‘CM बोले- आप कहाँ की विधायक हो?’, मंडावा विधायक रीटा चौधरी का छलका दर्द, सुनाया ये किस्सा

राजस्थान विधानसभा में मंडावा विधायक रीटा चौधरी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर विपक्ष की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने सदन में एक वाकया साझा किया जहां मुख्यमंत्री उन्हें पहचान नहीं पाए। चौधरी ने प्रशासन और मंत्रियों द्वारा फोन न उठाने और क्षेत्र की समस्याओं पर ध्यान न देने का मुद्दा भी उठाया।

राजस्थान विधानसभा में शनिवार को राजस्व विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान राजनीतिक माहौल गरमा गया। मंडावा से कांग्रेस विधायक रीटा चौधरी ने सदन के पटल पर अपनी बात रखते हुए राज्य सरकार और मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। विधायक ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के उस दावे को सीधे तौर पर चुनौती दी, जिसमें उन्होंने विपक्ष के विधायकों के प्रति सुलभ होने की बात कही थी। रीटा चौधरी ने सदन में एक व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार मुख्यमंत्री उन्हें पहचानने में असमर्थ रहे, जबकि उन्होंने स्वयं उन्हें मिलने का समय दिया था।

मुख्यमंत्री कार्यालय में मुलाकात का घटनाक्रम

विधायक रीटा चौधरी ने सदन को संबोधित करते हुए बताया कि जब भजनलाल शर्मा ने मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था, तब उन्होंने बजट और क्षेत्र की समस्याओं के संदर्भ में उनसे मिलने का समय मांगा था और विधायक के अनुसार, मुख्यमंत्री ने उन्हें दोपहर 1:00 बजे सचिवालय स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में बुलाया। चौधरी ने आरोप लगाया कि जब वे वहां पहुंचीं और मुख्यमंत्री के सामने बैठीं, तो मुख्यमंत्री ने उनसे पूछा कि वे कहां की विधायक हैं। विधायक ने कहा कि यह स्थिति उनके लिए आश्चर्यजनक थी क्योंकि मुख्यमंत्री ने स्वयं उन्हें समय दिया था, फिर भी वे उनकी पहचान से अनभिज्ञ थे और उन्होंने इसे विपक्ष के जनप्रतिनिधियों के प्रति सरकार की उदासीनता का उदाहरण बताया।

प्राथमिकता और कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप

सदन में अपनी बात जारी रखते हुए रीटा चौधरी ने मुख्यमंत्री कार्यालय में होने वाली बैठकों और वहां दी जाने वाली प्राथमिकताओं पर भी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि जब वे मुख्यमंत्री से मिलने गई थीं, तब वहां राजस्व मंत्री जोगाराम पटेल, देवी सिंह और नोक्षमा चौधरी जैसे सत्ता पक्ष के विधायक मौजूद थे। विधायक ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कार्यालय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े व्यक्तियों को अधिक महत्व दिया जा रहा था और वहां गीता उपदेश जैसे विषयों पर चर्चा चल रही थी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने पहले संघ के पदाधिकारियों और अपने मंत्रियों से मुलाकात की, जबकि विपक्ष की महिला विधायक होने के बावजूद उन्हें सबसे अंत में समय दिया गया।

प्रशासनिक अधिकारियों और मंत्रियों की उदासीनता

रीटा चौधरी ने केवल मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि जिले के प्रभारी मंत्री और स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने सदन में कहा कि मंडावा क्षेत्र की समस्याओं को लेकर उन्होंने कई बार प्रभारी मंत्री को फोन किया, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। विधायक ने झुंझुनूं जिला कलेक्टर पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि स्थानीय प्रशासन जनहित के मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रहा है। उन्होंने विशेष रूप से मंडावा की ऐतिहासिक हवेलियों पर हो रहे अवैध कब्जों का मुद्दा उठाया और कहा कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

मंडावा की विरासत और राजनीतिक पृष्ठभूमि

रीटा चौधरी राजस्थान की राजनीति में एक स्थापित नाम हैं और वे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दिवंगत रामनारायण चौधरी की पुत्री हैं। वे मंडावा विधानसभा क्षेत्र से तीसरी बार विधायक चुनी गई हैं। उन्होंने 2008 में पहली बार जीत हासिल की थी, जिसके बाद 2019 के उपचुनाव और फिर 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखा। शेखावाटी क्षेत्र में जाट समुदाय और किसानों के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। मंडावा, जो अपनी ऐतिहासिक हवेलियों और पर्यटन के लिए विश्व प्रसिद्ध है, वहां के संरक्षण और विकास के मुद्दों पर वे लगातार मुखर रही हैं।

विपक्ष की भूमिका और सदन की कार्यवाही

विधानसभा में राजस्व विभाग की अनुदान मांगों पर बहस के दौरान विपक्ष ने सरकार को विभिन्न मोर्चों पर घेरने का प्रयास किया। रीटा चौधरी के संबोधन ने सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संवाद की स्थिति पर नई बहस छेड़ दी है। विधायक ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले की सरकारों में विपक्ष के विधायकों को प्राथमिकता दी जाती थी ताकि लोकतांत्रिक मर्यादा बनी रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक विधायक के रूप में वे अपने व्यक्तिगत कार्यों के लिए नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार से सहयोग की अपेक्षा रखती हैं और सदन में उनके इस बयान के बाद सत्ता पक्ष के सदस्यों ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं दीं, जिससे कार्यवाही के दौरान काफी गहमागहमी देखी गई।

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