पश्चिम एशिया संकट: पीएम मोदी ने बुलाई सीसीएस बैठक, यूएई-इजराइल से की चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच नई दिल्ली में सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति (CCS) की बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति और इजराइल के प्रधानमंत्री से फोन पर बात कर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु और पुडुचेरी के अपने दो दिवसीय दौरे से लौटने के तुरंत बाद रविवार रात नई दिल्ली में एक उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक की अध्यक्षता की। पश्चिम एशिया में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को देखते हुए प्रधानमंत्री ने कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक बुलाई। इस बैठक में क्षेत्र की मौजूदा स्थिति, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य पर पड़ने वाले प्रभावों की विस्तृत समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री ने इस दौरान संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी टेलीफोन पर बातचीत की।

कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी की उच्च स्तरीय समीक्षा

प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में देर रात तक चली सीसीएस की बैठक में देश के शीर्ष सुरक्षा और रणनीतिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (CDS) जनरल अनिल चौहान, कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन और विदेश सचिव विक्रम मिसरी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान समिति को ईरान और इजराइल के बीच हालिया सैन्य घटनाक्रमों और क्षेत्र में हुई वृद्धि के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई और अधिकारियों ने बताया कि बैठक में विशेष रूप से ईरान में हुए हवाई हमलों और उसके बाद उत्पन्न हुई अस्थिरता पर चर्चा की गई। समिति ने क्षेत्र में शांति बहाली के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई और संबंधित विभागों को स्थिति पर निरंतर नजर रखने के निर्देश दिए।

यूएई और इजराइल के नेतृत्व के साथ कूटनीतिक संवाद

प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ बातचीत में क्षेत्र में हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की। प्रधानमंत्री ने हमलों में हुए जानमाल के नुकसान पर गहरा दुख व्यक्त किया और स्पष्ट किया कि भारत इस चुनौतीपूर्ण समय में यूएई के साथ खड़ा है। उन्होंने यूएई में रहने वाले विशाल भारतीय समुदाय की देखभाल के लिए राष्ट्रपति का आभार व्यक्त किया। इसके बाद, पीएम मोदी ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी संवाद किया। इस दौरान उन्होंने तनाव कम करने और क्षेत्र में सुरक्षा तथा स्थिरता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है और संघर्ष को जल्द समाप्त करने के पक्ष में है।

भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और निकासी की तैयारी

बैठक में पश्चिम एशिया में रह रहे लगभग 90 लाख भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ईरान में लगभग 10,000 और इजराइल में 40,000 से अधिक भारतीय नागरिक निवास कर रहे हैं। सीसीएस ने क्षेत्र से यात्रा कर रहे भारतीय यात्रियों और वहां परीक्षाओं में शामिल हो रहे छात्रों के सामने आने वाली कठिनाइयों की समीक्षा की। विदेश मंत्रालय के अनुसार, पूरे क्षेत्र में स्थित भारतीय दूतावास अपने नागरिकों के साथ निरंतर संपर्क में हैं और आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे किसी भी स्थिति में भारतीय नागरिकों की सहायता और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित निकासी के लिए सभी व्यवहार्य कदम उठाएं।

होर्मुज स्ट्रेट और आर्थिक सुरक्षा पर प्रभाव

रणनीतिक दृष्टिकोण से बैठक में होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) की स्थिति पर भी चर्चा की गई और यह जलडमरूमध्य भारतीय तेल जहाजों और व्यापारिक कार्गो के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है। ईरान द्वारा इस मार्ग को बंद किए जाने की संभावनाओं और उससे उत्पन्न होने वाले आर्थिक प्रभावों का आकलन किया गया। अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्रीय सुरक्षा का सीधा असर भारत की आर्थिक और वाणिज्यिक गतिविधियों पर पड़ सकता है और सीसीएस ने ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी व्यवधान से निपटने के लिए वैकल्पिक उपायों पर भी विचार-विमर्श किया। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह कूटनीति और संवाद के माध्यम से विवादों के समाधान का समर्थन करता है।

क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भारत का रुख

भारत ने आधिकारिक तौर पर पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने की अपील की है। सीसीएस की बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि संघर्ष का विस्तार वैश्विक सुरक्षा के लिए हानिकारक हो सकता है और प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संयम बरतने और बातचीत की मेज पर लौटने का आह्वान किया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह क्षेत्र के सभी प्रमुख देशों के साथ संपर्क में है ताकि तनाव को कम करने में रचनात्मक भूमिका निभाई जा सके। सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसकी प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक शांति और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन सुनिश्चित करना है।