पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई भारतीय जनता पार्टी सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए धार्मिक आधार पर दिए जा रहे सभी भत्तों को समाप्त करने का फैसला किया है। सरकार गठन के मात्र नौ दिन बाद उठाए गए इस कदम ने राज्य की वित्तीय नीतियों में बड़े बदलाव का संकेत दिया है। कैबिनेट की बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि अब राज्य में किसी भी धार्मिक श्रेणी के आधार पर मानदेय या वजीफा नहीं दिया जाएगा।
धार्मिक नेताओं के भत्ते पर रोक
सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इमाम, मुअज्जिन और पुरोहितों के लिए चल रही धार्मिक सहायता योजनाओं को इस साल जून महीने से बंद कर दिया जाएगा और पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान, इन धार्मिक नेताओं को सूचना और सांस्कृतिक मामले विभाग तथा अल्पसंख्यक मामले और मदरसा शिक्षा विभाग के माध्यम से मानदेय दिया जाता था। पिछली सरकार के नोटिफिकेशन के अनुसार, इस मानदेय का उद्देश्य उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करना था।
महिला, बाल और समाज कल्याण मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने जानकारी दी कि कैबिनेट ने इन योजनाओं को बंद करने की औपचारिक मंजूरी दे दी है। उन्होंने बताया कि इसके लिए जल्द ही एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी, जिसमें यह उल्लेख होगा कि इन योजनाओं के लिए मौजूदा राज्य बजटीय आवंटन को समाप्त किया जा रहा है और हालांकि, मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रों के लिए चल रही किसी भी स्कॉलरशिप योजना को बंद नहीं किया जाएगा और वे पहले की तरह ही जारी रहेंगी।
मानदेय का पिछला गणित
उल्लेखनीय है कि इसी साल मार्च में पिछली ममता बनर्जी सरकार ने धार्मिक नेताओं के मानदेय में 500 रुपये की वृद्धि की थी। इस बढ़ोतरी के बाद, बंगाल में पंजीकृत मस्जिदों के इमामों को 3000 रुपये और मुअज्जिनों व पुरोहितों को 2000 रुपये प्रति माह का स्टाइपेंड मिल रहा था। अब नई सरकार के फैसले के बाद इन सभी को मिलने वाली यह मासिक सहायता राशि जून से बंद हो जाएगी।
महिलाओं के लिए अन्नपूर्णा योजना की शुरुआत
चुनाव से पहले महिलाओं को अधिक वित्तीय सहायता देने के वादे को पूरा करते हुए, शुभेंदु सरकार ने 1 जून से 'अन्नपूर्णा' योजना शुरू करने को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 3000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी। अग्निमित्रा पॉल ने बताया कि जो महिलाएं वर्तमान में पिछली सरकार की 'लक्ष्मी भंडार' योजना का लाभ ले रही हैं, उन्हें अन्नपूर्णा योजना का लाभ लेने के लिए दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। वे स्वतः ही इस नई योजना की हकदार बन जाएंगी और सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी।
सरकार उन महिलाओं के लिए एक नया वेब पोर्टल भी लॉन्च करेगी जो अब तक किसी भी सहायता योजना से नहीं जुड़ी हैं। मंत्री ने यह भी साफ किया कि जिन महिलाओं ने सीएए के तहत नागरिकता के लिए आवेदन किया है या जो मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए ट्रिब्यूनल गई हैं, वे भी अन्नपूर्णा योजना का लाभ पाने के लिए पात्र होंगी और इसके साथ ही, कैबिनेट ने 1 जून से सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा के प्रस्ताव को भी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।
OBC सूची रद्द और सातवां वेतन आयोग
कैबिनेट ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के 22 मई 2024 के फैसले का पालन करते हुए राज्य की मौजूदा ओबीसी सूची को रद्द करने का भी बड़ा फैसला लिया है। मंत्री ने कहा कि सरकार ओबीसी की राज्य सूची में बदलाव करेगी ताकि उन श्रेणियों और आरक्षण प्रतिशत को हटाया जा सके जिन्हें अदालत ने असंवैधानिक माना था। इसके लिए एक विशेष पैनल का गठन किया जाएगा जो ओबीसी श्रेणी के तहत कोटा पात्रता निर्धारित करेगा।
इसके अतिरिक्त, सरकारी कर्मचारियों के वेतन ढांचे में सुधार के लिए सातवें राज्य वेतन आयोग के गठन को भी मंजूरी दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि भाजपा की सरकार बनने के 45 दिनों के भीतर नया वेतन आयोग लागू किया जाएगा। यह नया वेतन ढांचा नगर निकायों, स्थानीय निकायों, शिक्षा बोर्डों और सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों पर भी लागू होगा। हालांकि, सोमवार की बैठक में महंगाई भत्ते के मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई।
