प्रधानमंत्री मोदी: रिफॉर्म एक्सप्रेस और वैश्विक व्यापार समझौतों पर महत्वपूर्ण बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीटीआई को दिए साक्षात्कार में कहा कि वह सुधारों की गति से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं और हमेशा बेहतर करने की इच्छा रखते हैं। उन्होंने 38 देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों को भारत की मजबूत होती अर्थव्यवस्था और वैश्विक विश्वास का प्रमाण बताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार 15 फरवरी को समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) को दिए एक विशेष साक्षात्कार में देश के आर्थिक सुधारों और वैश्विक व्यापार नीति पर विस्तार से चर्चा की। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक जीवन में रहते हुए उनके भीतर एक 'सकारात्मक बेचैनी' बनी रहती है, जो उन्हें निरंतर बेहतर करने के लिए प्रेरित करती है और उन्होंने कहा कि वह अपने स्वभाव के कारण सुधारों की वर्तमान गति से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो सकते, क्योंकि हमेशा और अधिक प्रगति की गुंजाइश बनी रहती है। उनके अनुसार, यह निरंतरता ही देश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए आवश्यक है।

सुधारों के प्रति दृष्टिकोण और सकारात्मक बेचैनी

प्रधानमंत्री मोदी ने साक्षात्कार के दौरान अपने कार्य करने के दर्शन को साझा किया। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक सेवा और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित होता है, तो पूर्ण संतुष्टि का भाव प्रगति को रोक सकता है। प्रधानमंत्री के अनुसार, उनके भीतर की यह बेचैनी नकारात्मक नहीं बल्कि सकारात्मक है, जो उन्हें और उनकी सरकार को जनता के लिए और अधिक बेहतर करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' का उल्लेख करते हुए कहा कि यद्यपि देश ने पिछले दशक में अभूतपूर्व प्रगति की है, लेकिन उनकी दृष्टि हमेशा अगले बड़े लक्ष्य पर टिकी रहती है।

व्यवस्थागत बदलाव और रिफॉर्म एक्सप्रेस की गति

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने केवल छोटे-मोटे बदलावों तक खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि व्यवस्था में बड़े और बुनियादी सुधार किए हैं। उन्होंने बताया कि 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' के तहत किए गए कार्यों का उद्देश्य भारत की प्रशासनिक और आर्थिक संरचना को आधुनिक बनाना है। प्रधानमंत्री के अनुसार, अब तक जो प्रगति हुई है उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन सुधार एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार की प्रतिबद्धता सुधारों को पूरी निष्ठा के साथ लागू करने की है ताकि देश एक नई और विकसित दिशा में आगे बढ़ सके।

भारत की बढ़ती वैश्विक भागीदारी और आर्थिक मजबूती

वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत की अंतरराष्ट्रीय भागीदारी में तेजी से वृद्धि हुई है और उन्होंने इसका श्रेय मजबूत होती घरेलू अर्थव्यवस्था, प्रतिस्पर्धी उद्योगों और सरकार के आत्मविश्वास भरे रवैये को दिया। प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत अब केवल एक बाजार नहीं बल्कि दुनिया के लिए एक भरोसेमंद विनिर्माण और व्यापारिक भागीदार के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव अचानक नहीं आया है, बल्कि यह वर्षों की नीतिगत स्थिरता और स्पष्ट आर्थिक विजन का परिणाम है।

38 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते और रिकॉर्ड उपलब्धि

व्यापारिक मोर्चे पर सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि भारत ने अब तक 38 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताया। प्रधानमंत्री ने तुलना करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के समय भी कई व्यापार समझौतों पर चर्चा शुरू हुई थी, लेकिन वे लंबे समय तक लंबित रहे और ठोस परिणाम नहीं दे सके। मौजूदा सरकार ने इन वार्ताओं को तार्किक परिणति तक पहुँचाया है। उन्होंने विशेष रूप से यूरोपीय संघ और अन्य प्रमुख आर्थिक शक्तियों के साथ हुए समझौतों का उल्लेख किया, जो भारतीय कंपनियों के लिए वैश्विक बाजारों के द्वार खोल रहे हैं।

नीतिगत स्थिरता और वैश्विक विश्वास का निर्माण

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और देशों का भारत पर भरोसा बढ़ने का मुख्य कारण राजनीतिक स्थिरता और पारदर्शी नीतियां हैं। उन्होंने बताया कि जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल था, तब भारत ने अपनी नीतियों में स्पष्टता बनाए रखी। इससे न केवल विदेशी निवेश में वृद्धि हुई, बल्कि भारत को एक विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला भागीदार के रूप में भी पहचान मिली। प्रधानमंत्री के अनुसार, 38 देशों के साथ हुए ये समझौते अलग-अलग महाद्वीपों और विभिन्न आर्थिक क्षमताओं वाले देशों के साथ हैं, जो भारत की विविध व्यापारिक क्षमता को प्रदर्शित करते हैं।

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