इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी 2027 में होने वाले आगामी राष्ट्रीय चुनावों से पहले एक गंभीर राजनीतिक चुनौती के केंद्र में हैं। देश के युवा मतदाता, विशेष रूप से जेन जेड और 35 वर्ष से कम आयु के लोग, उनकी दक्षिणपंथी गठबंधन सरकार से तेजी से विमुख हो रहे हैं। यूट्रेंड (Youtrend) द्वारा जारी किए गए हालिया पोलिंग आंकड़ों के अनुसार, 35 साल से कम उम्र के मतदाताओं के बीच मेलोनी के गठबंधन का समर्थन गिरकर 30 प्रतिशत से भी नीचे आ गया है। इसके विपरीत, केंद्र-वामपंथी (सेंटर-लेफ्ट) विपक्ष को युवाओं का लगभग 50 प्रतिशत समर्थन मिल रहा है। यह स्थिति मेलोनी के लिए इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि 2023 में अकेले उनकी पार्टी 'ब्रदर्स ऑफ इटली' को युवाओं का जितना समर्थन प्राप्त था, आज उनके पूरे तीन-पार्टी गठबंधन को मिलाकर भी उतना ही समर्थन मिल पा रहा है।
आर्थिक बदहाली और युवाओं का पलायन
विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं के बीच इस बढ़ते असंतोष का मुख्य कारण मेलोनी सरकार की आर्थिक नीतियां हैं और 2022 में सत्ता संभालने के बाद से, सरकार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने या ठोस आर्थिक सुधार करने में विफल रही है। यूरोस्टेट (Eurostat) के आंकड़ों के अनुसार, 21 देशों वाले यूरोजोन में इटली की 15 से 24 साल के युवाओं की रोजगार दर सबसे कम है। बैंक ऑफ इटली की एक रिपोर्ट इस अंतर को और स्पष्ट करती है, जिसमें बताया गया है कि जर्मनी का एक युवा स्नातक, इटली के अपने समकक्ष की तुलना में औसतन 80 प्रतिशत अधिक वेतन प्राप्त करता है। इसके अलावा, इटली अपने यूरोपीय पड़ोसियों की तुलना में शिक्षा पर बहुत कम खर्च करता है। अवसरों की इसी कमी के कारण 2020 से 2024 के बीच 1 लाख से अधिक युवा स्नातक इटली छोड़कर दूसरे देशों में चले गए हैं। रोम की लुइस यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर लोरेंजो डी सियो के अनुसार, सरकार की नीतियां उन लोगों के लिए तो अनुकूल हैं जो पहले से ही सिस्टम का हिस्सा हैं, लेकिन युवाओं जैसे कमजोर वर्गों के लिए ये नीतियां नुकसानदेह साबित हो रही हैं।
जेंडर के आधार पर राजनीतिक विभाजन
इटली के युवाओं का राजनीतिक झुकाव जेंडर (लिंग) के आधार पर भी बंटा हुआ है, जो वर्तमान में पूरे यूरोप में एक बड़े ट्रेंड के रूप में उभर रहा है। बोकोनी यूनिवर्सिटी के शोध के मुताबिक, इटली के युवा पुरुष दक्षिणपंथी पार्टियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जबकि युवा महिलाएं वामपंथी दलों को प्राथमिकता दे रही हैं। मेलोनी की पार्टी 'ब्रदर्स ऑफ इटली' को 18 से 29 साल के 15 प्रतिशत युवा पुरुषों का समर्थन हासिल है, जबकि इसी उम्र की केवल 4 दशमलव 2 प्रतिशत महिलाएं उनके साथ हैं। इसके विपरीत, विपक्षी दल '5-स्टार मूवमेंट' को 30 वर्ष से कम उम्र की 18 प्रतिशत महिलाओं का समर्थन प्राप्त है, लेकिन पुरुषों के बीच उनका समर्थन मात्र 5 दशमलव 1 प्रतिशत ही है।
सख्त कानून और 'नो-मेलोनी डे' का विरोध
