उत्तर भारत के कई राज्यों में 25 मई 2026 से शुरू हो रहा नौतपा इस बार लोगों पर बहुत भारी पड़ सकता है। मौसम विभाग द्वारा जारी की गई ताजा चेतावनी के अनुसार, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और बिहार जैसे राज्यों में तापमान 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। यह नौ दिनों की अवधि, जिसे नौतपा के नाम से जाना जाता है, इस साल 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक चलेगी। इस दौरान गर्मी अपने चरम पर रहने वाली है और सूरज की तपिश लोगों का जीना मुश्किल कर देगी। हर साल नौतपा की तारीख बदलती रहती है और इन नौ दिनों में सूरज इतना तेज चमकता है कि दिन के समय सड़कें भट्टी की तरह तपती हैं और रात में भी उमस के कारण राहत नहीं मिलती।
रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार गर्मी ने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। नौतपा शुरू होने से पहले ही कई राज्यों में पारा सामान्य से काफी ऊपर दर्ज किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में स्थिति काफी गंभीर है, जहां तापमान पहले ही 48 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है। वहीं, देश की राजधानी दिल्ली में भी पारा 47 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। मौसम विभाग ने बताया कि आने वाले दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। इन नौ दिनों में सूरज की किरणें इतनी सीधी और तेज होंगी कि दोपहर के समय बाहर निकलना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
नौतपा में भीषण गर्मी के पीछे के वैज्ञानिक कारण
हर साल मई के अंत और जून की शुरुआत में पड़ने वाला नौतपा अपने साथ भीषण गर्मी लेकर आता है। इसके पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कारण भी जिम्मेदार हैं और वैज्ञानिकों के अनुसार, पृथ्वी और सूरज की विशेष स्थिति इस गर्मी को चरम पर पहुंचा देती है। 5 डिग्री झुकी हुई है और इस समय के दौरान सूर्य कर्क रेखा के ठीक ऊपर पहुंच जाता है। इस वजह से उत्तरी गोलार्ध, विशेषकर भारत के मैदानी इलाकों में सूर्य की किरणें बिल्कुल सीधी और अत्यधिक तीव्रता के साथ पड़ती हैं।
इसके अलावा, यह समय साल के सबसे लंबे दिनों में शामिल होता है। सूरज सुबह जल्दी उदय होता है और देर शाम तक आसमान में बना रहता है। लगातार कई घंटों तक पड़ने वाली तेज धूप जमीन को बहुत ज्यादा गर्म कर देती है। यही कारण है कि रात के समय भी तापमान 30 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहता है, जिससे वातावरण ठंडा नहीं हो पाता और लोगों को गर्मी से कोई राहत नहीं मिल पाती है।
सूखी जमीन, लू और बादलों की अनुपस्थिति
लगातार बढ़ती गर्मी के कारण जमीन के अंदर की नमी लगभग पूरी तरह खत्म हो जाती है और सूखी मिट्टी नमी वाली मिट्टी की तुलना में बहुत तेजी से गर्म होती है और वातावरण में गर्मी फैलाती है। इसी दौरान राजस्थान और अन्य रेगिस्तानी इलाकों से आने वाली गर्म पछुआ हवाएं, जिन्हें लू कहा जाता है, उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों को झुलसा देती हैं। ये हवाएं तापमान को और अधिक बढ़ाने का काम करती हैं। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, ऊपरी वायुमंडल में हवा का दबाव नीचे की ओर बना रहता है, जिससे बादल नहीं बन पाते और बारिश की कोई संभावना नहीं रहती, जिससे सूरज का प्रभाव सीधा और तीखा बना रहता है।
उमस और हीट इंडेक्स का बढ़ता प्रभाव
नौतपा के दौरान केवल तापमान ही नहीं, बल्कि उमस भी लोगों की परेशानी का बड़ा कारण बनती है। इसी समय दक्षिण-पश्चिम मानसून की तैयारी शुरू होती है और बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर से नमी भरी हवाएं उत्तर भारत की ओर बढ़ने लगती हैं और इन हवाओं में नमी की मात्रा बहुत अधिक होती है, लेकिन ये बारिश करने में सक्षम नहीं होतीं। हवा में मौजूद यह नमी पसीने को सूखने नहीं देती, जिससे शरीर को वास्तविक तापमान से कहीं ज्यादा गर्मी महसूस होती है। इसे वैज्ञानिक भाषा में हीट इंडेक्स कहा जाता है। उदाहरण के तौर पर, यदि तापमान 45 डिग्री है और नमी 60 से 70 प्रतिशत है, तो इंसान को 50 से 55 डिग्री तक की गर्मी महसूस हो सकती है।
स्वास्थ्य पर प्रभाव और मानसून का इंतजार
भीषण गर्मी और उमस का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है और डॉक्टरों के अनुसार, नौतपा के दौरान हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, थकान और चक्कर आने जैसी समस्याएं बहुत तेजी से बढ़ती हैं। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि नौतपा खत्म होने के बाद ही राहत की उम्मीद की जा सकती है, जब दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल में दस्तक देता है और धीरे-धीरे पूरे देश में फैलता है। मानसून की पहली बारिश के बाद ही तापमान में गिरावट आती है और तपती जमीन को ठंडक मिलती है।
