ऑपरेशन सिंदूर पर बोले NSA अजीत डोभाल भारत की सहनशीलता को कमजोरी न समझें

एनएसए अजीत डोभाल ने ऑपरेशन सिंदूर पर पहली बार बयान देते हुए कहा है कि भारत की उदारता को कमजोरी नहीं समझना चाहिए। उन्होंने बताया कि 88 घंटे चले इस सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य पहलगाम आतंकी हमले के जिम्मेदार दुश्मन के कैंपों को नष्ट करना था।

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने एक कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि भारत की उदारता और सहनशीलता को किसी भी स्थिति में उसकी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। ऑपरेशन सिंदूर पर पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ते हुए डोभाल ने स्पष्ट किया कि देश बड़े जोखिम उठाने और कड़ा प्रहार करने में सक्षम है, चाहे उसके नतीजे कुछ भी हों। उन्होंने यह बातें डिस्कवरी की आगामी डॉक्यूमेंट्री सीरीज डिक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर में चर्चा के दौरान कहीं। डोभाल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश अपनी सुरक्षा नीतियों और जवाबी कार्रवाई की क्षमताओं को दुनिया के सामने मजबूती से रख रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर का मुख्य उद्देश्य और संकल्प

अजीत डोभाल ने बताया कि 88 घंटे तक चले इस गहन सैन्य अभियान का एकमात्र मकसद दुश्मन के उन ठिकानों और कैंपों को पूरी तरह नष्ट करना था, जहां से भारत के खिलाफ साजिशें रची जा रही थीं। उन्होंने विशेष रूप से उन कैंपों का उल्लेख किया जो पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार थे। डोभाल ने साक्षात्कार में कहा कि दुनिया के लिए संदेश बहुत साफ है कि भारत की सहनशीलता की एक सीमा है और जब राष्ट्रीय सुरक्षा की बात आती है, तो भारत पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सैन्य जवाबी कार्रवाई के पीछे लिए गए फैसले देश के अटूट संकल्प को दर्शाते हैं।

पहलगाम आतंकी हमला और जवाबी कार्रवाई की पृष्ठभूमि

ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत पिछले साल 7 मई की सुबह हुई थी, लेकिन इसकी नींव 22 अप्रैल को हुए उस घातक आतंकी हमले के बाद पड़ी थी जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। पहलगाम में हुए उस हमले में 26 निर्दोष नागरिक मारे गए थे। इस हमले का बदला लेने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थित कई आतंकी ठिकानों पर सटीक और प्रभावी हमले किए। इन हमलों के बाद पाकिस्तान ने भी भारत के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की कोशिश की, जिसके बाद भारत द्वारा की गई सभी रक्षात्मक और आक्रामक कार्रवाइयां ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा बनीं।

88 घंटे का सैन्य संघर्ष और समझौता

परमाणु हथियार संपन्न इन दो पड़ोसी देशों के बीच यह सैन्य संघर्ष लगभग 88 घंटे तक चला। 7 मई की सुबह शुरू हुआ यह ऑपरेशन 10 मई की शाम को तब जाकर रुका जब दोनों पक्ष एक समझौते पर पहुंचे। इस दौरान भारतीय सुरक्षा बलों ने अपनी रणनीतिक श्रेष्ठता का प्रदर्शन किया। डोभाल ने इस बात को रेखांकित किया कि भारत किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है और उसकी शांति की इच्छा को उसकी अक्षमता नहीं माना जाना चाहिए और यह ऑपरेशन भारतीय सैन्य इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हुआ है, जो त्वरित और प्रभावी जवाबी कार्रवाई की मिसाल पेश करता है।

डॉक्यूमेंट्री सीरीज में दिखेगी पूरी कहानी

डिस्कवरी द्वारा तैयार की गई दो हिस्सों वाली यह डॉक्यूमेंट्री सीरीज भारत के सैन्य और राष्ट्रीय सुरक्षा नेतृत्व को एक मंच पर लाती है और इसमें उन अधिकारियों और रणनीतिकारों के सीधे अनुभव शामिल किए गए हैं जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की पूरी निगरानी की थी। शो में डोभाल उन महत्वपूर्ण क्षणों और फैसलों के बारे में विस्तार से बताते हैं जिन्होंने इस ऑपरेशन की दिशा तय की थी। डिक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर का प्रीमियर शनिवार रात 9 बजे डिस्कवरी चैनल और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म डिस्कवरी प्लस पर किया जाएगा। यह सीरीज दर्शकों को उन अनकहे पहलुओं से रूबरू कराएगी जो अब तक सार्वजनिक नहीं थे।