जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार आखिरकार संपन्न हो गया। श्रीनगर के लोक भवन में आयोजित एक गरिमामयी समारोह के दौरान जम्मू-कश्मीर में मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शपथ ग्रहण समारोह की अध्यक्षता की और नए मंत्रियों को पद तथा गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस विस्तार के साथ ही उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार के मंत्रिमंडल का स्वरूप अब और अधिक व्यापक हो गया है, हालांकि गठबंधन के लिहाज से इसमें कुछ राजनीतिक पेंच अभी भी बरकरार हैं।
श्रीनगर के लोक भवन में हुआ शपथ ग्रहण समारोह
श्रीनगर के लोक भवन में आयोजित इस शपथ ग्रहण समारोह में नेशनल कॉन्फ्रेंस के चार वरिष्ठ नेताओं ने आधिकारिक रूप से मंत्री पद की शपथ ली। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक-एक करके इन सभी नेताओं को शपथ दिलाई। वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति और नियमों के अनुसार जम्मू-कश्मीर मंत्रिमंडल में पहले 6 मंत्री थे, जबकि केंद्र शासित प्रदेश अधिनियम के प्रावधानों के तहत इसमें कुल 9 मंत्री हो सकते हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपने गठबंधन सहयोगी कांग्रेस के लिए मंत्रिमंडल में 3 सीटें आरक्षित रखी थीं, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने तब तक सरकार में शामिल होने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया है जब तक कि केंद्र शासित प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस नहीं मिल जाता है।
चार नए चेहरों को मिला मंत्रिमंडल में स्थान
इस मंत्रिमंडल विस्तार के तहत चार नए चेहरों को शासन में शामिल किया गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता अली मोहम्मद सागर, अल्ताफ अहमद कालू, शमीमा फिरदौस और मीर सैफुल्ला ने श्रीनगर राजभवन में नए मंत्रियों के रूप में शपथ ग्रहण की। राजनीतिक गलियारों और पार्टी सूत्रों का यह भी कहना है कि इस नए मंत्रिमंडल की आधिकारिक घोषणा और गठन के बाद पार्टी के भीतर या गठबंधन के स्तर पर कुछ मतभेद पैदा होने की संभावना से पूरी तरह इंकार नहीं किया जा सकता है। इन नए मंत्रियों को नेशनल कॉन्फ्रेंस लीडरशिप की ओर से ठीक एक रात पहले देर रात कॉल्स प्राप्त हुए थे, जिसके बाद उन्होंने इस शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लिया।
नए मंत्रियों का विस्तृत परिचय और निर्वाचन क्षेत्र
आज शपथ लेने वाले इन चार नए मंत्रियों का राजनीतिक सफर और उनके निर्वाचन क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण हैं। इनमें शमीमा फिरदौस शामिल हैं जो हब्बा कदल विधानसभा क्षेत्र से विधायक के रूप में चुनी गई हैं। दूसरे प्रमुख चेहरे अली मोहम्मद सागर हैं जो खानयार विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और पार्टी के अत्यंत वरिष्ठ नेता माने जाते हैं। तीसरे मंत्री अल्ताफ कालू हैं जो पहलगाम विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और विधायक के रूप में कार्यरत हैं। चौथे मंत्री मीर सैफुल्ला हैं जो कुपवाड़ा जिले के त्रेहगाम विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। कुपवाड़ा से चार बार के विधायक रहे सैफुल्लाह ने कैबिनेट में शामिल किए जाने पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रेसिडेंट के प्रति अपना विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया है।
उमर अब्दुल्ला सरकार के मंत्रिमंडल का वर्तमान स्वरूप
इस ताजा और महत्वपूर्ण मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब उमर अब्दुल्ला सरकार का मंत्रिमंडल पूरी तरह से आकार ले चुका है।
- उमर अब्दुल्ला जो कि मुख्यमंत्री के रूप में सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं।
- सुरिंदर चौधरी जो कि उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
- जावेद डार जो कैबिनेट में मंत्री के रूप में शामिल हैं।
- जावेद राणा जो कैबिनेट में मंत्री की भूमिका निभा रहे हैं।
- सकीना इटू जो मंत्रिमंडल में मंत्री के रूप में कार्य कर रही हैं।
- शमीमा फिरदौस जो हब्बा कदल से विधायक हैं और हाल ही में मंत्री बनी हैं।
- अली मोहम्मद सागर जो खानयार से विधायक हैं और हाल ही में शपथ ली है।
- अल्ताफ कालू जो पहलगाम से विधायक हैं और नए मंत्री बनाए गए हैं।
- मीर सैफुल्ला जो कुपवाड़ा के त्रेहगाम से विधायक हैं और नए मंत्री बने हैं।
कांग्रेस पार्टी का मंत्रिमंडल में शामिल होने से इनकार
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 90 सदस्यों की संख्या है। पुनर्गठन अधिनियम 2019 के प्रावधानों के अनुसार, विधानसभा की कुल सदस्य संख्या का केवल 10 प्रतिशत हिस्सा ही कैबिनेट का निर्माण कर सकता है। इस प्रकार मुख्यमंत्री को छोड़कर सरकार में अधिक से अधिक 8 मंत्रियों को शामिल किया जा सकता है। कांग्रेस पार्टी ने राज्य का दर्जा बहाल न होने की वजह से सरकार में शामिल होने से साफ मना कर दिया है। हालांकि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्थिति को संभालने के लिए एक दिन पहले ही जम्मू-कश्मीर कांग्रेस अध्यक्ष तारिक हामिद कर्रा से व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया था और उन्हें मंत्रिमंडल में उपयुक्त जगह देने का खुला ऑफर भी दिया था। यह जानकारी सामने आई है कि तारिक हामिद कर्रा ने सरकार में शामिल होने का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया, लेकिन साथ ही सरकार को अपना निरंतर समर्थन पूरी तरह से दोहराया है।
