Shardiya Navratri: शारदीय नवरात्रि, जो 22 सितंबर 2025 से शुरू हो चुकी है, हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है। इस वर्ष, तृतीया तिथि के दो दिन पड़ने के कारण नवरात्रि का व्रत 10 दिनों तक रखा जाएगा। इस विशेष अवसर पर, नवरात्रि के पांचवें दिन, 26 सितंबर 2025, शुक्रवार को मां दुर्गा के चौथे स्वरूप, मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जाएगी।
मां कूष्मांडा
मां कूष्मांडा को ब्रह्मांड की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि उन्होंने अपनी अलौकिक शक्ति और मुस्कान से सृष्टि की रचना की थी। इनकी पूजा से जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। मां कूष्मांडा सूर्य के समान तेजस्वी हैं और इनका वाहन सिंह है। इनके आठ भुजाएं हैं, जिनमें कमल, धनुष, बाण, चक्र, गदा, जपमाला, और अमृत कलश जैसे प्रतीक सुशोभित हैं।
मां कूष्मांडा की पूजा का महत्व
पांचवें दिन मां कूष्मांडा की पूजा करने से भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। यह माना जाता है कि इनकी भक्ति से सभी प्रकार के संकट दूर हो जाते हैं और घर-परिवार में सुख-शांति का वास होता है। इस दिन भक्तजन मां को मालपुए और हलवे का भोग लगाते हैं और श्रद्धापूर्वक उनकी आरती करते हैं।
मां कूष्मांडा की आरती
मां कूष्मांडा की आरती भक्ति और श्रद्धा के साथ गाई जाती है। यह आरती मां की महिमा का गुणगान करती है और भक्तों के मन को शांति प्रदान करती है। नीचे दी गई है मां कूष्मांडा की आरती:
मां कूष्मांडा देवी की आरती
कूष्मांडा जय जग सुखदानी। मुझ पर दया करो महारानी॥
पिगंला ज्वालामुखी निराली। शाकंबरी माँ भोली भाली॥
लाखों नाम निराले तेरे। भक्त कई मतवाले तेरे॥
भीमा पर्वत पर है डेरा। स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
सबकी सुनती हो जगदंबे। सुख पहुँचती हो माँ अंबे॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा। पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
माँ के मन में ममता भारी। क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
तेरे दर पर किया है डेरा। दूर करो माँ संकट मेरा॥
मेरे कारज पूरे कर दो। मेरे तुम भंडारे भर दो॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए। भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥
पूजा विधि
प्रातः स्नान और तैयारी: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
मां की प्रतिमा स्थापना: मां कूष्मांडा की प्रतिमा या चित्र को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें।
भोग: मां को मालपुए, हलवा, फल और मिश्री का भोग लगाएं।
दीप और धूप: दीपक जलाएं और धूपबत्ती प्रज्वलित करें।
मंत्र जाप: मां कूष्मांडा के मंत्र "ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः" का जाप करें।
आरती: अंत में मां की आरती करें और अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
नवरात्रि 2025 की विशेषता
इस बार नवरात्रि का पर्व 10 दिनों का है, जो इसे और भी खास बनाता है। मां कूष्मांडा की पूजा का यह दिन भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। मां की कृपा से जीवन के सभी कष्ट दूर हो सकते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं।
अंतिम विचार
मां कूष्मांडा की आराधना न केवल आध्यात्मिक बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करती है। इस शारदीय नवरात्रि, 26 सितंबर 2025 को मां कूष्मांडा की पूजा करें और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को सुखमय बनाएं।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र के नियमों पर आधारित है. Zoom News इसकी पुष्टि नहीं करता है.
