इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने देश की राजनीति में एक बड़ा और कड़ा कदम उठाते हुए स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पेश किया है। रविवार 20 सितंबर को दिए गए एक आधिकारिक बयान में मेलोनी ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार न केवल कक्षाओं में धार्मिक रूप से चेहरा ढकने पर रोक लगाएगी, बल्कि विदेशी छात्रों की संख्या की भी एक निश्चित सीमा तय करने की योजना बना रही है। दक्षिणपंथी विचारधारा का प्रतिनिधित्व करने वाली मेलोनी ने यह घोषणा इटली में होने वाले आगामी आम चुनावों की तैयारी के मद्देनजर की है। गौरतलब है कि इटली में अगला आम चुनाव साल 2027 में प्रस्तावित है और मेलोनी के लिए यह चुनाव राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मेलोनी के इस फैसले के पीछे के राजनीतिक कारण
मेलोनी सरकार द्वारा चुनाव से ठीक पहले बुर्का और नकाब को एक बड़ा मुद्दा बनाने के पीछे कई गहरे राजनीतिक समीकरण छिपे हैं। अगर हम आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2022 के इटली चुनाव में करीब 26 प्रतिशत मतदाताओं ने बाहरी यानी अप्रवासियों को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया था। इसके साथ ही इटली में मुस्लिम आबादी भी एक महत्वपूर्ण कारक है, क्योंकि वहां करीब 3 प्रतिशत मुसलमान रहते हैं। मेलोनी अपने कोर दक्षिणपंथी वोटरों को एकजुट करने के लिए इन मुद्दों को हवा दे रही हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ और हालिया राजनीतिक चुनौतियां
इटली में चेहरे को ढकने को लेकर कानूनी स्थिति पहले से ही चर्चा में रही है। साल 2008 में इटली में एक कानूनी व्यवस्था लागू की गई थी जिसके तहत यह स्पष्ट किया गया था कि धार्मिक या सांस्कृतिक कारणों से चेहरे को ढकने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन पहचान के सत्यापन के दौरान चेहरा दिखाना अनिवार्य होगा। इसका मतलब यह था कि यदि पहचान की जरूरत पड़ती है, तो महिला को अपना बुर्का या नकाब हटाना होगा। अब मेलोनी इस व्यवस्था को और सख्त करते हुए स्कूलों में पूर्ण प्रतिबंध की ओर बढ़ रही हैं। इस फैसले का एक बड़ा कारण मार्च 2026 में हुआ जनमत संग्रह भी माना जा रहा है। न्यायिक सुधार को लेकर कराए गए इस जनमत संग्रह में मेलोनी को हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद उन्होंने 2027 के आम चुनाव के लिए अपनी रणनीति बदलते हुए दक्षिणपंथी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है।
स्कूलों में अप्रवासी छात्रों का आंकड़ा
मेलोनी का प्रस्ताव केवल बुर्के तक सीमित नहीं है, बल्कि वह स्कूलों में विदेशी छात्रों की संख्या भी नियंत्रित करना चाहती हैं। अलजजीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, इटली के स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 20 प्रतिशत बच्चे अप्रवासी पृष्ठभूमि से आते हैं। मेलोनी इसी आंकड़े को आधार बनाकर चुनाव में बढ़त हासिल करने की कोशिश कर रही हैं, ताकि उन 26 प्रतिशत मतदाताओं को साधा जा सके जो अप्रवासियों को देश के लिए एक मुद्दा मानते हैं।
दुनिया भर में बुर्का पर प्रतिबंध की स्थिति
बुर्का पर प्रतिबंध लगाने के मामले में इटली अकेला देश नहीं है। वर्तमान में दुनिया के 24 देशों में बुर्का पर किसी न किसी रूप में प्रतिबंध लगाया जा चुका है। इसमें सबसे आगे यूरोप के 10 देश हैं, जिनमें फ्रांस, इटली, पुर्तगाल, स्विट्जरलैंड, बेल्जियम, बुल्गारिया, नीदरलैंड और डेनमार्क जैसे नाम शामिल हैं। इसी तरह एशिया के 7 देशों ने भी बुर्का पर प्रतिबंध लगा रखा है, जिसमें चीन का नाम सबसे ऊपर है। इसके अलावा श्रीलंका, किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान में भी ऐसे प्रतिबंध लागू हैं। अफ्रीका महाद्वीप के भी 7 देशों में बुर्का पहनने पर पाबंदी है। मेलोनी का यह नया प्रस्ताव इटली को उन देशों की श्रेणी में और मजबूती से खड़ा करता है जो सार्वजनिक और शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक पहनावे को विनियमित कर रहे हैं।
