पाकिस्तान की इजराइल को चेतावनी: राजनयिकों को नुकसान पर दी जवाबी कार्रवाई की धमकी

तेहरान में पाकिस्तानी दूतावास के पास हुए हमलों के बाद पाकिस्तान ने इजराइल को कड़ी चेतावनी दी है। इस्लामाबाद ने स्पष्ट किया कि यदि उसके राजनयिकों या दूतावास को दुनिया में कहीं भी नुकसान पहुंचाया गया, तो वह इसका करारा जवाब देगा।

ईरान की राजधानी तेहरान में पाकिस्तानी दूतावास के निकट इजराइल और अमेरिका द्वारा किए गए कथित हवाई हमलों के बाद पाकिस्तान ने कड़ा रुख अपनाया है। इस्लामाबाद ने आधिकारिक तौर पर इजराइल को चेतावनी देते हुए कहा है कि उसके राजनयिकों या दूतावास परिसरों को किसी भी प्रकार का नुकसान पहुंचने की स्थिति में गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है और ईरान-इजराइल के बीच सैन्य संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान के मध्य क्षेत्रों में हुए इन हमलों ने पाकिस्तानी दूतावास और राजदूत के आवास के आसपास के इलाके को प्रभावित किया है और हालांकि शुरुआती जानकारी में किसी पाकिस्तानी कर्मचारी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन धमाकों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि दूतावास की इमारतें हिल गईं। पाकिस्तान ने इस घटना को अपनी संप्रभुता और राजनयिक सुरक्षा के लिए एक संभावित खतरे के रूप में देखा है।

पाकिस्तान स्ट्रेटेजिक फोरम का आधिकारिक बयान

सरकार से संबद्ध संस्थान ‘पाकिस्तान स्ट्रेटेजिक फोरम’ ने इस घटनाक्रम पर एक तीखा बयान जारी किया है। बयान में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इजराइल को पाकिस्तान की सैन्य क्षमता और उसकी संप्रभुता की रक्षा करने के संकल्प को कम करके नहीं आंकना चाहिए। फोरम ने कहा कि पाकिस्तान कोई कतर जैसा छोटा देश नहीं है जिसे नजरअंदाज किया जा सके। यदि दुनिया के किसी भी हिस्से में पाकिस्तानी राजनयिकों को निशाना बनाया जाता है, तो पाकिस्तान अपनी रक्षा में जवाबी कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र और सक्षम है।

तेहरान में हमलों का विवरण और प्रभाव

गुरुवार को तेहरान के घनी आबादी वाले इलाकों में इजराइल और अमेरिका की ओर से हवाई हमले किए जाने की खबरें सामने आईं। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान के रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाना था। सूत्रों के अनुसार, हमले के दौरान पाकिस्तानी दूतावास के पास स्थित कई इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि धमाकों की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय इस स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और तेहरान स्थित अपने मिशन के साथ निरंतर संपर्क में है।

ईरान और इजराइल के बीच बढ़ता सैन्य संघर्ष

अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहा यह सैन्य संघर्ष अब 28वें दिन में प्रवेश कर चुका है। शनिवार रात को इजराइल ने ईरान के सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम से जुड़े ठिकानों पर भी हमले किए और ईरानी समाचार एजेंसियों के अनुसार, इन हमलों में कई नागरिक मारे गए हैं, जिनमें करमानशाह प्रांत की एक गर्भवती महिला भी शामिल है। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिका और इजराइल के ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी दी है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका और कूटनीति

यह तनावपूर्ण स्थिति तब उत्पन्न हुई है जब पाकिस्तान सक्रिय रूप से अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से प्रस्ताव दिया है कि यदि दोनों पक्ष सहमत हों, तो इस्लामाबाद शांति वार्ता की मेजबानी करने के लिए तैयार है। पाकिस्तान का मानना है कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए कूटनीतिक संवाद आवश्यक है। हालांकि, दूतावास के पास हुए हमलों ने इन शांति प्रयासों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। पाकिस्तान अब अपनी सुरक्षा चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की तैयारी कर रहा है।

अमेरिका की समय सीमा और क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के लिए होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की समय सीमा बढ़ाकर 6 अप्रैल कर दी है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि बातचीत जारी है, लेकिन यदि ईरान ने इस मार्ग को सुचारू नहीं किया, तो उसे अपने बिजली संयंत्रों पर विनाशकारी हमलों का सामना करना पड़ सकता है। होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है और इसके बंद होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है। इस बीच, पाकिस्तान ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी गुटबाजी का हिस्सा बनने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों और अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देगा।