राहुल गांधी की शाम 6 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस, सदन में बोलने से रोकने का लगाया आरोप

लोकसभा में 'लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026' पर चर्चा के दौरान हुए हंगामे के बाद राहुल गांधी ने शाम 6 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें सदन में छात्रों का मुद्दा उठाने से रोका गया और गृह मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी आज संसद की कार्यवाही के दौरान हुए घटनाक्रमों से काफी क्षुब्ध नजर आ रहे हैं। उनकी यह नाराजगी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए उनके हालिया पोस्ट में साफ तौर पर दिखाई दे रही है। राहुल गांधी ने घोषणा की है कि वह आज शाम 6 बजे एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे, जिसमें वह उन सभी मुद्दों पर विस्तार से बात करेंगे जिन्हें उन्हें सदन के पटल पर रखने से रोका गया। यह पूरा घटनाक्रम 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा के दौरान शुरू हुआ, जब सदन में भारी हंगामे के कारण राहुल गांधी अपना भाषण पूरा नहीं कर पाए।

लोक परीक्षा विधेयक पर चर्चा और हंगामा

संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में जब 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा की प्रक्रिया चल रही थी, तब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपना पक्ष रखना शुरू किया। हालांकि, उनके भाषण के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई और सदन में जमकर हंगामा हुआ। इस शोर-शराबे के बीच राहुल गांधी अपना संबोधन पूरा करने में असमर्थ रहे। इसके तुरंत बाद उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर शाम 6 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की जानकारी दी। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि वह इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में वह सब कहेंगे जो उन्हें सदन में कहने नहीं दिया गया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि वह सरकार के खिलाफ अपना हमला तेज करने वाले हैं।

गृह मंत्री पर लगाए गए गंभीर आरोप

राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सीधे तौर पर गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, "आज संसद में मेरे भाषण के दौरान मैंने दिल्ली में छात्रों पर हुई बर्बरता का मुद्दा उठाया और इसके ज़िम्मेदार का नाम लिया - गृह मंत्री अमित शाह। " उनके इस बयान से साफ है कि वह छात्रों के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में हैं और उन्होंने दिल्ली में छात्रों के साथ हुए व्यवहार के लिए सीधे तौर पर गृह मंत्रालय को जिम्मेदार ठहराया है।

सरकार और स्पीकर की तीखी प्रतिक्रिया

राहुल गांधी द्वारा गृह मंत्री का नाम लेकर लगाए गए आरोपों पर सरकार की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में मोर्चा संभालते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष को यह बताना चाहिए कि उन्होंने किस आधार पर देश के एक जिम्मेदार व्यक्ति पर इतने गंभीर आरोप लगाए हैं। रिजिजू ने मांग की कि राहुल गांधी या तो अपने आरोपों का आधार बताएं या फिर सदन से माफी मांगें और इस मामले पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी अपनी व्यवस्था दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नेता प्रतिपक्ष बिना किसी ठोस तथ्य, जांच या साक्ष्य के किसी भी व्यक्ति पर इस तरह के आरोप नहीं लगा सकते। स्पीकर ने सदन की मर्यादा बनाए रखने पर जोर दिया।

शिक्षा व्यवस्था और वैचारिक संगठन पर हमला

सदन में चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर गंभीर प्रहार किए। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था की आत्मा पर भारतीय जनता पार्टी के वैचारिक संगठन ने कब्जा कर लिया है। उन्होंने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का जिक्र करते हुए कहा कि वह तो इस पूरी व्यवस्था में सिर्फ एक प्रतीक मात्र थे। राहुल गांधी ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी बच्चों के माता-पिता में शायद इतना साहस नहीं है कि वे बीजेपी और उसके वैचारिक संगठन का मुकाबला कर सकें, लेकिन इन बच्चों ने सामने आकर चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि छात्रों ने अपने भीतर के डर को बाहर निकालकर खुलकर सवाल पूछे हैं।

"तथाकथित गृह मंत्री" वाली टिप्पणी और सदन का स्थगन

भाषण के दौरान राहुल गांधी ने गृह मंत्री की सदन में अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि 'तथाकथित गृह मंत्री' में इतनी हिम्मत नहीं है कि वह सदन में आ सकें। राहुल ने आरोप लगाया कि गृह मंत्री सदन में इसलिए नहीं हैं क्योंकि वह डरे हुए हैं और इसके बाद उन्होंने छात्रों पर बलप्रयोग का मुद्दा फिर से उठाया, जिस पर किरेन रिजिजू ने तीखा विरोध दर्ज कराया। रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी ने गलत बयान दिया है और उन्होंने अपने विशेषाधिकार का हनन किया है, जिसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए और हंगामे को बढ़ता देख लोकसभा स्पीकर ने दोपहर 1 बजकर 53 मिनट पर सदन की बैठक को अपराह्न 2 बजकर 30 मिनट तक के लिए स्थगित कर दिया।

असंसदीय शब्द और भाषण में रुकावट

राहुल गांधी के भाषण की शुरुआत भी विवादों से भरी रही। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत में एक ऐसे शब्द का इस्तेमाल किया, जिस पर सत्तापक्ष ने तुरंत आपत्ति जताई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी ने एक छात्रा का नाम लेकर जिस शब्द का प्रयोग किया है, वह असंसदीय है और उसे सदन की कार्यवाही से हटा दिया जाना चाहिए। स्पीकर ओम बिरला ने भी राहुल गांधी को संसद की मर्यादा के भीतर रहकर बिल पर बोलने की सलाह दी। सत्तापक्ष की ओर से लगातार हो रही टोकाटोकी से नाराज होकर राहुल गांधी ने एक समय बोलने से इनकार कर दिया और अपनी सीट पर बैठ गए। हालांकि, बाद में रिजिजू के यह कहने पर कि "हम उन्हें सुनने को तैयार हैं और वह अपनी बात रखें", राहुल गांधी ने अपना भाषण जारी रखा और रिजिजू ने यह भी जोड़ा कि भावुक चेहरा दिखाकर सदन को गुमराह नहीं किया जा सकता।