जून का महीना शुरू होते ही हमारी आर्थिक जिंदगी से जुड़े कई अहम नियम बदल रहे हैं जिनका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है। यह बदलाव टैक्स भुगतान से लेकर बैंकिंग और शेयर बाजार तक फैले हुए हैं। यदि आप नौकरीपेशा हैं, नियमित रूप से टैक्स भरते हैं, शेयर बाजार में निवेश करते हैं या फिर रोजमर्रा के कामों के लिए डिजिटल पेमेंट का सहारा लेते हैं, तो यह महीना आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। बैंकिंग शुल्कों में वृद्धि से लेकर टैक्स जमा करने की समय सीमा तक, कई नए नियम अब प्रभावी हो रहे हैं। एक जागरूक उपभोक्ता के तौर पर यह समझना जरूरी है कि इन बदलावों का आपके मासिक बजट और वित्तीय योजना पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
एडवांस टैक्स की समय सीमा और नए नियम
टैक्स भरने वाले नागरिकों के लिए 15 जून की तारीख बहुत महत्वपूर्ण है। जिन करदाताओं की अनुमानित टैक्स देनदारी 10000 रुपये से अधिक है, उन्हें वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने एडवांस टैक्स की पहली किस्त इसी तारीख तक जमा करनी होगी। नियम के अनुसार, इस समय सीमा तक कुल अनुमानित टैक्स का कम से कम 15 प्रतिशत हिस्सा चुकाना अनिवार्य है। यह पहली बार है जब यह एडवांस किस्त पूरी तरह से नए आयकर अधिनियम 2025 और आयकर नियम 2026 के प्रावधानों के तहत जमा की जाएगी। यदि कोई करदाता इस डेडलाइन तक भुगतान करने में विफल रहता है, तो उसे बकाया राशि पर हर महीने 1 प्रतिशत का अतिरिक्त ब्याज देना पड़ सकता है।
पुरानी टैक्स व्यवस्था में मिली बड़ी राहत
पुरानी टैक्स व्यवस्था का विकल्प चुनने वाले वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए जून का महीना कुछ अच्छी खबरें लेकर आया है। सरकार ने कुछ भत्तों पर मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा में बढ़ोतरी की है और अब हॉस्टल भत्ते पर मिलने वाली टैक्स छूट को बढ़ाकर 9000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। इसके साथ ही बच्चों की शिक्षा के लिए मिलने वाला भत्ता भी 100 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति बच्चा प्रति माह कर दिया गया है। एक और बड़ा बदलाव यह है कि बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे प्रमुख शहरों को अब 50 प्रतिशत एचआरए छूट वाली श्रेणी में शामिल कर लिया गया है। इससे इन शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को टैक्स में बड़ी बचत करने का मौका मिलेगा।
यूपीआई भुगतान और बैंकिंग सुरक्षा
डिजिटल लेनदेन को सुरक्षित बनाने की दिशा में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने एक नया फीचर पेश किया है। अब जब भी आप किसी का क्यूआर कोड स्कैन करेंगे या मोबाइल नंबर के जरिए पैसे भेजेंगे, तो स्क्रीन पर उस व्यक्ति का बैंक में दर्ज सत्यापित नाम दिखाई देगा। इससे गलत पहचान बताकर की जाने वाली ऑनलाइन धोखाधड़ी पर लगाम लगेगी। इसके अलावा, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) भी अब यूपीआई के माध्यम से पीएफ का पैसा तुरंत निकालने की सुविधा का परीक्षण कर रहा है। इस सुविधा के शुरू होने से कर्मचारियों को जरूरत के समय उनका पैसा बहुत तेजी से मिल सकेगा।
क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल पर बढ़ेगा खर्च
क्रेडिट कार्ड का उपयोग करने वाले ग्राहकों के लिए यह महीना थोड़ा महंगा साबित हो सकता है। कोटक महिंद्रा बैंक ने यूटिलिटी बिल, ईंधन और किराए के भुगतान जैसे खर्चों पर मिलने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स की सीमा तय कर दी है। अब क्रेडिट कार्ड से किराए या शिक्षा शुल्क का भुगतान करने पर 1 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क देना होगा। बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी घोषणा की है कि 23 जून से उसके वन को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड पर बकाया राशि की ब्याज दर 3 दशमलव 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 3 दशमलव 75 प्रतिशत प्रति माह कर दी जाएगी। आईसीआईसीआई बैंक भी 18 जून से अमेजन पे क्रेडिट कार्ड के जरिए किराया चुकाने पर मिलने वाला 1 प्रतिशत का रिवॉर्ड बेनिफिट बंद कर रहा है। एचडीएफसी बैंक के ग्राहकों को ध्यान देना चाहिए कि 25 जून से उन्हें 100 रुपये से ऊपर के यूपीआई भुगतान और 500 रुपये से अधिक की प्राप्ति पर ही एसएमएस अलर्ट मिलेंगे, हालांकि ईमेल पर सभी जानकारी मिलती रहेगी।
शेयर बाजार में मार्जिन के कड़े नियम
शेयर बाजार के फ्यूचर एंड ऑप्शन (F&O) सेगमेंट में सक्रिय ट्रेडर्स के लिए सेबी का 50:50 मार्जिन नियम अब पूरी तरह से लागू हो गया है। इस नए नियम के अनुसार, निवेशकों को अपने कुल ट्रेडिंग मार्जिन का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा नकद या नकद के समान साधनों में रखना अनिवार्य होगा। अब निवेशक केवल अपने शेयरों को गिरवी रखकर पूरा मार्जिन प्राप्त नहीं कर सकेंगे। सेबी का यह कदम बाजार में जोखिम प्रबंधन को मजबूत करने और निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए नए मानक
पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा अपनाने वालों के लिए भी सरकार ने नया नियम लागू किया है। अब सरकारी सब्सिडी या नेट मीटरिंग का लाभ लेने वाले सभी सोलर प्रोजेक्ट्स में केवल एएलएमएम (ALMM) सूची में शामिल सोलर मॉड्यूल का उपयोग करना ही अनिवार्य होगा। सरकार का उद्देश्य घरेलू सौर उपकरण निर्माण को बढ़ावा देना है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस नियम के कारण शुरुआती दौर में घरों में सोलर सिस्टम लगवाने की लागत में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है।
