इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य संघर्ष अब अपने 17वें दिन में प्रवेश कर गया है। दोनों पक्षों की ओर से हमलों की तीव्रता में भारी वृद्धि देखी जा रही है और इजरायली और अमेरिकी वायुसेना ईरान के भीतर घुसकर रणनीतिक ठिकानों पर हवाई हमले कर रही है, जिसके जवाब में ईरान ने ड्रोन और मिसाइलों का बड़े पैमाने पर उपयोग शुरू कर दिया है। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, अमेरिकी नौसेना ने एक महत्वपूर्ण अभियान में ईरानी नौसेना की माइन्स बिछाने वाली 10 से अधिक नौकाओं को नष्ट कर दिया है। यह कार्रवाई खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
युद्ध की पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति
इस भीषण युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रमों और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करने के लिए एक व्यापक हवाई अभियान शुरू किया था। इन शुरुआती हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ सैन्य और राजनीतिक अधिकारियों के मारे जाने की खबरें आई थीं और तब से, ईरान ने क्षेत्रीय स्तर पर जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। वर्तमान में, ईरान न केवल इजरायली ठिकानों को बल्कि उन खाड़ी देशों को भी निशाना बना रहा है जहां अमेरिकी सैन्य उपस्थिति है या जो अमेरिका के सहयोगी माने जाते हैं।
दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ड्रोन हमला
ईरान और उसके सहयोगियों द्वारा किए गए हमलों के बीच संयुक्त अरब अमीरात का दुबई शहर भी निशाने पर आ गया है। दुबई मीडिया ऑफिस के आधिकारिक बयान के अनुसार, सिविल डिफेंस टीमों ने दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास एक ड्रोन हमले के कारण लगी आग पर सफलतापूर्वक काबू पा लिया है। सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए, दुबई सिविल एविएशन अथॉरिटी ने हवाई अड्डे पर सभी उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। अधिकारियों ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे अपनी उड़ानों की स्थिति जानने के लिए संबंधित एयरलाइंस के संपर्क में रहें। इसके अतिरिक्त, ईरान ने यूएई, बहरीन, कुवैत, कतर और सऊदी अरब पर सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं, जिनमें नागरिक बुनियादी ढांचे और ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान और सैन्य कार्रवाई
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ईरान की सैन्य क्षमताओं पर बड़ा दावा किया है। राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी सेना उन विशिष्ट स्थानों को निशाना बना रही है जहां ईरान उन ड्रोनों का निर्माण करता है जिनका उपयोग इजरायल और अमेरिकी संपत्तियों के खिलाफ किया जा रहा है। ट्रंप ने कहा कि ईरान की उत्पादन क्षमता अब लगभग समाप्त हो चुकी है और उसके पास मूल ड्रोन भंडार का केवल 20 प्रतिशत ही बचा है। उन्होंने ईरान को 'मीडिया हेरफेर का मास्टर' बताते हुए कहा कि वे सैन्य रूप से कमजोर हो चुके हैं लेकिन गलत सूचनाएं फैलाने में माहिर हैं।
क्षेत्रीय संघर्ष: कुवैत और इराक में हमले
युद्ध का दायरा पड़ोसी देशों तक फैल गया है और कुवैत के नेशनल गार्ड ने पुष्टि की है कि पिछले 24 घंटों के भीतर उन्होंने अपनी हवाई सीमा में प्रवेश करने वाले 2 ईरानी ड्रोनों को मार गिराया है। इनमें से एक हमले में कुवैत के अली अल सलेम बेस को निशाना बनाया गया था, जहां इतालवी टास्क फोर्स द्वारा उपयोग किए जाने वाले एक रिमोट संचालित विमान को नुकसान पहुंचा है और वहीं इराक में, 'सराया औलिया अल-दम' नामक समूह ने बगदाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास स्थित अमेरिकी 'विक्ट्री बेस' पर रॉकेट हमले की जिम्मेदारी ली है। इराकी अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में कम से कम 5 लोग घायल हुए हैं और पास के एक जल शोधन संयंत्र (Desalination Plant) को भी क्षति पहुंची है।
राजनयिक प्रयास और समुद्री सुरक्षा
वैश्विक स्तर पर इस संकट के समाधान और समुद्री व्यापार मार्ग को सुरक्षित रखने के लिए राजनयिक प्रयास भी तेज हो गए हैं। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ टेलीफोन पर बातचीत की है। इस चर्चा का मुख्य केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और वैश्विक शिपिंग में आ रही बाधाओं को दूर करना था। राष्ट्रपति ट्रंप ने ब्रिटेन और अन्य सहयोगी देशों से अपील की है कि वे इस रणनीतिक जलडमरूमध्य में जहाजों के सुरक्षित मार्ग को सुनिश्चित करने के लिए अपने युद्धपोत तैनात करें। इस बीच, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तेहरान में ईंधन डिपो पर इजरायली हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और युद्ध अपराध करार दिया है।
