Petrol Diesel Price Today: दिल्ली में कीमतें स्थिर, चेन्नई और जयपुर में मिली राहत

तेल कंपनियों ने आज के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम जारी किए हैं। दिल्ली में भाव स्थिर हैं, जबकि चेन्नई और जयपुर में गिरावट आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में तेजी देखी जा रही है।

तेल विपणन कंपनियों ने आज यानी महीने की 21 तारीख के लिए पेट्रोल और डीजल की नई दरों की घोषणा कर दी है। अगर आप आज अपनी गाड़ी लेकर पेट्रोल पंप जाने की योजना बना रहे हैं, तो पहले तेल की कीमतों का ताजा गणित समझना जरूरी है। आज का दिन आम उपभोक्ताओं के लिए मिलाजुला रहा है। कुछ राज्यों में आम आदमी को महंगाई से हल्की राहत मिली है, तो कुछ जगहों पर जेब का बोझ थोड़ा बढ़ गया है। वहीं, दिल्ली सहित कई बड़े शहरों में पेट्रोल और डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

बड़े शहरों में कीमतों की स्थिति

देश की राजधानी दिल्ली, कोलकाता, गुरुग्राम और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में आज ग्राहकों के लिए कोई नया बदलाव नहीं हुआ है। इन शहरों में तेल कंपनियों ने कीमतों को स्थिर रखा है। दिल्ली में रहने वाले लोग आज भी 98 रुपये 64 पैसे प्रति लीटर के हिसाब से पेट्रोल खरीद सकते हैं, जबकि डीजल 91 रुपये 58 पैसे पर टिका हुआ है। इसी तरह कोलकाता में पेट्रोल 109 रुपये 70 पैसे प्रति लीटर बिक रहा है। गुरुग्राम में पेट्रोल का भाव 99 रुपये 38 पैसे है, जबकि बेंगलुरु में ग्राहकों को 107 रुपये 16 पैसे प्रति लीटर का भुगतान करना पड़ रहा है।

चेन्नई, जयपुर और पटना में मिली राहत

चेन्नई, जयपुर और पटना के निवासियों के लिए आज अच्छी खबर आई है। चेन्नई में पेट्रोल 35 पैसे सस्ता होकर 104 रुपये 57 पैसे पर आ गया है, जबकि डीजल के दाम में 33 पैसे की कटौती हुई है। जयपुर में 30 पैसे की गिरावट के साथ पेट्रोल 108 रुपये 70 पैसे प्रति लीटर हो गया है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल के दाम में मामूली 4 पैसे की कमी आई है, जबकि वहां डीजल 94 रुपये 8 पैसे पर स्थिर बना हुआ है। पटना, लखनऊ, चंडीगढ़ और हैदराबाद के लोगों को भी आज कीमतों में आंशिक गिरावट का फायदा मिला है और हालांकि, नोएडा और भुवनेश्वर में तेल थोड़ा महंगा हो गया है, जिससे वहां के उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ा है।

टैक्स का गणित और कीमतों में अंतर

भारत के हर राज्य में ईंधन की कीमतें अलग-अलग होने के पीछे मुख्य कारण टैक्स संरचना है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति के अलावा, केंद्र सरकार द्वारा लगाई जाने वाली एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकारों द्वारा लगाया जाने वाला वैल्यू एडेड टैक्स (वैट) कीमतों को प्रभावित करता है। इसी वजह से हर शहर में तेल का भाव अलग होता है और केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाकर कीमतों को काबू में रखने की कोशिश की है, जिससे सरकारी खजाने को करीब 30000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसके अलावा, घरेलू गैस (एलपीजी) के दाम स्थिर रखने से कंपनियों को 40000 करोड़ रुपये का घाटा सहना पड़ा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार और कच्चे तेल का हाल

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आज फिर से हल्की तेजी देखी गई है। ब्रेंट क्रूड अपनी 5 पॉइंट 6 प्रतिशत की पिछली गिरावट से उबरते हुए 105 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार कर रहा है। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई 99 डॉलर के आसपास बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने ईरान के साथ बातचीत अंतिम चरण में होने का दावा किया है। इससे बाजार में वैश्विक आपूर्ति बेहतर होने की उम्मीद जगी है। गौरतलब है कि फरवरी के अंत से अब तक कच्चे तेल की कीमतें 40 प्रतिशत से ज्यादा उछल चुकी हैं। दुनिया के अन्य देशों की तुलना में भारत में कीमतों पर नियंत्रण बेहतर रहा है। अमेरिका में पेट्रोल 45 प्रतिशत महंगा हुआ है, जबकि म्यांमार, मलेशिया और यूएई में 50 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई है। इसके मुकाबले भारत में यह बढ़ोतरी सिर्फ 4 पॉइंट 4 प्रतिशत तक ही सीमित रही है, जो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम है।