'भारत कभी नेपाल या बांग्लादेश नहीं बन सकता', मौलाना रजवी ने योगी सरकार की कानून-व्यवस्था को सराहा

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि भारत की स्थिति कभी नेपाल, बांग्लादेश या श्रीलंका जैसी नहीं हो सकती। उन्होंने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की कानून-व्यवस्था की प्रशंसा की और विदेशी तत्वों की जांच की मांग की।

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने भारत की आंतरिक सुरक्षा और स्थिरता को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उत्तर प्रदेश के बरेली में शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए मौलाना रजवी ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत कभी भी नेपाल, बांग्लादेश या श्रीलंका जैसा नहीं बन सकता। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब पड़ोसी देशों में राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता का माहौल देखा गया है। मौलाना ने जोर देकर कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचा इतना मजबूत है कि यहां उन देशों जैसी स्थिति पैदा होने की कोई संभावना नहीं है।

विदेशी तत्वों की जांच की मांग

मौलाना रजवी ने अपने संबोधन के दौरान एक महत्वपूर्ण चिंता जताई। उन्होंने सरकार से उन लोगों की गहन जांच कराने की मांग की जो विदेशों से भारत आकर यहां होने वाले विरोध-प्रदर्शनों में हिस्सा ले रहे हैं। मौलाना का मानना है कि बाहर से आकर प्रदर्शनों में शामिल होने वाले लोगों के इरादों और उनकी पृष्ठभूमि की जांच करना राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि भारत कभी नेपाल, बांग्लादेश या श्रीलंका नहीं बन सकता और सरकार को उन बाहरी तत्वों पर नजर रखनी चाहिए जो यहां के माहौल को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं।

योगी सरकार की कानून-व्यवस्था की सराहना

उत्तर प्रदेश की वर्तमान स्थिति पर चर्चा करते हुए मौलाना रजवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार की जमकर तारीफ की। उन्होंने दावा किया कि योगी सरकार के कार्यकाल में प्रदेश की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था काफी सख्त रही है। मौलाना ने कहा कि बहराइच और संभल की छिटपुट घटनाओं को अगर छोड़ दिया जाए, तो मौजूदा सरकार के पूरे कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में हिंसा की कोई दूसरी बड़ी घटना नहीं हुई है। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी की सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव के शासनकाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति अत्यंत खराब थी और जनता असुरक्षित महसूस करती थी।

जंतर-मंतर प्रदर्शन और मुस्लिम युवाओं को सलाह

मौलाना रजवी का यह ताजा बयान जंतर-मंतर पर प्रस्तावित एक प्रदर्शन को लेकर उनकी पिछली अपील के कुछ दिनों बाद आया है। उन्होंने मुस्लिम युवाओं से 10 अक्टूबर को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित प्रदर्शन से दूर रहने का आग्रह किया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित था। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाया था। मौलाना रजवी ने हिंसा की आशंका जताते हुए विशेष रूप से दिल्ली और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले मुस्लिम युवाओं को इस प्रदर्शन में शामिल न होने की सलाह दी थी।

लोकतांत्रिक अधिकार और हिंसा का खतरा

अपनी अपील में मौलाना रजवी ने यह भी स्पष्ट किया कि विरोध-प्रदर्शन करना हर नागरिक का कानूनी और लोकतांत्रिक अधिकार है। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि यदि ये प्रदर्शन हिंसक रूप ले लेते हैं, तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। उन्होंने कहा कि हिंसा होने से आम लोगों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं और सामाजिक ताना-बाना प्रभावित होता है। मौलाना ने नेहा बोरा के उस बयान का भी संदर्भ दिया जिसमें उन्होंने बांग्लादेश के प्रदर्शनों को जेन-जी के लिए एक रास्ता बताया था, साथ ही उन्होंने प्रशांत भूषण द्वारा 'रिजीम चेंज' को लेकर दिए गए बयानों का भी जिक्र किया। इन उदाहरणों के माध्यम से मौलाना रजवी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि भारत की संप्रभुता और शांति को किसी भी बाहरी या आंतरिक उकसावे से सुरक्षित रखना आवश्यक है।