंत्री को वोट देने का विशेष अधिकार मिल जाएगा। इसका सीधा मतलब यह होगा कि प्रधानमंत्री पद के लिए एक बिल्कुल अलग और स्वतंत्र चुनाव कराया जाएगा, जो पारंपरिक संसदीय चुनावों से अलग होगा।
इस प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत, यदि कोई उम्मीदवार सीधे चुनाव में जीत हासिल कर लेता है, तो वह संसद में पूर्ण बहुमत न होने के बावजूद भी देश में अल्पमत सरकार का गठन करने में पूरी तरह कामयाब हो जाएगा। इस क्रांतिकारी बदलाव के बाद देश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति में सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि प्रधानमंत्री या सरकार को सत्ता में बने रहने के लिए किसी भी स्थिति में अरब दलों के समर्थन की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं पड़ेगी। मौजूदा राजनीतिक हालात की बात करें तो मंगलवार को संपन्न हुए चुनाव के बाद इजराइल में किसी भी राजनीतिक गठबंधन या दल को संसद में स्पष्ट बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल नहीं हो सका है। देश के मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन और उनके धुर विरोधियों, दोनों में से कोई भी पक्ष 120 सदस्यों वाली देश की संसद यानी नेसेट में बहुमत का जादुई आंकड़ा छूने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। इसी गंभीर संख्यात्मक कमी और गतिरोध की वजह से इजराइल में सरकार गठन को लेकर लगातार राजनीतिक अनिश्चितता और गतिरोध बना हुआ है।
दिलचस्प बात यह है कि प्रधानमंत्री के सीधे चुनाव कराने का यह विचार इजराइल के राजनीतिक गलियारों में पूरी तरह नया नहीं है, बल्कि इससे पहले खुद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी ऐसा ही प्रस्ताव देश के सामने रख चुके हैं। मार्च 2021 में संपन्न हुए आम चुनाव के बाद जब देश में ऐसी ही राजनीतिक स्थिति पैदा हुई थी, तब नेतन्याहू ने भी कुछ इसी तरह का प्रस्ताव सार्वजनिक रूप से दिया था। उस दौर में भी चुनाव के बाद किसी भी दल या गठबंधन को संसद में स्पष्ट बहुमत नहीं मिल पाया था। उस समय प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू खुद भी देश में सरकार बनाने के लिए जरूरी और पर्याप्त राजनीतिक समर्थन जुटाने में पूरी तरह असमर्थ साबित हो रहे थे। उसी राजनीतिक लाचारी और गतिरोध से उबरने के लिए उन्होंने देश में प्रधानमंत्री के सीधे चुनाव कराने का यह सुझाव सबसे पहले दिया था, जिसे अब उनके विरोधी अपना रहे हैं।
हालांकि, इस प्रस्ताव को धरातल पर उतारना और कानून में तब्दील करना इतना आसान नहीं होगा क्योंकि इसके लिए कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं के कड़े दौर से गुजरना पड़ेगा और इजराइल में सरकार बनाने और उसके संचालन की पूरी प्रक्रिया देश के बेहद महत्वपूर्ण अर्ध-संवैधानिक कानून जिसे ‘बेसिक लॉ: द गवर्नमेंट’ कहा जाता है, उसके सख्त प्रावधानों के तहत तय की जाती है और नियंत्रित होती है। इस मौजूदा कानून के नियमों के अनुसार, देश की किसी भी नई बनने वाली सरकार को आधिकारिक रूप से शपथ लेने से पहले 120 सदस्यों वाली नेसेट में अनिवार्य रूप से विश्वास मत हासिल करना ही होता है। इसलिए, यदि देश में प्रधानमंत्री के सीधे चुनाव की इस नई और अनोखी व्यवस्था को कानूनी रूप से लागू करना है, तो सबसे पहले इस अर्ध-संवैधानिक कानून में बड़े पैमाने पर संशोधन और बदलाव करने होंगे।
इस प्रकार के किसी भी बड़े कानूनी बदलाव को अंजाम देने के लिए नेसेट के कम से कम 61 सांसदों का ठोस और स्पष्ट समर्थन मिलना पूरी तरह अनिवार्य होगा। इसका मतलब यह साफ है कि विपक्षी दलों को इस कानून को पारित कराने के लिए संसद के भीतर अपनी तरफ से पर्याप्त बहुमत का आंकड़ा जुटाना ही होगा। फिलहाल की स्थिति यह है कि यह पूरा प्रस्ताव अभी केवल विपक्षी दलों के बीच आपसी चर्चा और मंथन के शुरुआती स्तर पर ही अटका हुआ है। अभी तक यह बात बिल्कुल भी साफ नहीं हो पाई है कि क्या वाकई इस प्रस्ताव को आधिकारिक रूप से संसद के पटल पर पेश किया जाएगा या नहीं और क्या इसे इजराइल की संसद में जरूरी राजनीतिक समर्थन मिल पाएगा या यह सिर्फ चर्चा बनकर रह जाएगा। बहरहाल, यदि यह कानून भविष्य में बदलता है, तो इससे इजराइल में प्रधानमंत्री चुनने और देश में सरकार के गठन करने का पूरा का पूरा मौजूदा पारंपरिक तरीका हमेशा के लिए बदल जाएगा।
