ममता बनर्जी का बड़ा ऐलान: 'मैं खुद वकील हूं, बीजेपी के खिलाफ शुरू हुई राजनीतिक लड़ाई'

रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर ममता बनर्जी ने भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए विपक्षी एकजुटता की अपील की है। उन्होंने बंगाल में तानाशाही और कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कानूनी और राजनीतिक लड़ाई का संकल्प लिया है।

रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बड़ा राजनीतिक ऐलान किया है। ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ विपक्षी पार्टियों से एकजुट होने की पुरजोर अपील की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनका मानना है कि जो लोग निडर हैं और जो सचमुच अपनी मातृभूमि से प्यार करते हैं, वे इस समय में अपने आप ही एकजुट हो जाएंगे। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि बंगाल में अब आतंक का राज शुरू हो गया है और इसके खिलाफ उनकी नैतिक और राजनीतिक लड़ाई का आगाज हो चुका है और उन्होंने इस आंदोलन में शामिल होने के लिए एनजीओ और अन्य सामाजिक संगठनों से भी विशेष अपील की है।

अनुमति न मिलने पर तानाशाही का आरोप

ममता बनर्जी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती मनाने के लिए कालीघाट मोड़, मुक्तदल और फायर ब्रिगेड स्टेशन के सामने अनुमति मांगी थी। हालांकि, प्रशासन द्वारा इन तीनों ही महत्वपूर्ण जगहों के लिए उन्हें अनुमति प्रदान नहीं की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर उन्हें इस बार जयंती मनाने की अनुमति क्यों नहीं दी गई। इस बाधा के बाद उन्होंने अपनी पार्टी के कार्यालय के बाहर ही जयंती मनाने का निर्णय लिया। ममता बनर्जी का कहना है कि यह पूरी तरह से तानाशाही का उदाहरण है और यह टीएमसी को चुप कराने की एक सोची-समझी कोशिश है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह खुद एक वकील हैं और अब खुलकर बीजेपी के खिलाफ यह लड़ाई लड़ेंगी।

कार्यकर्ताओं पर जुल्म और सुरक्षा का मुद्दा

टीएमसी प्रमुख ने आरोप लगाया कि बंगाल में उनके कार्यकर्ताओं पर लगातार जुल्म ढाए जा रहे हैं। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि दलित समुदाय की एक 92 वर्षीय महिला, जो उनके साथ रहती थी, उन्हें अब अपना घर छोड़कर कहीं और शरण लेनी पड़ी है। इसके अलावा, उस परिवार की एक नई-नवेली दुल्हन को भी बीजेपी द्वारा धमकाया गया है और उनसे घर खाली करा लिया गया है। ममता ने आरोप लगाया कि पार्टी के कई अन्य कार्यकर्ताओं और नेताओं के घरों के बाहर गुंडागर्दी की जा रही है और इस पूरे मामले पर पुलिस पूरी तरह से मौन साधे हुए है।

सुरक्षा हटाने पर बीजेपी को घेरा

ममता बनर्जी ने अपनी पिछली सरकार के व्यवहार की तुलना करते हुए कहा कि जब 2011 में वह बंगाल की सत्ता में आई थीं, तब उन्होंने किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं होने दी थी। उन्होंने कहा कि उस समय किसी को भी परेशान या प्रताड़ित नहीं किया गया था। ममता ने याद दिलाया कि उन्होंने तत्कालीन निवर्तमान मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनी खुद की बुलेटप्रूफ कार उनके पास भेजी थी और उन्हें Z+ सुरक्षा भी प्रदान की गई थी। इसके विपरीत, उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने सत्ता में आते ही उनकी सुरक्षा को तुरंत हटा दिया और उनकी कई अन्य सेवाओं को भी बंद कर दिया गया है।

विपक्षी एकजुटता और कानूनी मोर्चा

विपक्षी एकता पर बात करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि देश के सभी प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं ने उनसे संपर्क किया है। उन्होंने बताया कि उनकी सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, उद्धव ठाकरे और तेजस्वी यादव से विस्तृत बातचीत हुई है। इसके अलावा, अखिलेश यादव खुद उनसे मिलने आए थे। ममता ने हेमंत सोरेन और अरविंद केजरीवाल से भी संवाद होने की पुष्टि की। कानूनी मोर्चे पर उन्होंने बताया कि कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने उन्हें फोन किया है, जबकि प्रशांत भूषण और मेनका गुरुस्वामी भी इस लड़ाई में उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास कल्याण बनर्जी जैसे कई अन्य नेता हैं जो यह कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और उन्हें पता है कि यह लड़ाई कैसे लड़ी जाती है।

सांसद महुआ मोइत्रा मामले में तीखी प्रतिक्रिया

ममता बनर्जी ने अंत में कहा कि महुआ मोइत्रा ने उन्हें बताया कि वह उन लोगों के साथ किसी भी प्रकार की जुबानी बहस में नहीं पड़ना चाहती थीं। मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं को आश्वस्त किया कि उन्हें चिंता करने की आवश्यकता नहीं है और वे इस लड़ाई को पूरी मजबूती के साथ लड़ेंगे।