संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रतिष्ठित मंच से विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने न केवल पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ी लताड़ लगाई, बल्कि दुनिया के सामने कई महत्वपूर्ण संदेश भी रखे। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने आतंकवाद से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मिडिल ईस्ट के संघर्ष से लेकर रूस-यूक्रेन युद्ध तक के व्यापक विषयों पर चर्चा की। जयशंकर का यह भाषण वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व स्थिरता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी सुरक्षा और वैश्विक शांति के लिए किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।
आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस का कड़ा संदेश
डॉ. एस जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान का नाम लिए बिना उस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि आतंकवाद को सामान्य बनाने और उसके परिणामों से छूट का दावा करने वाले किसी भी तर्क को अब स्वीकार नहीं किया जाएगा और विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि जो सरकारें आतंकवाद को बढ़ावा देती हैं या उसे अपनी नीति के रूप में इस्तेमाल करती हैं, उन्हें जवाबदेह ठहराना अनिवार्य है। उन्होंने भारत के जीरो टॉलरेंस के रुख को दोहराते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि दोस्ती और सद्भावना कभी भी आतंकवाद के साथ सह-अस्तित्व में नहीं रह सकती और उन्होंने आतंकवाद के वित्तीय नेटवर्क को उजागर करने और उसका मुकाबला करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि इस वैश्विक खतरे की जड़ों पर प्रहार किया जा सके। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपने बचाव के अधिकार का पूरी शक्ति से इस्तेमाल करेगा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर भारत का दृष्टिकोण
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा करते हुए जयशंकर ने फरवरी में भारत में आयोजित AI Impact Summit का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने AI को मानव सशक्तिकरण, आर्थिक समृद्धि और बड़े पैमाने पर जटिल समस्याओं के समाधान के एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया। जयशंकर ने तर्क दिया कि प्रत्येक देश को अपने राष्ट्रीय लक्ष्यों और प्राथमिकताओं के अनुसार अपना स्वयं का AI Ecosystem, Models और Deployment Strategy विकसित करने का पूर्ण अधिकार है। उन्होंने AI को ग्लोबल साउथ के देशों के साथ भारत की साझेदारी के एजेंडे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। हालांकि, उन्होंने AI के दुरुपयोग के प्रति भी आगाह किया और कहा कि इसका गलत इस्तेमाल पूर्वाग्रहों को बढ़ा सकता है और आपसी सम्मान की भावना को कमजोर कर सकता है। भारत का लक्ष्य तकनीक का उपयोग विकास के लिए करना है, न कि विभाजन के लिए।
मिडिल ईस्ट संघर्ष और समुद्री सुरक्षा पर चिंता
संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और उसके वैश्विक प्रभावों पर गहरी चिंता व्यक्त की और विदेश मंत्री ने लाल सागर से लेकर काला सागर तक के समुद्री क्षेत्रों में कमर्शियल जहाजों और नाविकों पर हो रहे हमलों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों और निर्दोष नाविकों को निशाना बनाना किसी भी स्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता। जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता वैश्विक व्यापार के लिए घातक है और जयशंकर ने इन संघर्षों में भारतीय नाविकों सहित कई देशों के नाविकों की जान जाने पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से संयम बरतने और तनाव को कम करने की अपील की। भारत ने समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लाइबेरिया और 23 अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर की जा रही पहलों का भी जिक्र किया।
रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक खाद्य सुरक्षा
रूस-यूक्रेन संघर्ष के पांचवें वर्ष में प्रवेश करने पर भारत ने अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के UNGC में दिए गए बयान का हवाला देते हुए जयशंकर ने कहा कि अब समय आ गया है कि इस अंतहीन युद्ध को समाप्त करने का रास्ता खोजा जाए और उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत उन सभी मौजूदा पहलों का समर्थन करता है जो क्षेत्र में शांति लाने की दिशा में काम कर रही हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर खाद्यान्न और ऊर्जा आपूर्ति में जो बाधाएं आई हैं, उन्हें दूर करना प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने नाविकों की सुरक्षा के साथ-साथ खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। भारत का मानना है कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और बातचीत ही एकमात्र रास्ता है।
ग्लोबल साउथ का 4F संकट और चुनौतियां
जयशंकर ने अपने भाषण में ग्लोबल साउथ के देशों के सामने मौजूद 4F संकट—Food, Fuel, Fertilizer और Finance का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने सुपर अल नीनो के प्रभाव, उर्वरकों की भारी कमी और अनाज की आवाजाही में आने वाली बाधाओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में लगभग हर चीज का हथियारीकरण (Weaponization) किया जा रहा है, जो विकासशील देशों के लिए एक बड़ा खतरा है। जयशंकर ने ग्लोबल साउथ के देशों के औद्योगिकीकरण के अधिकार का मुद्दा भी उठाया और गैर-बाजार गतिविधियों व बाजार से वंचित किए जाने की प्रवृत्तियों की आलोचना की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के मंच से भारत की ‘First Responder’ की भूमिका का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे भारत संकट के समय अन्य देशों की मदद के लिए हमेशा सबसे पहले आगे आता है।
बहुध्रुवीय विश्व और शांति का मार्ग
अंत में, जयशंकर ने कहा कि दुनिया अब एक Multi-polar World यानी बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि 1945 में स्थापित की गई वैश्विक व्यवस्था अब नई वास्तविकताओं के सामने बदल रही है और इसमें सुधार की आवश्यकता है। एक बहुध्रुवीय व्यवस्था में सभ्य संवाद, व्यापक विचार-विमर्श और पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया का होना अनिवार्य है और उन्होंने जोर देकर कहा कि मानवता के एक बड़े हिस्से को वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रिया से बाहर नहीं रखा जा सकता। जयशंकर ने शांति, विकास और समृद्धि के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता को और मजबूत करने की अपील की। अपने संबोधन के समापन पर उन्होंने महात्मा गांधी के कालजयी संदेश को याद करते हुए कहा कि शांति का कोई रास्ता नहीं है, बल्कि शांति ही एकमात्र रास्ता है। यह संदेश दुनिया को युद्ध और संघर्ष छोड़कर सहयोग की राह पर चलने का आह्वान था।
