देश में पेपर लीक के गंभीर मुद्दे को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के ऐलान पर तीखा पलटवार किया है। राहुल गांधी ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वर्तमान शासन ने ही देश के युवाओं के भविष्य और पूरी शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने का काम किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली के कारण ही आज छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
शिक्षा व्यवस्था की बर्बादी का लगाया आरोप
राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि सरकार ने न केवल शिक्षा प्रणाली पर बाहरी तत्वों के कब्जे को होने दिया, बल्कि इस बर्बादी की प्रक्रिया को बढ़ावा भी दिया। उन्होंने आगे कहा कि इस पूरी अव्यवस्था के लिए जो लोग जिम्मेदार हैं, उन्हें सरकार द्वारा संरक्षण दिया जा रहा है। राहुल गांधी के अनुसार, छात्रों की मांगें बिल्कुल स्पष्ट हैं और सरकार को उन पर तुरंत ध्यान देना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य को सबसे ज्यादा नुकसान इसी सरकार के कार्यकाल में पहुंचा है।
विपक्ष की तीन प्रमुख मांगें
छात्रों के हितों की रक्षा की बात करते हुए राहुल गांधी ने सरकार के सामने तीन मुख्य मांगें रखी हैं। उनकी पहली मांग है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से तत्काल हटाया जाए। दूसरी मांग के रूप में उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी विफलताओं के लिए देश के छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। तीसरी और महत्वपूर्ण मांग यह है कि जिन लोगों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ हिंसा की है, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। राहुल गांधी का मानना है कि जब तक ये कदम नहीं उठाए जाते, तब तक छात्रों का विश्वास बहाल नहीं किया जा सकता।
प्रधानमंत्री मोदी का फास्ट ट्रैक कोर्ट का ऐलान
इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन और देशव्यापी आक्रोश के बीच एक बड़ा ऐलान किया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेपर लीक के सभी दोषियों को ऐसी सजा दी जाएगी जो एक मिसाल बनेगी। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सरकार का यह कदम शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के गुस्से को शांत करने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
मल्लिकार्जुन खरगे का तीखा हमला
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने भी प्रधानमंत्री के इस ऐलान पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के राज में देश की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से खराब हो चुकी है। खरगे ने प्रधानमंत्री की घोषणा को केवल एक औपचारिक बयान करार देते हुए कहा कि देश को अब केवल शांतिपूर्ण घोषणाओं की जरूरत नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें अपने घर से बाहर निकलकर उन नौजवानों और महिलाओं की आंखों में देखना चाहिए जो अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं और जिन्होंने सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई है।
संसद में घमासान और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
गौरतलब है कि पेपर लीक का मुद्दा पिछले एक महीने से राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बना हुआ है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 30 दिनों से छात्र लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस मुद्दे की गूंज संसद के मानसून सत्र में भी सुनाई दे रही है, जहां पिछले तीन दिनों से विपक्ष इस पर विस्तृत चर्चा की मांग कर रहा है। विपक्ष के हंगामे और चर्चा की मांग के कारण सदन की कार्यवाही में लगातार बाधा आ रही है, लेकिन अभी तक इस विषय पर औपचारिक चर्चा शुरू नहीं हो पाई है। छात्र और विपक्षी दल इस मामले में सरकार से ठोस कार्रवाई और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
You are the one who has harmed the future of our youth the most.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) July 23, 2026
You allowed and encouraged the total capture and destruction of our education system - and protected every person responsible for it.
The students’ demands are clear:
1. Sack Dharmendra Pradhan.
2. Apologise to… https://t.co/0MK4wPMNiK
