केरल विधानसभा चुनाव: एनडीए सभी 140 सीटों पर लड़ेगा चुनाव, रणनीति तैयार

केरल विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए ने सभी 140 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है। भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में सीट बंटवारे और उम्मीदवारों के चयन पर विस्तृत चर्चा हुई। गठबंधन इस बार बिना किसी मुख्यमंत्री चेहरे के प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर चुनाव लड़ेगा।

केरल विधानसभा चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपनी चुनावी बिसात बिछा दी है। गठबंधन ने राज्य की सभी 140 विधानसभा सीटों पर पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। नई दिल्ली में आयोजित भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) की बैठक में केरल की प्रत्येक सीट के लिए विस्तृत प्रजेंटेशन दिया गया। इस बैठक में संभावित उम्मीदवारों के पैनल और सहयोगी दलों के साथ समन्वय पर गहन मंथन हुआ। गठबंधन का मुख्य उद्देश्य केरल में एक मजबूत तीसरी शक्ति के रूप में उभरना है।

सीट बंटवारे का गणित और सहयोगी दलों की भूमिका

बैठक में हुए विचार-विमर्श के अनुसार, भाजपा केरल में लगभग 100 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है। गठबंधन के अन्य प्रमुख सहयोगियों में '20-20' पार्टी और भारतीय जन धर्म सेना (BDJS) शामिल हैं। अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, भारतीय जन धर्म सेना को 25 से 30 सीटें दी जा सकती हैं, जबकि 20-20 पार्टी 10 से 15 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। पिछले चुनाव में भारतीय जन धर्म सेना ने 21 सीटों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। इसके अतिरिक्त, गठबंधन में कुछ छोटे क्षेत्रीय दल भी शामिल हैं जिनका प्रभाव विशिष्ट क्षेत्रों तक सीमित है। गठबंधन के नेताओं के अनुसार, सीटों की संख्या से अधिक महत्व उन सीटों पर जीत दर्ज करने की संभावना को दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री चेहरे के बिना चुनावी मैदान में एनडीए

इस बार के चुनाव में एनडीए ने एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव किया है। गठबंधन किसी भी नेता को मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में पेश नहीं करेगा और पिछले विधानसभा चुनाव में 'मेट्रो मैन' ई. श्रीधरन को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया था, लेकिन इस बार पूरी चुनावी कमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम और उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों के आधार पर संभाली जाएगी। पार्टी का मानना है कि केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास के एजेंडे को जनता के बीच ले जाना अधिक प्रभावी होगा और चुनावी पोस्टरों में प्रधानमंत्री मोदी के साथ प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर, 20-20 के प्रमुख साबू एम. जैकब और बीडीजेएस के प्रमुख टी. वेल्लापेल्ली की तस्वीरें प्रमुखता से दिखाई देंगी।

उम्मीदवारों के चयन में नई रणनीति और दलबदल

भाजपा ने इस बार उम्मीदवारों के चयन में 'जिताऊ' क्षमता को प्राथमिकता दी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, अन्य राजनीतिक दलों जैसे सीपीएम और कांग्रेस से आने वाले उन नेताओं को भी टिकट दिया जा सकता है जिनका अपने क्षेत्र में मजबूत जनाधार है। एनडीए उन चेहरों पर दांव लगाने की तैयारी में है जो अपने व्यक्तिगत प्रभाव से सीट निकालने की क्षमता रखते हैं। गठबंधन की रणनीति है कि केवल पारंपरिक कार्यकर्ताओं तक सीमित न रहकर व्यापक सामाजिक आधार वाले उम्मीदवारों को मैदान में उतारा जाए और साबू एम. जैकब और टी. वेल्लापेल्ली जैसे वरिष्ठ नेता स्वयं चुनाव नहीं लड़ेंगे, बल्कि पूरे राज्य में गठबंधन के पक्ष में प्रचार की कमान संभालेंगे।

स्थानीय निकाय चुनाव और जनसांख्यिकीय पहुंच

केरल में भाजपा के बढ़ते मनोबल के पीछे हालिया स्थानीय निकाय चुनावों के परिणाम हैं। तिरुवनंतपुरम में भाजपा का मेयर बनना पार्टी के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इसके साथ ही, एनडीए ने पिछले कुछ समय में ईसाई समुदाय के मतदाताओं के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए विशेष प्रयास किए हैं। पार्टी को उम्मीद है कि यदि विधानसभा चुनाव के परिणाम त्रिशंकु रहते हैं, तो एनडीए सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। विकास को मुख्य मुद्दा बनाकर गठबंधन राज्य के पारंपरिक राजनीतिक ध्रुवीकरण को तोड़ने का प्रयास कर रहा है।