प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को उज्बेकिस्तान की महत्वपूर्ण यात्रा के लिए रवाना हुए। उनकी यह यात्रा दो चरणों में विभाजित है, जिसमें वह पहले 29 से 30 अगस्त तक उज्बेकिस्तान के दौरे पर रहेंगे। इसके पश्चात, वह किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक के लिए प्रस्थान करेंगे, जहां 30 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। भारत से प्रस्थान करने से पूर्व प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि वह इस संगठन के प्रति भारत के दृष्टिकोण को साझा करने और आतंकवाद के अभिशाप से मुक्त क्षेत्र के निर्माण के लिए सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने के इच्छुक हैं।
आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ साझा संकल्प
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि वह एक ऐसे क्षेत्र का निर्माण करना चाहते हैं जो आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद की चुनौतियों से पूरी तरह मुक्त हो। उन्होंने रेखांकित किया कि ये चुनौतियां न केवल हमारे पड़ोस के लिए बल्कि विश्व के अन्य हिस्सों में भी शांति और स्थिरता के लिए निरंतर खतरा बनी हुई हैं और मोदी ने कहा कि भारत 2017 से एससीओ का एक सक्रिय और रचनात्मक सदस्य रहा है। वह सुरक्षा, संपर्क और अवसर के सिद्धांतों पर आधारित क्षेत्र के लिए भारत के नजरिए को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं ताकि सदस्य देशों के साथ मिलकर शांतिपूर्ण भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।
उज्बेकिस्तान के साथ रणनीतिक साझेदारी का विस्तार
प्रधानमंत्री की उज्बेकिस्तान यात्रा वहां के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर हो रही है। मोदी 29 से 30 अगस्त तक ताशकंद में रहेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हाल के वर्षों में भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ व्यापार, निवेश, डिजिटल संपर्क, रक्षा और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को और अधिक मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। यह चर्चा 'विकसित भारत' और 'नए उज्बेकिस्तान' के साझा दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम होगी।
सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों का दौरा
ताशकंद प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री मोदी कई महत्वपूर्ण सांस्कृतिक स्थलों का भी दौरा करेंगे और वह वहां स्थित शास्त्री स्मारक पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके अतिरिक्त, वह 'ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ऑरियंटल स्टडी' में स्थित महात्मा गांधी केंद्र का भी दौरा करेंगे और प्रधानमंत्री ने इन स्थलों को दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक और लोगों से लोगों के बीच के संबंधों का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा मध्य एशिया के साथ भारत के सभ्यतागत संबंधों को और अधिक गहरा करने में सहायक सिद्ध होगी।
बिश्केक में 26वां एससीओ शिखर सम्मेलन
उज्बेकिस्तान के बाद प्रधानमंत्री मोदी किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव के निमंत्रण पर बिश्केक पहुंचेंगे। यहां वह 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे, जो इस संगठन की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। मोदी ने कहा कि वह राष्ट्रपति जापारोव और अन्य एससीओ नेताओं से मिलने के लिए उत्सुक हैं। इसके साथ ही वह छठे 'वर्ल्ड नोमैड गेम्स' के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। यह समारोह मध्य एशिया की समृद्ध और जीवंत विरासत का उत्सव है, जिसके प्रति भारत गहरा सम्मान रखता है।
द्विपक्षीय बैठकें और क्षेत्रीय सुरक्षा
अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी एससीओ शिखर सम्मेलन को संबोधित करेंगे और सुरक्षा, कनेक्टिविटी तथा आर्थिक अवसरों से जुड़ी भारत की प्राथमिकताओं को दुनिया के सामने रखेंगे। शिखर सम्मेलन के इतर, प्रधानमंत्री एससीओ के अन्य सदस्य देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे और इन बैठकों का उद्देश्य आपसी हितों के मुद्दों पर चर्चा करना और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देना है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि उनकी यह यात्रा शांति, स्थिरता और समृद्धि के साझा प्रयासों को नई गति प्रदान करेगी।
