1 जुलाई 2026 को भारत के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के शानदार 11 साल पूरे हो रहे हैं। इन बीते वर्षों में भारत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के क्षेत्र में एक वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा है। यह बदलाव इतना व्यापक है कि इसने देश के हर नागरिक के जीवन को गहराई से प्रभावित किया है और यदि आप आज सुबह की चाय पीने के बाद अपने मोबाइल फोन से क्यूआर कोड स्कैन करके भुगतान कर चुके हैं, तो आप अनजाने में ही उस महान परिवर्तन का हिस्सा बन चुके हैं जिसने पिछले एक दशक में भारत की पूरी तस्वीर बदल दी है। भारत अब केवल तकनीक का इस्तेमाल करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि वह दुनिया को डिजिटल समाधान देने वाला अग्रणी देश बन गया है।
यूपीआई का वैश्विक प्रभाव
डिजिटल इंडिया की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक यूपीआई (UPI) है। ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में होने वाले कुल रियल-टाइम डिजिटल लेनदेन का लगभग 49 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत के यूपीआई प्लेटफॉर्म से होता है। यह तकनीक अब केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका डंका पूरी दुनिया में बज रहा है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सिंगापुर, फ्रांस, मॉरीशस और श्रीलंका जैसे 8 से ज्यादा देशों में यूपीआई की सेवाएं लाइव हो चुकी हैं। इससे न केवल वैश्विक फिनटेक बाजार में भारत की पकड़ मजबूत हुई है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लेनदेन की प्रक्रिया भी पहले के मुकाबले काफी सरल हो गई है।
ग्रामीण भारत में डिजिटल गवर्नेंस का उदय
डिजिटल इंडिया की सफलता केवल पैसों के लेनदेन तक सीमित नहीं है। इसका सबसे बड़ा प्रभाव देश के उन ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में देखा गया है, जहां पहले बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना एक बड़ी चुनौती थी। आधार, डिजीलॉकर, कोविन, ई-संजीवनी, दीक्षा और उमंग जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने आम नागरिकों के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच को बहुत आसान बना दिया है। इन नागरिक-केंद्रित सेवाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल गवर्नेंस का एक नया और सफल मॉडल पेश किया है। अब सरकारी सेवाएं सीधे आम आदमी के मोबाइल फोन तक पहुंच रही हैं, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है।
अर्थव्यवस्था में डिजिटल योगदान
आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो डिजिटल तकनीक देश की अर्थव्यवस्था का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। वर्तमान में भारत की कुल जीडीपी में डिजिटल अर्थव्यवस्था का योगदान लगभग 12 से 14 प्रतिशत है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले एक दशक में यह आंकड़ा बढ़कर 20 प्रतिशत यानी अर्थव्यवस्था का पांचवां हिस्सा हो सकता है। इस कार्यक्रम ने 9 अलग-अलग स्तंभों के माध्यम से न केवल डिजिटल पहुंच को बढ़ाया है, बल्कि देश में स्टार्टअप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भारी निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। भारत के इस मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम को अपनाने के लिए दुनिया के 24 देशों ने भारत के साथ समझौते (MoU) किए हैं।
विकसित भारत 2047 का आधार
डिजिटल सशक्तिकरण अब भारत की वैश्विक कूटनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। साल 2023 में अपनी G20 अध्यक्षता के दौरान भारत ने इंडिया स्टैक ग्लोबल और ग्लोबल डीपीआई रिपॉजिटरी लॉन्च की थी। इसका परिणाम आज 24 देशों के साथ हुए डिजिटल आइडेंटिटी और डेटा एक्सचेंज समझौतों में दिखाई दे रहा है। जैसे-जैसे देश विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, डिजिटल इंडिया का यह ढांचा तकनीकी आत्मनिर्भरता, समावेशी विकास और हर नागरिक के सशक्तिकरण का सबसे बड़ा माध्यम साबित हो रहा है। 11 साल का यह सफर भारत की तकनीकी प्रगति और वैश्विक नेतृत्व की एक गौरवशाली गाथा है।
