Hijab Controversy / हिजाब विवाद के बाद डॉक्टर नुसरत परवीन ने ज्वाइन की नौकरी, सीएम नीतीश से जुड़ा था मामला

बिहार में हिजाब विवाद के बाद सुर्खियों में आईं डॉक्टर नुसरत परवीन ने 7 जनवरी को अपनी नौकरी ज्वाइन कर ली है। उन्होंने सीधे विभाग में पहुंचकर जॉइनिंग की। यह वही मामला है जिसमें सीएम नीतीश कुमार पर उनका हिजाब खींचने का आरोप लगा था, जिस पर काफी राजनीतिक बवाल मचा था।

बिहार में एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक विवाद का केंद्र बनीं डॉक्टर नुसरत परवीन ने आखिरकार अपनी सरकारी नौकरी ज्वाइन कर ली है। यह घटनाक्रम 7 जनवरी को सामने आया, जब नुसरत परवीन ने सीधे संबंधित विभाग में पहुंचकर अपनी जॉइनिंग प्रक्रिया पूरी की। यह मामला पिछले महीने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा कथित तौर पर उनका हिजाब खींचने के बाद। सुर्खियों में आया था, जिसके बाद राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं।

जॉइनिंग की प्रक्रिया और तारीखें

डॉक्टर नुसरत परवीन की जॉइनिंग की मूल अंतिम तिथि 20 दिसंबर निर्धारित की गई थी। हालांकि, विभिन्न कारणों से, इस तिथि को पहले 31 दिसंबर तक बढ़ाया गया और फिर अंततः 7 जनवरी तक विस्तारित किया गया। सिविल सर्जन ने नुसरत की जॉइनिंग की पुष्टि की है, लेकिन उनकी वर्तमान लोकेशन के बारे में कोई सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है। जिस अस्पताल में उनकी पोस्टिंग हुई है, वहां भी वह अभी तक नहीं पहुंची हैं। इससे पहले ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि महिला डॉक्टर ने ड्यूटी ज्वाइन करने से इनकार कर दिया है, हालांकि परवीन ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया था। इस बीच, झारखंड सरकार ने भी नुसरत परवीन को सरकारी नौकरी का प्रस्ताव दिया था, जिससे इस मामले की जटिलता और बढ़ गई थी।

विवाद की जड़: सीएम नीतीश कुमार और हिजाब प्रकरण

यह पूरा विवाद पिछले महीने 15 दिसंबर 2025 को उस समय शुरू हुआ, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक कार्यक्रम में अपॉइंटमेंट लेटर बांट रहे थे। इसी दौरान, कथित तौर पर उन्होंने डॉक्टर परवीन का हिजाब खींच लिया था। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में नीतीश कुमार को एक आधिकारिक दस्तावेज़ हाथ में लिए और कुछ अन्य अधिकारियों के साथ, डॉक्टर के पहने हुए कपड़ों की ओर इशारा करते हुए देखा गया। वीडियो में उन्हें डॉक्टर से उसे हटाने के लिए कहते हुए भी सुना गया। इससे पहले कि डॉक्टर परवीन कोई प्रतिक्रिया दे पातीं, नीतीश कुमार ने अपना हाथ बढ़ाया और उनका हिजाब नीचे खींच दिया और इस दौरान उनके बगल में खड़े एक मंत्री उन्हें रोकने की हल्की कोशिश करते दिखे, जबकि मंच पर मौजूद दूसरे लोग हंसते हुए दिखाई दिए।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आरोप-प्रत्यारोप

इस घटना के तुरंत बाद, बिहार की राजनीति में भूचाल आ गया। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इस कृत्य को महिला गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया। विपक्षी नेताओं ने नीतीश कुमार से सार्वजनिक माफी की मांग की और इसे एक असंवेदनशील व्यवहार करार दिया। दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह सहित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने नीतीश कुमार का बचाव किया। उन्होंने तर्क दिया कि मुख्यमंत्री ने कुछ भी गलत नहीं किया था और उनका इरादा किसी को अपमानित करना नहीं था। एनडीए नेताओं ने इसे एक सामान्य घटना के रूप में पेश करने। की कोशिश की, जिसे अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दिया जा रहा था। यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। वीडियो क्लिप्स और तस्वीरें विभिन्न प्लेटफार्मों पर साझा की गईं, जिससे सार्वजनिक बहस छिड़ गई। कई लोगों ने मुख्यमंत्री के व्यवहार पर सवाल उठाए, जबकि कुछ ने उनके बचाव में तर्क दिए। इस वायरल वीडियो ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया, जिससे डॉक्टर नुसरत परवीन एक अनजाने विवाद का चेहरा बन गईं। इस घटना ने बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ दिया, जहां धार्मिक पहचान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिली।

आगे की राह और अनिश्चितताएं

डॉक्टर नुसरत परवीन द्वारा नौकरी ज्वाइन करने के बाद भी, उनकी वर्तमान स्थिति और लोकेशन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यह देखना बाकी है कि वह कब अपनी पोस्टिंग वाले अस्पताल में रिपोर्ट करती हैं और इस पूरे प्रकरण पर उनकी क्या प्रतिक्रिया होती है। इस घटना ने बिहार में राजनीतिक और सामाजिक विमर्श को गहरा कर दिया है, और इसके दीर्घकालिक प्रभाव क्या होंगे, यह समय ही बताएगा।