भारत और कनाडा NSA बैठक: आतंकवाद और साइबर अपराध पर सहयोग बढ़ाने का बड़ा फैसला

भारत और कनाडा ने आतंकवाद, हिंसक चरमपंथ और संगठित अपराध के खिलाफ सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। एनएसए अजीत डोभाल और डेविड मॉरिसन की बैठक में रक्षा संबंधों, सीईपीए और साइबर अपराध पर चर्चा हुई।

भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, दोनों देश राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) स्तर की बैठक के दौरान सुरक्षा चुनौतियों के व्यापक स्पेक्ट्रम पर सहयोग बढ़ाने के लिए सहमत हुए हैं। इस चर्चा का मुख्य केंद्र ट्रांसनेशनल ऑर्गनाइज्ड क्राइम (अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध), आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ से मुकाबला करना था। यह बैठक दोनों देशों के बीच सुरक्षा संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जा रही है। नई दिल्ली में मंगलवार को हुई इस अहम बैठक में दोनों पक्षों ने साझा चिंताओं को दूर करने और सहयोग के नए रास्ते तलाशने के लिए विस्तृत बातचीत की।

उच्च स्तरीय राजनयिक मुलाकात

इस बैठक में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और कनाडा के प्रधानमंत्री के वरिष्ठ कूटनीतिक एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों के सलाहकार डेविड मॉरिसन शामिल हुए। मॉरिसन एनएसए अजीत डोभाल के निमंत्रण पर भारत पहुंचे थे, जो दोनों देशों के बीच संबंधों को स्थिर करने और सुधारने के आपसी इरादे का संकेत है। इस मुलाकात को नई दिल्ली और ओटावा के बीच दूरियों को पाटने और एक मजबूत सुरक्षा ढांचा तैयार करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। दोनों अधिकारियों ने मौजूदा द्विपक्षीय सुरक्षा और कानून प्रवर्तन सहयोग की समीक्षा की और यह सुनिश्चित किया कि दोनों देश अपने रणनीतिक उद्देश्यों में एक साथ हैं।

आतंकवाद और संगठित अपराध पर कड़ा रुख

बैठक का एक प्रमुख परिणाम अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ सहयोग को मजबूत करने पर बनी सहमति रही। भारत और कनाडा दोनों ने वैश्विक खतरों के बदलते स्वरूप और एक समन्वित प्रतिक्रिया की आवश्यकता को स्वीकार किया और उन्होंने आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ के खिलाफ लड़ाई में अपने समन्वय को मजबूत करने का संकल्प लिया, जो दोनों देशों के लिए बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। चर्चा में इन गतिविधियों में शामिल नेटवर्क को ध्वस्त करने और हिंसा को बढ़ावा देने वाली कट्टरपंथी विचारधाराओं के प्रसार को रोकने के लिए सक्रिय उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

ड्रग्स, मानव तस्करी और साइबर अपराध के खिलाफ जंग

सुरक्षा वार्ता का दायरा कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक फैला हुआ था, जिसमें नशीली दवाओं की तस्करी और मानव तस्करी के खिलाफ लड़ाई शामिल थी और दोनों पक्षों ने इन अवैध व्यापारों पर अंकुश लगाने के लिए आपसी सहयोग के महत्व पर जोर दिया, जिनके दूरगामी सामाजिक और सुरक्षा प्रभाव होते हैं। इसके अलावा, बैठक में तेजी से बढ़ते साइबर अपराध और जबरन वसूली (एक्सटॉर्शन) के मामलों पर भी चर्चा की गई। जैसे-जैसे डिजिटल बुनियादी ढांचा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होता जा रहा है, भारत और कनाडा साइबर स्पेस को सुरक्षित करने और अपने नागरिकों को डिजिटल खतरों और वित्तीय अपराधों से बचाने के लिए अपने सहयोगी प्रयासों को बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।

प्रत्यर्पण और संस्थागत तंत्र का सुदृढ़ीकरण

कानूनी और कानून प्रवर्तन सहयोग चर्चा का एक अन्य प्रमुख स्तंभ था। दोनों देश वांछित अपराधियों के प्रत्यर्पण से संबंधित मामलों में सहयोग मजबूत करने पर सहमत हुए, ताकि गंभीर अपराधों के आरोपी व्यक्ति सीमा पार करके न्याय से बच न सकें। उन्होंने फरवरी में तय किए गए शेयर्ड सिक्योरिटी वर्क प्लान (Shared Security Work Plan) के तहत हुई प्रगति की भी समीक्षा की। संवेदनशील मुद्दों पर समय पर सूचना साझा करना सुनिश्चित करने के लिए, दोनों पक्ष मौजूदा संस्थागत तंत्र को मजबूत करने और आवश्यकतानुसार नए संचार चैनल बनाने पर सहमत हुए और इसमें साइबर सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में नए संरचित संवाद शुरू करने की संभावना तलाशना भी शामिल है।

आर्थिक और रक्षा संबंधों पर ध्यान

सुरक्षा के अलावा, एजेंडे में आर्थिक और रक्षा संबंध भी शामिल थे। दोनों पक्षों ने व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) के लिए बातचीत को आगे बढ़ाने के प्रयासों का स्वागत किया, जिसका उद्देश्य व्यापार और निवेश संबंधों को गहरा करना है। इसके अलावा, अपने संबंधित नेतृत्व की सोच के अनुरूप, दोनों पक्षों ने एक ठोस रक्षा संबंध (Substantive Defence Relationship) विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा की। यह पारंपरिक सुरक्षा सहयोग से आगे बढ़ने और एक बहुआयामी साझेदारी बनाने के व्यापक रणनीतिक इरादे को दर्शाता है जिसमें आर्थिक विकास और रक्षा आधुनिकीकरण शामिल है।

राजनयिक संदर्भ और वैश्विक दृष्टिकोण

यह बैठक पिछले एक साल में हुए निरंतर और रचनात्मक द्विपक्षीय संवाद की पृष्ठभूमि में हुई। दोनों पक्षों ने हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और भारत तथा कनाडा के प्रधानमंत्रियों के बीच हुई बातचीत से मिले मार्गदर्शन का उल्लेख किया। विशेष रूप से, मार्च में नई दिल्ली में और जून में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई चर्चाओं को संबंधों की वर्तमान दिशा तय करने में सहायक बताया गया। एनएसए स्तर की इस बैठक ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक मंच भी प्रदान किया, जो अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने में दोनों देशों के साझा हितों को दर्शाता है।