शुभेंदु अधिकारी का एक्शन: बंगाल में बीजेपी सरकार बनते ही अभिषेक बनर्जी की बढ़ीं मुश्किलें

पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत और शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जेड-प्लस सुरक्षा वापस ले ली गई है और उनकी 21 संपत्तियों को नगर निगम ने नोटिस जारी किया है।

पश्चिम बंगाल की राजनीतिक फिजा बदलते ही तृणमूल कांग्रेस के सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के लिए मुश्किलों का दौर शुरू हो गया है और राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद से ही डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी कार्रवाई के केंद्र में आ गए हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार उन पर लगातार शिकंजा कस रही है। बंगाल में 15 साल पुराने ममता बनर्जी के शासन को उखाड़ फेंकते हुए भाजपा ने 207 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इस सत्ता परिवर्तन के बाद से ही अभिषेक बनर्जी को एक के बाद एक कई बड़े झटके लग रहे हैं।

शुभेंदु अधिकारी का कड़ा रुख और एफआईआर

9 मई को शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली और पद संभालते ही उन्होंने कड़े फैसले लेने शुरू कर दिए। इसी कड़ी में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। उन पर आरोप है कि बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य भाजपा नेताओं के खिलाफ धमकी भरे बयान दिए थे। इस एफआईआर को रद्द कराने के लिए अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यह शिकायत राजीव सरकार नामक व्यक्ति द्वारा दर्ज कराई गई थी, जिसमें कहा गया है कि अभिषेक ने मंच से खुलेआम धमकी दी थी कि वह देखेंगे कि 4 मई को नतीजे आने के बाद उन्हें बचाने कौन आता है।

जेड-प्लस सुरक्षा की वापसी

प्रशासनिक स्तर पर अभिषेक बनर्जी को एक और बड़ा झटका तब लगा जब उनकी जेड-प्लस सुरक्षा वापस ले ली गई। पिछले 10 साल से उन्हें यह उच्च स्तरीय सुरक्षा मिली हुई थी, लेकिन अब उन्हें एक सामान्य सांसद को मिलने वाली सुरक्षा ही मुहैया कराई गई है। अभिषेक बनर्जी के साथ-साथ कल्याण बनर्जी और राजीव कुमार जैसे टीएमसी के अन्य बड़े नेताओं की सुरक्षा में भी कटौती की गई है। हालांकि, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा और उनकी सुरक्षा व्यवस्था पहले की तरह ही बनी रहेगी।

संपत्तियों पर नगर निगम का शिकंजा

अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें केवल कानूनी और सुरक्षा तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि उनकी संपत्तियां भी अब जांच के दायरे में हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया था कि अभिषेक की कुल 24 संपत्तियां जांच के घेरे में हैं। इसके तुरंत बाद कोलकाता नगर निगम ने उनकी 21 संपत्तियों का ब्योरा मांगने के लिए नोटिस जारी कर दिया। यह नोटिस भवन विभाग अधिनियम की धारा 400(1) के तहत भेजा गया है। नोटिस में अभिषेक बनर्जी को भवन के नक्शे और संपत्ति से जुड़े सभी दस्तावेजों के साथ नगर निकाय के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया है और इन संपत्तियों में हरीश मुखर्जी रोड स्थित शांतिनिकेतन भवन और कालीघाट क्रॉसिंग के पास स्थित एक अन्य इमारत शामिल है। निगम का कहना है कि इन इमारतों का निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुसार नहीं किया गया है।

करीबी साथी जहांगीर खान का पीछे हटना

राजनीतिक मोर्चे पर भी अभिषेक बनर्जी को अपने सबसे भरोसेमंद साथी जहांगीर खान के रूप में बड़ा झटका लगा है। जहांगीर खान को अभिषेक का बेहद करीबी माना जाता है और 2024 के लोकसभा चुनाव में डायमंड हार्बर सीट पर अभिषेक को 80 प्रतिशत से अधिक वोट दिलाने में उनकी अहम भूमिका रही थी। फलता विधानसभा क्षेत्र में 21 मई को दोबारा मतदान होना था, लेकिन मतदान से ठीक दो दिन पहले 19 मई को जहांगीर खान ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया और अपना नाम वापस ले लिया। फलता में उनका मुकाबला भाजपा के देबांशु पांडा से होना था, लेकिन ऐन वक्त पर उनके पीछे हटने से कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री की कुर्सी से ममता बनर्जी के हटते ही अभिषेक बनर्जी के लिए यह एक के बाद एक लगने वाले झटकों की श्रृंखला बन गई है।