करवा चौथ का पावन पर्व कल यानी 29 अक्टूबर को पूरे देश में बेहद उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। इस खास दिन पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की कामना के लिए पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। हालांकि यह त्योहार पूरे भारत में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन इसकी पूजा और जश्न मनाने के तौर-तरीके हर राज्य में एक-दूसरे से काफी अलग होते हैं। देश के हर इलाके की अपनी एक विशिष्ट और सुंदर परंपरा है, जो इस प्राचीन त्योहार के सांस्कृतिक महत्व को और अधिक बढ़ा देती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि भारत के विभिन्न राज्यों में करवा चौथ किस तरह से मनाया जाता है और वहां की मुख्य रस्में क्या हैं।
पंजाब राज्य में करवा चौथ के व्रत की शुरुआत एक बेहद खास और पारंपरिक तरीके से होती है। पंजाब की इस अनूठी परंपरा में सूरज के निकलने से ठीक पहले सास अपनी बहू को सरगी भेंट करती है। इस सरगी की थाली में ताजे फल, स्वादिष्ट मिठाइयां, फेनी और सुहाग से जुड़ा सारा सामान शामिल होता है। बहू अपनी सास द्वारा दी गई इस सरगी को ग्रहण करके ही अपने कठिन निर्जला व्रत की शुरुआत करती है। इसके अलावा, पंजाब की महिलाएं इस शुभ अवसर पर एक साथ मिलकर पारंपरिक लोकगीत गाती हैं और श्रद्धा के साथ करवा चौथ की कथा सुनती हैं, जिससे पर्व का उत्साह और अधिक बढ़ जाता है।
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की बात करें तो इन दोनों राज्यों के विभिन्न इलाकों में करवा चौथ का व्रत बहुत ही विधि-विधान और भव्यता के साथ मनाया जाता है। इन क्षेत्रों में घरों की दीवारों पर पारंपरिक रूप से गेरू का इस्तेमाल करके करवा माता, चंद्रमा और सूर्य की सुंदर आकृतियां बनाई जाती हैं। इसके बाद पूरी श्रद्धा के साथ इन्हीं बनाई गई आकृतियों की पूजा-अर्चना की जाती है। पूजा के दौरान यहां की महिलाएं एक-दूसरे के साथ अपना करवा बदल लेती हैं, जिसे आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे का एक बहुत बड़ा प्रतीक माना जाता है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भी शाम के समय करवा माता की पवित्र कथा सुनने का विशेष महत्व होता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस कथा को सुने बिना व्रत अधूरा रहता है और उसकी पूर्णता नहीं होती है।
भारतीय संस्कृति और उत्सवों की बात हो और राजस्थान का जिक्र न आए, ऐसा बिल्कुल भी संभव नहीं है। राजस्थान में करवा चौथ के त्योहार को बेहद अलग, अनूठे और पारंपरिक सांस्कृतिक तरीके से मनाया जाता है। वहां के कुछ विशेष इलाकों में महिलाएं पूजा के समय आम दिनों की तरह छलनी का उपयोग करने के बजाय घास या सींक से बनी हुई खास तीलियों का इस्तेमाल करती हैं और पूजा करते समय राजस्थान की महिलाएं बहुत सारे पारंपरिक आभूषण पहनती हैं और अपना पूरा सोलह शृंगार करती हैं, जो इस मरुभूमि के लोकजीवन की एक खूबसूरत तस्वीर पेश करता है।
महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कुछ चुनिंदा राज्यों में भी करवा चौथ के त्योहार को अब बहुत उत्साह के साथ मनाया जाने लगा है। हालांकि, इन दक्षिण भारतीय और पश्चिमी राज्यों में पारंपरिक रूप से करवा चौथ की जगह मंगला गौरी या अन्य स्थानीय व्रतों का चलन ज्यादा रहा है, लेकिन उत्तर भारतीय संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के कारण अब यहां की महिलाएं भी बड़े पैमाने पर इस व्रत को रखने लगी हैं। विशेष रूप से महाराष्ट्र की बात करें तो इस पावन दिन पर मिट्टी के करवे की विशेष रूप से पूजा की जाती है और व्रत के सभी नियमों का बहुत ही सख्ती के साथ पालन किया जाता है। महाराष्ट्र में महिलाएं इस व्रत के दौरान जगत के पालनहार भगवान शिव, माता पार्वती और प्रथम पूज्य भगवान गणेश जी की विधि-विधान से पूजा करती हैं और अपने परिवार के कल्याण की प्रार्थना करती हैं।
