भारतीय वायुसेना की ताकत और रणनीतिक कौशल ने एक बार फिर दुनिया को हैरान कर दिया है। स्विट्जरलैंड के एक प्रमुख सैन्य थिंक टैंक ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि कैसे 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया था और इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत की वायु श्रेष्ठता इतनी घातक थी कि पाकिस्तानी सेना के पास सीजफायर की गुहार लगाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।
क्या है स्विस रिपोर्ट का दावा?
पुली, स्विट्जरलैंड स्थित 'सेंटर डी’हिस्टोयर एट डे प्रॉस्पेक्टिव मिलिटेयर्स' (CHPM) ने अपनी रिपोर्ट 'ऑपरेशन सिंदूर: द इंडिया-पाकिस्तान एयर वॉर' में इस पूरे घटनाक्रम का विश्लेषण किया है। सेवानिवृत्त स्विस वायु सेना के मेजर जनरल एड्रियन फॉन्टानेलाज द्वारा लिखित यह रिपोर्ट बताती है कि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने यह ऑपरेशन शुरू किया था। चार दिनों तक चले इस ऑपरेशन ने पाकिस्तान के सैन्य ढांचे की कमर तोड़ दी थी।
पाकिस्तानी ड्रोनों की विफलता
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने भारत की रक्षा प्रणाली को। भेदने के लिए अपने सबसे आधुनिक ड्रोनों का इस्तेमाल किया था। इसमें तुर्की निर्मित Bayraktar TB2, Akinci और Yihaa III जैसे ड्रोन शामिल थे। पाकिस्तान का लक्ष्य अदमपुर और श्रीनगर जैसे महत्वपूर्ण एयर स्टेशनों को निशाना बनाना था, जो नियंत्रण रेखा (LoC) से 100-150 किमी दूर स्थित थे। हालांकि, भारतीय वायु रक्षा प्रणाली इतनी मजबूत साबित हुई कि पाकिस्तानी ड्रोन अपने लक्ष्यों तक पहुंचने में पूरी तरह विफल रहे।
इजरायली तकनीक और भारतीय मिसाइलों का प्रहार
भारत ने इस युद्ध में अपनी गुप्त रणनीतियों का बखूबी इस्तेमाल किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय सेना ने इजरायली मूल के 'Harop' और 'Harpy' लूटेरिंग म्यूनिशन्स का उपयोग किया। 8 और 9 मई को भारत ने पाकिस्तान की चार प्रमुख एयर-डिफेंस साइट्स। पर हमला किया, जिससे चुनियां और पासरूर में उनके अर्ली-वार्निंग रडार नष्ट हो गए। इसके अलावा, भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के 5 लड़ाकू विमानों (F-16 और JF-17) को भी मार गिराया।
पाकिस्तान के भीतर गहरी तबाही
भारतीय वायुसेना ने अपने हवाई क्षेत्र से ही ब्रह्मोस (BrahMos), स्कैल्प (SCALP-EG) और रैम्पेज (Rampage) जैसी घातक मिसाइलें दागीं और इन मिसाइलों ने पाकिस्तान के भीतर 200 किमी तक गहरे घाव किए। इस्लामाबाद के पास नूर खान एयर बेस का कमांड सेंटर तबाह हो गया, जबकि मुरिद एयर बेस पर ड्रोन फ्लीट के हैंगर क्षतिग्रस्त हो गए। राहिम यार खान और सुक्कुर एयर बेस पर भी भारी नुकसान हुआ। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि भारत ने परमाणु सीमा को पार किए बिना अपनी सैन्य श्रेष्ठता साबित की, जिससे पाकिस्तान युद्धविराम के लिए मजबूर हुआ।