पश्चिम बंगाल के फलता विधानसभा क्षेत्र में आज कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दोबारा मतदान की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पिछले मतदान के दौरान सामने आई गंभीर शिकायतों और अनियमितताओं के बाद चुनाव आयोग ने इस सीट पर फिर से वोटिंग कराने का निर्णय लिया था। शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सभी 285 मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन की ओर से न केवल जमीन पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, बल्कि आसमान से ड्रोन के जरिए भी हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
चुनाव रद्द होने का मुख्य कारण
फलता विधानसभा सीट पर पहले 29 अप्रैल को मतदान हुआ था। उस दौरान चुनाव आयोग को मतदान प्रक्रिया में धांधली की कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं और ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि उन्हें डरा-धमकाकर मतदान केंद्रों तक पहुंचने से रोका गया। इसके अलावा, सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से ईवीएम के साथ छेड़छाड़ के वीडियो भी सामने आए थे और कुछ जगहों पर उम्मीदवार के नाम के आगे टेप लगा दिया गया था, तो कहीं बटनों पर इत्र छिड़क दिया गया था ताकि यह पता चल सके कि मतदाता ने किसे वोट दिया है। इन सभी गंभीर शिकायतों की जांच के बाद चुनाव आयोग ने 2 मई को फलता के चुनाव को रद्द करने का फैसला किया था।
सुरक्षा के कड़े और नए इंतजाम
आज हो रहे दोबारा मतदान के लिए चुनाव आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव किए हैं और पिछली बार जहां प्रत्येक बूथ पर चार जवान तैनात थे, वहीं इस बार उनकी संख्या बढ़ाकर 8 कर दी गई है। हर मतदान केंद्र पर पैरामिलिट्री के 8 जवानों की मौजूदगी सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही, किसी भी आपात स्थिति या शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करने के लिए 30 क्विक रिस्पॉन्स टीमें (क्यूआरटी) बनाई गई हैं। ये टीमें क्षेत्र में लगातार गश्त कर रही हैं ताकि मतदाताओं में सुरक्षा का भाव बना रहे और वे बिना किसी डर के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
मैदान में मौजूद उम्मीदवार
फलता की इस चुनावी जंग में कुल 6 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के देवांशु पांडा, कांग्रेस के अब्दुल रजाक मोल्ला और माकपा (सीपीआईएम) के शंभू नाथ कुर्मी के बीच माना जा रहा है। इस चुनाव में एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव मैदान से हटने का ऐलान कर दिया। हालांकि, उनके इस फैसले का तकनीकी रूप से वोटिंग पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में उनका नाम और चुनाव चिह्न पहले से ही दर्ज है और नियमानुसार, मतदाता अभी भी उनके नाम के आगे का बटन दबा सकते हैं और उन वोटों की गिनती भी की जाएगी।
मतदाताओं के आंकड़े और परिणाम की तारीख
फलता विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की कुल संख्या 2 लाख 36 हजार से अधिक है। आंकड़ों के अनुसार, यहां 1 लाख 21 हजार पुरुष मतदाता और 1 लाख 15 हजार महिला मतदाता पंजीकृत हैं। पश्चिम बंगाल की कुल 294 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में आयोजित की गई थी। फलता का चुनाव रद्द होने के कारण 4 मई को केवल 293 सीटों के ही परिणाम घोषित किए गए थे। आज 21 मई को हो रहे इस मतदान के नतीजे 24 मई को घोषित किए जाएंगे, जिसके बाद बंगाल विधानसभा की सभी सीटों की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
