Kota Gharial Sanctuary / कोटा को नए साल का 'बंपर' तोहफा: 40 हजार घरों के पट्टों का रास्ता साफ, चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य की पाबंदी हटी

कोटा के 1.5 लाख लोगों के लिए खुशखबरी है, क्योंकि हैंगिंग ब्रिज से कोटा बैराज तक का 732 हेक्टेयर इलाका चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य से मुक्त हो गया है. इससे शिवपुरा, सकतपुरा और किशोरपुरा सहित अन्य क्षेत्रों में 40 हजार से अधिक घरों को पट्टे मिल सकेंगे और रुके हुए निर्माण कार्य फिर से शुरू हो पाएंगे.

नए साल की शुरुआत कोटा शहर के लाखों निवासियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी लेकर आई है। लंबे समय से चंबल नदी किनारे बसे परिवारों की वर्षों पुरानी मांग आखिरकार पूरी हो गई। केंद्र सरकार ने राजस्थान सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए नेशनल चंबल घड़ियाल अभयारण्य की सीमाओं में बदलाव किया है। इसके तहत हैंगिंग ब्रिज से कोटा बैराज तक का करीब 732 हेक्टेयर क्षेत्र अभयारण्य की पाबंदियों से मुक्त कर दिया गया है।

यह फैसला कोटा शहर के तेजी से बढ़ते शहरीकरण को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। चंबल नदी किनारे बसे इलाकों में रहने वाले हजारों परिवारों को अब पट्टे जारी करने, निर्माण कार्य करने और संपत्ति के लेन-देन में कानूनी बाधाएं नहीं आएंगी। अनुमान है कि इस बदलाव से सीधे तौर पर 40 हजार से अधिक घरों को फायदा होगा, जहां सालों से विकास कार्य ठप पड़े थे।

मुक्त हुए प्रमुख क्षेत्र

वन विभाग द्वारा डिनोटिफाई किए गए 732 हेक्टेयर क्षेत्र में मुख्य रूप से निम्न इलाके शामिल हैं:

  • शिवपुरा: 320.33 हेक्टेयर
  • किशोरपुरा: 208.56 हेक्टेयर
  • सकतपुरा: 186.36 हेक्टेयर
  • नयागांव: 12.12 हेक्टेयर
  • गुमानपुरा: 3.93 हेक्टेयर
  • रामपुरा: 0.7 हेक्टेयर

इन क्षेत्रों में करीब 206 खसरा नंबरों पर लगा प्रतिबंध अब पूरी तरह हट गया है। इससे चंबल किनारे की कॉलोनियां, सरकारी संस्थान, स्कूल-कॉलेज और अन्य स्थापित संरचनाएं अब सामान्य शहरी विकास के दायरे में आ जाएंगी।

निवासियों को क्या-क्या फायदे मिलेंगे?

यह डिनोटिफिकेशन स्थानीय लोगों के लिए कई राहतें लेकर आया है:

  • अटके हुए पट्टे अब नगर निगम या अर्बन इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट (UIT) द्वारा जल्द जारी किए जा सकेंगे।
  • जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक हट जाएगी, जिससे संपत्ति बाजार में गतिविधि बढ़ेगी।
  • नए निर्माण या पुराने घरों की मरम्मत के लिए वन विभाग की अनुमति की जरूरत नहीं पड़ेगी।
  • सड़क, नाली, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास कार्य बिना किसी NOC के तेजी से पूरे हो सकेंगे।

कैसे हुई यह उपलब्धि?

चंबल घड़ियाल अभयारण्य की स्थापना 1979 में हुई थी, जिसके तहत नदी किनारे 1 किलोमीटर का दायरा प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया था। इससे कोटा शहर के बड़े हिस्से में विकास रुक गया था। राजस्थान सरकार ने शहरीकरण की जरूरतों को देखते हुए केंद्र से सीमा बदलाव का प्रस्ताव रखा। केंद्र की मंजूरी के बाद यह क्षेत्र अब अभयारण्य से बाहर हो गया है।

हालांकि, अभयारण्य का मुख्य हिस्सा बरकरार रहेगा, जहां घड़ियाल, मगरमच्छ, कछुए और अन्य जलीय जीवों का संरक्षण जारी रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करेगा, साथ ही शहर में सीवेज ट्रीटमेंट जैसे पर्यावरणीय उपायों को बढ़ावा देगा।

आगे की प्रक्रिया

स्थानीय प्रशासन जल्द ही पट्टा वितरण के लिए शिविर आयोजित करने की योजना बना रहा है। निवासी नगर निगम या UIT कार्यालय से संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं।

यह फैसला कोटा को विकास की मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। चंबल किनारे के निवासियों के लिए नया साल वाकई खुशियों भरा साबित हो रहा है!

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: क्या अब पुराने घर की मरम्मत संभव है? उत्तर: हां, अब सामान्य नगर निगम नियमों के तहत मरम्मत या निर्माण किया जा सकता है।

प्रश्न 2: पट्टे कब से मिलना शुरू होंगे? उत्तर: अधिसूचना के बाद जल्द ही प्रक्रिया शुरू होगी; स्थानीय निकाय शिविर लगाएंगे।

प्रश्न 3: क्या पूरा चंबल क्षेत्र मुक्त हो गया? उत्तर: नहीं, केवल निर्दिष्ट 732 हेक्टेयर रिहायशी हिस्सा ही मुक्त किया गया है; अभयारण्य का बाकी हिस्सा संरक्षित रहेगा।