Bihar News / पटना में प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज- कन्हैया कुमार समेत कई कांग्रेस कार्यकर्ता हिरासत मे

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने 'पलायन रोको, नौकरी दो' पदयात्रा शुरू की है। NSUI के राष्ट्रीय प्रभारी कन्हैया कुमार के नेतृत्व में यह यात्रा निकाली जा रही है। मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने पर पुलिस से झड़प हुई, जिसके बाद कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।

Bihar News: बिहार में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। हर दल मतदाताओं को लुभाने के लिए अपनी रणनीतियों को अमल में ला रहा है। इसी कड़ी में कांग्रेस पार्टी ने राज्य में एक अहम मुद्दे—बेरोजगारी और युवाओं के पलायन—को लेकर 'पलायन रोको, नौकरी दो' नामक पदयात्रा की शुरुआत की है।

इस पदयात्रा का नेतृत्व NSUI (नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया) के राष्ट्रीय प्रभारी और पूर्व छात्र नेता कन्हैया कुमार कर रहे हैं। यात्रा का उद्देश्य राज्य सरकार पर युवाओं की बेरोजगारी और पलायन को लेकर दबाव बनाना है। कांग्रेस का कहना है कि बिहार की सरकार रोजगार के पर्याप्त अवसर देने में असफल रही है, जिसके कारण लाखों युवा बेहतर भविष्य की तलाश में अन्य राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं।

पदयात्रा के दौरान शुक्रवार को स्थिति उस वक्त तनावपूर्ण हो गई जब कन्हैया कुमार और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने की कोशिश की। इस प्रयास को पुलिस ने रोक दिया, जिसके बाद कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हो गई। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया और कन्हैया कुमार समेत कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। उन्हें बाद में पटना के कोतवाली थाना ले जाया गया।

कांग्रेस पार्टी ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई सरकार की असहिष्णुता को दर्शाती है। वहीं, प्रशासन का तर्क है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना पड़ा।

बिहार की राजनीति में यह घटनाक्रम निश्चित तौर पर बड़ा संदेश देता है। एक ओर यह विपक्ष की सक्रियता को दर्शाता है, वहीं यह भी दर्शाता है कि आने वाले चुनाव में 'रोजगार' और 'पलायन' जैसे मुद्दे निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

देखना यह होगा कि कांग्रेस की यह रणनीति युवाओं और मतदाताओं को कितना प्रभावित कर पाती है और क्या यह बिहार की सियासत में कोई ठोस बदलाव लाने में सक्षम होगी।

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