Axiom 04 Mission / ISRO का Axiom Mission-4 फिर हुआ स्थगित, शुभांशु शुक्ला को आज शाम भरनी थी उड़ान

भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा टल गई है। एक्सिओम-4 मिशन को फाल्कन-9 रॉकेट में लिक्विड ऑक्सीजन रिसाव के कारण स्थगित कर दिया गया है। स्पेसएक्स ने मरम्मत के लिए समय मांगा है। नई लॉन्च तारीख जल्द घोषित होगी। शुभांशु 41 साल बाद अंतरिक्ष जाने वाले भारतीय बनते।

Axiom 04 Mission: भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का बहुप्रतीक्षित अंतरिक्ष में सफर अब कुछ और समय के लिए टल गया है। एक्सिओम-4 मिशन (Axiom-4) के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) की ओर रवाना होने वाली इस ऐतिहासिक यात्रा को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। इसकी वजह स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट में पाया गया लिक्विड ऑक्सीजन (LOX) रिसाव है, जिसकी मरम्मत के लिए इंजीनियरों ने अतिरिक्त समय मांगा है।

स्पेसएक्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस देरी की पुष्टि करते हुए कहा, “पोस्ट-स्टेटिक फायर बूस्टर निरीक्षण के दौरान एलओएक्स रिसाव की पहचान हुई, जिसकी मरम्मत के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। इसलिए हम Ax-4 मिशन की निर्धारित लॉन्चिंग को फिलहाल स्थगित कर रहे हैं।” कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि मरम्मत पूरी होने और लॉन्च रेंज की उपलब्धता के बाद नई लॉन्चिंग तारीख की घोषणा की जाएगी।

अंतरिक्ष की दहलीज पर भारत का नाम

शुभांशु शुक्ला को लेकर यह मिशन ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि वह 41 साल बाद अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बनने वाले थे। इससे पहले 1984 में राकेश शर्मा ने सोवियत संघ के इंटरकॉस्मोस कार्यक्रम के तहत अंतरिक्ष की यात्रा की थी।

लखनऊ में जन्मे शुभांशु की इस उड़ान की योजना फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से 14 दिनों के अंतरिक्ष मिशन के रूप में बनाई गई थी। एक्सिओम-4 मिशन में वह तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ ISS पर भेजे जाने वाले थे।

शानदार करियर, गगनयान मिशन का हिस्सा

10 अक्टूबर 1985 को जन्मे शुभांशु शुक्ला ने लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल से स्कूली शिक्षा प्राप्त की और फिर राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) में दाखिला लिया। 2006 में उन्हें भारतीय वायुसेना में कमीशन मिला और उन्होंने मिग-29, सुखोई-30 एमकेआई, जगुआर और डोर्नियर जैसे विमानों पर 2000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव प्राप्त किया। इसके साथ ही उन्होंने IIS बेंगलुरु से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में एमटेक भी किया है।

शुभांशु शुक्ला भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन के लिए चुने गए चार अंतरिक्ष यात्रियों में भी शामिल हैं। यह मिशन 2027 में लॉन्च किया जा सकता है, और इसके साथ भारत पूरी तरह से स्वदेशी मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम की दिशा में कदम रखेगा।

प्रतीक्षा लंबी जरूर, लेकिन उम्मीदें मजबूत

हालांकि इस देरी ने शुभांशु के सपनों की उड़ान को थोड़ी देर के लिए थाम दिया है, लेकिन यह रुकावट अस्थायी है। जैसे ही तकनीकी सुधार पूरे होते हैं और लॉन्चिंग की नई तारीख तय होती है, भारत फिर एक बार अंतरिक्ष में अपने जांबाज़ प्रतिनिधि को भेजने के लिए तैयार होगा।

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