प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 28 जून को देशवासियों के साथ मन की बात कार्यक्रम के 135वें एपिसोड के माध्यम से संवाद किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने वर्ष 2026 के पहले छह महीनों की उपलब्धियों पर चर्चा करते हुए कहा कि इन छह महीनों में देश ने ऐसी कई कामयाबियां हासिल की हैं, जिनसे हर नागरिक का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि ये सभी उपलब्धियां देश की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के संकल्प से जुड़ी हुई हैं। प्रधानमंत्री ने नालंदा विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए कहा कि इस महान संस्थान ने शास्त्रार्थ की प्राचीन परंपरा को एक बार फिर जीवित कर दिया है। नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शास्त्रार्थ की इस परंपरा की शुरुआत की गई है, जो भारत की बौद्धिक विरासत को दर्शाती है।
अंधविश्वास से मुक्ति और पक्षी संरक्षण की कहानी
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को अंधविश्वास से दूर रहने की महत्वपूर्ण सलाह दी। उन्होंने उत्तर-पूर्व के राज्यों में पाए जाने वाले एक विशेष पक्षी का उदाहरण दिया, जिसे पहले समाज में अशुभ माना जाता था। प्रधानमंत्री ने बताया कि अब वहां की महिलाएं इस धारणा को बदलते हुए उस पक्षी को बचाने की मुहिम में जुटी हुई हैं। यह बदलाव इस बात का प्रतीक है कि कैसे जागरूकता के माध्यम से पुरानी और गलत मान्यताओं को तोड़ा जा सकता है। उन्होंने समाज से अपील की कि वे वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं और किसी भी प्रकार के अंधविश्वास में न फंसें।
सोना न खरीदने की अपील और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता
प्रधानमंत्री ने देश के लोगों द्वारा उनकी अपील को स्वीकार करने के लिए आभार व्यक्त किया और उन्होंने पूर्व में देशवासियों से सोना न खरीदने की अपील की थी और लोगों ने उनकी इस बात को गंभीरता से लिया, जिसके लिए उन्होंने सभी को धन्यवाद दिया। रक्षा क्षेत्र का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि आईएनएस दुनागिरी, आईएनएस संशोधक और संशोधक अग्रे की डिजाइन से लेकर उनके निर्माण तक का सारा काम पूरी तरह से स्वदेशी है। उन्होंने जून में डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) द्वारा स्वदेशी लॉन्ग-रेंज लैंड-अटैक क्रूज मिसाइल के सफल परीक्षण को भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया। इसके साथ ही, उन्होंने एविएशन सेक्टर में मेड-इन-इंडिया सी-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की पहली उड़ान का भी जिक्र किया और बताया कि भारत में ऐसे 40 विमान तैयार किए जा रहे हैं।
मेघालय के रूट ब्रिज और ब्यावरा की महिलाओं का नवाचार
प्रधानमंत्री ने मेघालय के प्रसिद्ध रूट ब्रिज की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने विस्तार से बताया कि रबर के पेड़ों की जड़ों से इन पुलों को बनने में कई दशक का समय लगता है। इन जड़ों को धीरे-धीरे एक निश्चित दिशा में मोड़ा जाता है, जिससे एक मजबूत पुल का निर्माण होता है और इन पुलों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि समय बीतने के साथ ये और भी अधिक मजबूत होते जाते हैं। वर्तमान में मेघालय के स्थानीय लोग 120 से ज्यादा ऐसे रूट ब्रिज की देखभाल कर रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा गांव की महिलाओं के कार्यों की भी सराहना की और इन महिलाओं ने प्लास्टिक कचरे के निपटान के लिए एक अनोखा तरीका निकाला है। वे आसपास के इलाकों से प्लास्टिक कचरा इकट्ठा करती हैं और उससे सजावटी पेड़ बनाती हैं और इस पहल के माध्यम से अब तक सैकड़ों किलो प्लास्टिक का पुनर्चक्रण किया जा चुका है।
पर्यावरण संरक्षण और जल संचयन का संदेश
आगामी त्योहारों के मद्देनजर प्रधानमंत्री ने गणेश चतुर्थी से पहले लोगों से मिट्टी की मूर्तियां बनाने और उपयोग करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि लोगों को प्लास्टर ऑफ पेरिस और विदेशों में बनी मूर्तियों को खरीदने से बचना चाहिए और उन्होंने हर उत्सव के दौरान स्वदेशी सामानों को प्राथमिकता देने और पर्यावरण की रक्षा करने का आग्रह किया। कार्यक्रम के समापन पर पीएम मोदी ने जल संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि बारिश की हर बूंद को बचाना अनिवार्य है। उन्होंने लोगों से सोकपिट बनाने और अन्य माध्यमों से वर्षा जल को जमीन के नीचे पहुंचाने का आग्रह किया ताकि भूजल स्तर में सुधार हो सके और भविष्य में पानी की कमी की समस्या का सामना न करना पड़े।
