बांग्लादेश में बड़ा बवाल: यूनिवर्सिटी में मंदिर के सामने गाय काटकर पकाया

बांग्लादेश की राजधानी ढाका स्थित जगन्नाथ यूनिवर्सिटी में नवरात्रि के दौरान मुस्लिम छात्र संगठनों ने परिसर में स्थित मंदिर के पास 2 गायों की कुर्बानी दी और गौमांस पकाया। हिंदू संगठनों के विरोध के बावजूद प्रशासन इसे रोकने में नाकाम रहा, जिससे तनाव फैल गया है।

बांग्लादेश की राजधानी ढाका स्थित जगन्नाथ यूनिवर्सिटी के भीतर नवरात्रि के पावन पर्व के मौके पर मुस्लिम छात्र संगठनों द्वारा दो गायों की कुर्बानी देने और मंदिर के समीप गौमांस पकाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घटना के सामने आने के बाद पूरे ढाका में भारी बवाल मचा हुआ है और हिंदू संगठन इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ यूनिवर्सिटी का प्रशासन तमाम अपीलों और कवायदों के बावजूद इस भड़काऊ कृत्य को रोकने में पूरी तरह विफल साबित हुआ है।

12 अक्टूबर से शुरू हुआ विवाद

बीबीसी बांग्ला की रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे विवाद की शुरुआत 12 अक्टूबर को घटी एक घटना के बाद हुई थी। उस दिन कुछ मुस्लिम संगठनों ने विश्वविद्यालय परिसर के भीतर बने एक हिंदू मंदिर के ठीक सामने गौमांस के साथ बिरयानी पकाई थी। इस हरकत का हिंदू संगठनों ने कड़ा विरोध जताया और अपनी गहरी आपत्ति दर्ज कराई थी।

हिंदू संगठनों के विरोध के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने परिसर में एक आधिकारिक नोटिस जारी किया। इस नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया कि विश्वविद्यालय के भीतर इस प्रकार का कृत्य पूरी तरह गलत है। हालांकि प्रशासन द्वारा नोटिस चस्पा किए जाने के बाद मुस्लिम छात्र संगठनों के तेवर और आक्रामक हो गए और उन्होंने खुलेआम यूनिवर्सिटी के भीतर ही गाय काटने का ऐलान कर दिया।

मजलिस संगठन ने जुटाया चंदा, खरीदी 2 गायें

प्रशासन की चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों ने गौहत्या को अंजाम देने के लिए बाकायदा चंदा जुटाने का अभियान शुरू किया। इस पूरे अभियान की अगुवाई मजलिस नामक एक संगठन ने की। इस संगठन ने प्रत्येक छात्र से 50 रुपये का चंदा एकत्र किया। छात्रों से जुटाए गए चंदे के पैसों से एक गाय खरीदी गई, जबकि एक अन्य मुस्लिम संगठन ने छात्रों को दूसरी गाय खरीदकर दान में दे दी।

विश्वविद्यालय प्रशासन की पुष्टि के अनुसार, इन दोनों गायों को जगन्नाथ यूनिवर्सिटी के भीतर ही काटा गया। इसके बाद छात्रों ने मंदिर के नजदीक ही उस मांस को पकाया और खाया और इस पूरी घटना के सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन और वहां की सरकार पूरी तरह बैकफुट पर नजर आ रही है।

सरकार की चुप्पी और प्रशासन की लाचारी

इस संवेदनशील घटनाक्रम को लेकर बांग्लादेश की सरकार ने अब तक कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। वहीं लाचार दिख रहे यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि मौके पर कोई हिंसक विवाद या टकराव नहीं हुआ था, इसलिए वे इस मामले में कुछ नहीं कर सकते हैं। प्रशासनिक निष्क्रियता को लेकर भी लोगों में भारी गुस्सा देखा जा रहा है।

तख्तापलट के बाद हिंदुओं में बढ़ती असुरक्षा

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की कुल आबादी 8 प्रतिशत से अधिक है। शेख हसीना के शासनकाल में हिंदू समुदाय स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहा था, लेकिन शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से ही वहां हिंदुओं पर निरंतर हमले हो रहे हैं और आवामी लीग के अनुसार, बांग्लादेश में इस वर्ष दुर्गा पूजा के दौरान लगभग 34 स्थानों पर मूर्तियों और पूजा पंडालों को खंडित किए जाने की सूचनाएं दर्ज की गई हैं।

खुद शेख हसीना ने इस पूरे घटनाक्रम पर बयान जारी करते हुए इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। हसीना का स्पष्ट कहना है कि बांग्लादेश में तारिक रहमान की सरकार आने के बाद से अल्पसंख्यकों पर अत्याचारों में भारी वृद्धि हुई है और उनकी सुरक्षा गंभीर खतरे में पड़ चुकी है।