मेलोनी सरकार द्वारा लागू किए गए सख्त कानून-व्यवस्था के एजेंडे ने भी युवाओं को नाराज किया है। सरकार ने रेव पार्टियों, गांजा के उपयोग, सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों और किशोर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए कई कड़े नियम बनाए हैं और हाल ही में पेश किए गए एक बिल के तहत, 14 से 17 साल के किशोरों द्वारा किए गए अपराधों के लिए उन्हें पूरी तरह से जिम्मेदार माना जाएगा, जब तक कि वे स्वयं को निर्दोष साबित न कर दें। यह कानून पुराने सिस्टम को बदलता है जहां न्यायाधीश यह तय करते थे कि किशोर को अपने अपराध की समझ थी या नहीं। कैदियों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन 'एंटीगोन' के अनुसार, 2023 के एक आदेश के बाद किशोर जेलों में कैदियों की संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके अलावा, स्कूलों में यौन शिक्षा (सेक्स एजुकेशन) के लिए अब माता-पिता की लिखित अनुमति अनिवार्य कर दी गई है। इन नीतियों, गाजा युद्ध में इजराइल के समर्थन और शिक्षा बजट में कटौती के विरोध में 14 नवंबर 2025 को हजारों छात्रों ने पूरे इटली में 'नो-मेलोनी डे' मनाकर अपना विरोध दर्ज कराया था।
युवाओं का वोट और नए राजनीतिक विकल्प
हालांकि युवा मतदाता मेलोनी का साथ छोड़कर सेंटर-लेफ्ट दलों की ओर जा रहे हैं, लेकिन यह केवल लेफ्ट बनाम राइट की पारंपरिक लड़ाई नहीं है। फरवरी में पूर्व आर्मी जनरल रॉबर्टो वन्नाची ने धुर-दक्षिणपंथी पार्टी 'नेशनल फ्यूचर' का गठन किया था, जिसे सर्वेक्षणों में लगभग 7 प्रतिशत वोट शेयर मिला है। वन्नाची प्रवासियों को उनके देश वापस भेजने के वादे के साथ शहरों के असंतुष्ट युवाओं को अपनी ओर खींच रहे हैं। इसके अलावा, युवाओं का एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो किसी भी पार्टी को पसंद नहीं करता और मतदान प्रक्रिया से दूर रहता है।
2026 के जनमत संग्रह का प्रभाव
पारंपरिक रूप से इटली के युवा मतदान में कम रुचि दिखाते थे, जिससे उनकी नाराजगी का असर चुनाव परिणामों पर कम पड़ता था। लेकिन मार्च 2026 में मेलोनी सरकार द्वारा समर्थित न्याय-प्रणाली सुधारों पर हुए जनमत संग्रह ने इस धारणा को बदल दिया। इस रेफरेंडम में 35 साल से कम उम्र के 67 प्रतिशत युवाओं ने मतदान किया, जिनमें से 60 प्रतिशत ने सरकार के सुधारों को सिरे से खारिज कर दिया, जबकि कुल राष्ट्रीय मतदान 59 प्रतिशत रहा था। मेलोनी ने युवाओं को रिझाने के लिए वोटिंग से पहले एक प्रसिद्ध रैपर के पॉडकास्ट में भी हिस्सा लिया था, लेकिन इसका कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 के इस जनमत संग्रह ने यह साबित कर दिया है कि यदि युवा एकजुट होकर मतदान करें, तो वे 2027 के चुनावों में सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
इटली का जनसांख्यिकीय संकट
इटली यूरोप के उन देशों में शामिल है जहां बुजुर्गों की आबादी सबसे अधिक है। इटली की राजनीति हमेशा से पेंशनभोगियों और बुजुर्गों पर केंद्रित रही है क्योंकि वे सबसे बड़ा और विश्वसनीय वोट बैंक हैं और यही कारण है कि अक्सर शिक्षा और युवाओं के रोजगार बजट में कटौती की जाती है, जो वर्तमान युवा असंतोष की मुख्य जड़ है। मेलोनी के सामने जेंडर के आधार पर जो वोटिंग विभाजन दिख रहा है, वह पोलैंड, जर्मनी और स्पेन जैसे अन्य यूरोपीय देशों में भी तेजी से बढ़ रहा है, जो भविष्य की राजनीति के लिए एक नया संकेत है।
